ईरान का आर्थिक संकट खुद उसके नेतृत्व ने स्वीकारा: अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने 26 अगस्त 2026 को दावा किया कि ईरान पर अमेरिकी आर्थिक दबाव का असर अब साफ दिखने लगा है — और इसकी पुष्टि खुद तेहरान के शीर्ष नेतृत्व के बयानों से हो रही है। बेसेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि ईरान के राष्ट्रपति और संसद स्पीकर, दोनों ने देश के गहराते आर्थिक संकट को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है।
बेसेंट का एक्स पोस्ट: 'दबाव काम कर रहा है'
बेसेंट ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'दबाव काम कर रहा है। ईरान का नेतृत्व अब खुद यह मान रहा है कि दुनिया जो देख रही है, वह सच है।' उन्होंने बताया कि ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने देश में आर्थिक संकट और जरूरी वस्तुओं की कमी को स्वीकार करते हुए कहा है कि 'किसी न किसी समय युद्ध खत्म होना ही चाहिए।'
संसद स्पीकर का बयान: सैन्य ताकत काफी नहीं
ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने और भी सीधे शब्दों में कहा, 'हमारे पास चाहे जितनी भी सैन्य ताकत हो, अगर लोग भूखे हैं और देश में पैसों का लेन-देन, आर्थिक विकास और घरेलू उत्पादन नहीं है, तो हम ज़्यादा समय तक टिक नहीं पाएंगे।' बेसेंट के अनुसार यह बयान इस बात का प्रमाण है कि अमेरिकी प्रतिबंध नीति अपना असर दिखा रही है।
ट्रंप प्रशासन की रणनीति: पूर्ण आर्थिक अलगाव
बेसेंट ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ईरानी शासन को सहारा देने वाली हर आर्थिक जीवनरेखा को बंद करने पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा, 'हमारा लक्ष्य इस दमनकारी शासन को सहारा देने वाली हर आर्थिक जीवनरेखा को काट देना है, जब तक कि तेहरान पूरी तरह अकेला न पड़ जाए।'
यह ऐसे समय में आया है जब ट्रंप प्रशासन ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कूटनीतिक और आर्थिक दोनों मोर्चों पर दबाव बढ़ा रहा है। गौरतलब है कि बेसेंट ने यह भी कहा कि ट्रंप ने वह कदम उठाया है जिसे उनके पूर्ववर्ती लंबे समय से टालते रहे — यानी ईरानी खतरे को केवल नियंत्रित करने की बजाय उसे जड़ से खत्म करने की दिशा में काम करना।
सहयोगियों को संदेश: साथ आएं या अलगाव झेलें
बेसेंट ने उन देशों और संस्थाओं को भी चेतावनी दी जो ईरान के साथ आर्थिक संबंध बनाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग अमेरिका के साथ खड़े होंगे उन्हें साझेदारी के फायदे मिलेंगे, लेकिन जो तेहरान से जुड़े रहेंगे वे भी एक कमज़ोर पड़ते और अलग-थलग होते शासन के साथ अलगाव का सामना करेंगे।
आगे क्या होगा
विशेषज्ञों के अनुसार, ईरानी नेतृत्व के इन बयानों को वाशिंगटन कूटनीतिक बातचीत की संभावना के संकेत के रूप में देख सकता है। हालांकि, तेहरान ने अभी तक किसी भी वार्ता की पुष्टि नहीं की है। आने वाले हफ्तों में अमेरिकी प्रतिबंधों की दिशा और ईरान की प्रतिक्रिया इस भू-राजनीतिक समीकरण को और स्पष्ट करेगी।