महाकालेश्वर मंदिर में आषाढ़ अष्टमी पर भव्य भस्म आरती, ओम-बेल पत्र-रुद्राक्ष से सजे बाबा महाकाल
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 21 जुलाई 2025 को आषाढ़ शुक्ल पक्ष अष्टमी के पावन अवसर पर बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। तड़के सुबह से ही हज़ारों श्रद्धालु इस अलौकिक दृश्य के साक्षी बनने के लिए मंदिर परिसर में उपस्थित रहे।
कपाट खुलने का क्रम
मंगलवार तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूँज के बीच बाबा महाकाल के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। कपाट खुलते ही मंदिर परिसर घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार से गुंजायमान हो उठा। दिव्य दर्शन होते ही उपस्थित श्रद्धालुओं ने "जय श्री महाकाल" के उद्घोष से पूरे परिसर को भर दिया।
शृंगार और अभिषेक की विधि
कपाट खुलने के साथ ही मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से तैयार पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। तत्पश्चात ओम, बेल पत्र, मुकुट और रुद्राक्ष की माला अर्पित कर बाबा महाकाल का भव्य शृंगार किया गया। मंदिर के पुजारी ने विधि-विधान से महाआरती संपन्न कराई।
भस्म आरती की परंपरा
गौरतलब है कि पूर्व में महाकाल को शमशान की राख अर्पित की जाती थी, किंतु अब विशेष रूप से कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का उपयोग किया जाता है। भस्म आरती के दौरान पुरुष श्रद्धालुओं के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिला श्रद्धालुओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है।
श्रद्धालुओं की उपस्थिति और व्यवस्था
बाबा महाकाल की भस्म आरती देश-विदेश में प्रसिद्ध है और इसके दर्शन के लिए आम जनमानस से लेकर著名 हस्तियाँ तक उज्जैन पहुँचती हैं। अनेक श्रद्धालु बीती रात से ही दर्शन की कतार में खड़े रहे। मंदिर परिसर और उसके आसपास व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़े पैमाने पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी।
आगे क्या
आषाढ़ माह के शेष पर्वों पर भी महाकालेश्वर मंदिर में विशेष पूजन और भस्म आरती के आयोजन जारी रहेंगे, जिनमें श्रद्धालुओं की संख्या और अधिक बढ़ने की संभावना है।