5 सितंबर 2026
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महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती: भांग, आभूषण और चंदन से बाबा महाकाल का भव्य शृंगार

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महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती: भांग, आभूषण और चंदन से बाबा महाकाल का भव्य शृंगार

सारांश

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भाद्रपद नवमी पर भस्म आरती का अलौकिक आयोजन हुआ। भांग, चंदन-लेप और आभूषणों से सुसज्जित बाबा महाकाल के दर्शन के लिए हज़ारों श्रद्धालु रात से ही कतारबद्ध रहे। महानिर्वाणी अखाड़े की सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार भस्म अर्पण के बाद बाबा साकार रूप में दर्शन देते हैं।

मुख्य बातें

5 सितंबर 2026 , शनिवार को भाद्रपद कृष्ण पक्ष नवमी पर श्री महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन में भस्म आरती संपन्न हुई।
बाबा महाकाल का भांग, चंदन-लेप और बहुमूल्य आभूषणों से भव्य शृंगार किया गया।
पंचामृत अभिषेक , कपूर आरती और मुकुट धारण के बाद भस्म आरती अर्पित की गई।
परंपरा के अनुसार महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म आरती अर्पित होती है।
भस्म आरती में पुरुषों के लिए धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है।

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 5 सितंबर 2026, शनिवार को भाद्रपद कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि पर बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। भांग, बहुमूल्य आभूषणों और चंदन के लेप से सुसज्जित बाबा के दर्शन पाने के लिए मंदिर परिसर में हज़ारों श्रद्धालु उपस्थित रहे। पूरे परिसर में 'जय श्री महाकाल' के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो उठा।

कपाट खुलने का क्रम

शनिवार की तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के उपरांत ढोल-नगाड़ों की गूँज के बीच बाबा महाकाल के कपाट विधिवत खोले गए। कपाट खुलते ही मंत्रोच्चार के साथ जलाभिषेक किया गया और तत्पश्चात दूध, दही, घी, शहद तथा फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। पूजा के क्रम में प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया।

भव्य शृंगार और भस्म आरती

कपूर आरती के बाद बाबा महाकाल ने मुकुट धारण किया। इसके बाद झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद की त्रिवेणी के बीच भस्म आरती अर्पित की गई। बाबा के विग्रह को चंदन का लेप लगाया गया तथा भांग और बहुमूल्य आभूषणों से उनका शृंगार किया गया, जिससे उनका स्वरूप अत्यंत दिव्य और मनोहारी दिखा।

महानिर्वाणी अखाड़े की परंपरा

परंपरा के अनुसार, महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म आरती अर्पित की जाती है। मान्यता है कि भस्म अर्पण के पश्चात बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में श्रद्धालुओं को दर्शन देते हैं — यही विश्वास लाखों भक्तों को उज्जैन की पावन नगरी की ओर खींचता है।

श्रद्धालुओं की उपस्थिति और नियम

भस्म आरती के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु बीती रात से ही कतारबद्ध हो गए थे। मंदिर के नियमानुसार, भस्म आरती के दौरान पुरुषों के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है। मंदिर के पुजारी ने महाआरती संपन्न कराई, जिसके बाद घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार की अनुगूँज देर तक परिसर में बनी रही। आगे भी विशेष तिथियों पर इसी परंपरा के साथ भस्म आरती आयोजित होती रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारत की जीवंत मंदिर-परंपरा का प्रमाण है जो सदियों से अटूट चली आ रही है। विशेष तिथियों पर श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या यह दर्शाती है कि डिजिटल युग में भी आस्था की जड़ें कितनी गहरी हैं। साथ ही, इस भीड़ के प्रबंधन और दर्शन-व्यवस्था की गुणवत्ता पर ध्यान देना ज़रूरी है, ताकि श्रद्धालुओं का अनुभव सुरक्षित और सम्मानजनक बना रहे।
RashtraPress
5 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती क्या है?
भस्म आरती उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन तड़के होने वाली विशेष पूजा है, जिसमें बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की जाती है। मान्यता है कि इस आरती के बाद बाबा निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं।
भस्म आरती में भांग और चंदन का क्या महत्व है?
भगवान शिव की पूजा में भांग और चंदन का विशेष धार्मिक महत्व है। चंदन का लेप शीतलता और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है, जबकि भांग शिव को अत्यंत प्रिय है और उनके शृंगार का अभिन्न अंग है।
भस्म आरती में दर्शन के लिए क्या पहनना अनिवार्य है?
मंदिर के नियमानुसार भस्म आरती के दौरान पुरुषों के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है। इस नियम का पालन सभी श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक है।
भस्म आरती महानिर्वाणी अखाड़े से क्यों जुड़ी है?
परंपरा के अनुसार महानिर्वाणी अखाड़े को महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती अर्पित करने का अधिकार प्राप्त है। यह परंपरा सदियों पुरानी है और इसे आज भी उसी विधि-विधान से निभाया जाता है।
भस्म आरती के दर्शन के लिए कब पहुँचना चाहिए?
भस्म आरती तड़के सूर्योदय से पहले होती है, इसलिए श्रद्धालुओं को रात से ही पहुँचने की सलाह दी जाती है। विशेष तिथियों पर भीड़ अधिक होती है, अतः पूर्व-पंजीकरण और समय पर उपस्थिति आवश्यक है।
राष्ट्र प्रेस
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