उज्जैन: आश्विन कृष्ण तृतीया पर महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती, कुंडल-रुद्राक्ष से सजे बाबा महाकाल
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में 29 सितंबर को आश्विन कृष्ण पक्ष तृतीया के पावन अवसर पर बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। मंदिर परिसर में उमड़े हज़ारों श्रद्धालुओं ने इस अलौकिक दृश्य के साक्षी बनकर अपने आराध्य के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त किया।
कपाट खुलने का क्रम
मंगलवार की तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच बाबा महाकाल के द्वार श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। जैसे ही दिव्य शृंगार और भस्म आरती के उपरांत भक्तों को बाबा के दर्शन हुए, पूरा परिसर 'जय श्री महाकाल' के जयघोष से गूंज उठा। घंटियों की टंकार, शंखनाद और मंत्रोच्चार ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
अभिषेक और पूजन विधि
मंदिर के पट खुलते ही मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। पूजन के दौरान प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के उपरांत बाबा ने मुकुट धारण किया और तत्पश्चात झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े तथा शंखनाद के साथ भस्म आरती की गई।
बाबा का दिव्य शृंगार
बाबा महाकाल के मस्तक पर त्रिपुंड लगाया गया और चाँदी का चंद्रमा सुशोभित किया गया। उनके कानों में कुंडल, गले में मोतियों और रुद्राक्ष की माला तथा अन्य आभूषण अर्पित किए गए। मंदिर के पुजारी ने विधिपूर्वक महाआरती संपन्न कराई।
परंपरा और मान्यता
परंपरा के अनुसार, महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म आरती अर्पित की जाती है। मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के पश्चात बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। भस्म आरती में सम्मिलित होने के लिए पुरुषों के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है।
श्रद्धालुओं की उपस्थिति
अपने आराध्य के दर्शन की आस में बड़ी संख्या में श्रद्धालु बीती रात से ही कतारबद्ध होकर प्रतीक्षा करते रहे। उज्जैन की पावन नगरी में देश के विभिन्न कोनों से आए भक्तों ने भस्म आरती में भाग लेकर अपनी आस्था का प्रकटन किया। आगामी आश्विन मास के शेष पर्वों पर भी इसी प्रकार की भव्य आरती और विशेष शृंगार की परंपरा जारी रहेगी।