संविधान का 131वां संशोधन विधेयक असफल, विपक्ष ने इसे लोकतंत्र की बड़ी जीत बताया
सारांश
Key Takeaways
- संविधान का 131वां संशोधन विधेयक पारित नहीं हुआ।
- विपक्ष ने इसे लोकतंत्र की जीत बताया।
- महिलाओं के लिए 33%25 आरक्षण की मांग जारी है।
- मोदी सरकार की योजनाओं को एक झटका लगा है।
- विपक्ष का एकजुट होना महत्वपूर्ण है।
नई दिल्ली, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। शुक्रवार को लोकसभा में संविधान का 131वां संशोधन विधेयक पारित नहीं हो सका। मतदान के समय, 298 सांसदों ने बिल के पक्ष में वोट दिया, जबकि 230 सांसदों ने इसके खिलाफ मतदान किया। विधेयक के अस्वीकृत होने के बाद, विपक्ष ने इसे अपनी बड़ी जीत के रूप में देखा है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खतरनाक परिसीमन प्रस्तावों को महिला आरक्षण से जोड़ने की उनकी चालाकी लोकसभा में नाकाम हो गई है।"
उन्होंने आगे कहा, "यह हमारे लोकतंत्र, संघवाद और संविधान की जीत है। यह मोदी सरकार की वैधता पर भी सवाल उठाता है। मोदी सरकार को 2029 के चुनावों में महिलाओं के लिए 33%25 आरक्षण लागू करना चाहिए, जो कि सितंबर 2023 से विपक्ष की मांग रही है।"
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी एक्स पर लिखा, "मोदी-शाह ने देश की आधी आबादी को ढाल बनाकर डिलिमिटेशन करने की कोशिश की और लोकतंत्र, संविधान और संघवाद को चोट पहुँचाने का प्रयास किया, लेकिन एकजुट विपक्ष ने इसे रोक दिया।"
उन्होंने कहा, "मोदी-शाह की राजनीति अब औंधे मुंह गिर गई है। हम फिर से मांग करते हैं कि महिलाओं को 33%25 आरक्षण दिया जाए। यह प्रधानमंत्री जी की 'नारी शक्ति' के प्रति प्रतिबद्धता की असली परीक्षा होगी।"
आम आदमी पार्टी के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा, "संसद में डिलिमिटेशन बिल असफल हुआ। मोदी जी के अहंकार की हार हुई है। मोदी सरकार की उल्टी गिनती अब शुरू हो चुकी है।"