उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर: भांग शृंगार और भस्म आरती में उमड़ा आस्था का सैलाब, मस्तक पर विराजीं मां गंगा
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 15 अक्टूबर 2026 को आश्विन शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि पर बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। इस दिव्य अवसर पर भगवान महाकाल का भांग से विशेष शृंगार किया गया और उनके मस्तक पर मां गंगा को विराजमान किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस अलौकिक दृश्य के साक्षी बने।
मंदिर के कपाट खुलने का दिव्य क्रम
गुरुवार की तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूंज के साथ बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। मंत्रोच्चार के बीच जलाभिषेक के साथ पूजा का शुभारंभ हुआ, जिसके बाद दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक किया गया।
प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के उपरांत बाबा ने मुकुट धारण किया। इसके बाद झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद की दिव्य ध्वनि के साथ भस्म आरती का आयोजन हुआ, जिससे संपूर्ण मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा।
भांग शृंगार और मां गंगा का विराजमान होना
इस विशेष तिथि पर बाबा महाकाल का भांग से भव्य शृंगार किया गया — यह परंपरा भगवान शिव की आराधना की प्राचीन पद्धतियों से जुड़ी है। बाबा के मस्तक पर मां गंगा को प्रतिष्ठित किया गया, जो शिव की जटाओं में गंगा के निवास की पौराणिक कथा का प्रतीकात्मक प्रतिरूपण है। यह शृंगार श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।
महानिर्वाणी अखाड़े की परंपरागत भूमिका
परंपरा के अनुसार, महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म आरती अर्पित की जाती है। मान्यता है कि भस्म अर्पित किए जाने के पश्चात बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यह परंपरा सदियों पुरानी है और आज भी उसी श्रद्धा एवं विधि-विधान से निभाई जाती है।
श्रद्धालुओं का उमड़ा आस्था का सैलाब
बाबा महाकाल की भस्म आरती के दर्शन के लिए श्रद्धालु बुधवार की रात से ही मंदिर परिसर के बाहर कतारबद्ध होने लगे थे। उज्जैन की पावन नगरी में दूर-दूर से आए भक्त भस्म आरती में सम्मिलित हुए। घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार की गूंज से मंदिर परिसर का वातावरण अत्यंत भक्तिमय हो उठा। दिव्य शृंगार और भस्म आरती के बाद श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
आगे क्या
आश्विन माह की विशेष तिथियों पर महाकालेश्वर मंदिर में आने वाले दिनों में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहने की संभावना है। मंदिर प्रशासन की ओर से सुचारू दर्शन व्यवस्था सुनिश्चित की जाती है ताकि भक्तजन निर्विघ्न रूप से बाबा महाकाल के दर्शन कर सकें।