23 अक्टूबर 2026
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महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती: रजत मुकुट और रुद्राक्ष से सजे बाबा महाकाल, उमड़े श्रद्धालु

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महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती: रजत मुकुट और रुद्राक्ष से सजे बाबा महाकाल, उमड़े श्रद्धालु

सारांश

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में आश्विन शुक्ल द्वादशी पर भस्म आरती संपन्न हुई। रजत मुकुट और रुद्राक्ष से सुसज्जित बाबा महाकाल के दर्शन के लिए रात से ही हज़ारों श्रद्धालु कतारबद्ध रहे। महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा संपन्न यह आरती निराकार से साकार दर्शन की अनूठी परंपरा का प्रतीक है।

मुख्य बातें

श्री महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन में 23 अक्टूबर 2026 को आश्विन शुक्ल द्वादशी पर भस्म आरती संपन्न हुई।
बाबा महाकाल को रजत मुकुट और रुद्राक्ष से विशेष रूप से सुसज्जित किया गया।
भगवान वीरभद्र से आज्ञा लेने के बाद ढोल-नगाड़ों के साथ कपाट खोले गए।
दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से भगवान का अभिषेक हुआ।
महानिर्वाणी अखाड़े की परंपरा अनुसार भस्म आरती अर्पित की गई; मान्यतानुसार इसके बाद बाबा साकार रूप में दर्शन देते हैं।
रात से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु कतारबद्ध होकर दर्शन लाभ के लिए पहुँचे।

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 23 अक्टूबर 2026 (आश्विन शुक्ल पक्ष द्वादशी, शुक्रवार) को भगवान महाकाल की पवित्र भस्म आरती संपन्न हुई। इस दिव्य अवसर पर बाबा महाकाल को रजत मुकुट और रुद्राक्ष से विशेष रूप से सुसज्जित किया गया, और अलौकिक दर्शन पाने के लिए रात से ही हज़ारों श्रद्धालु मंदिर परिसर में कतारबद्ध हो गए।

मंदिर के कपाट खुलने का दिव्य क्षण

शुक्रवार की भोर में सर्वप्रथम भगवान वीरभद्र से आज्ञा ली गई, तत्पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूँज के बीच बाबा महाकाल के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। मंदिर परिसर घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार से गुंजायमान हो उठा। जैसे ही कपाट खुले, पूरा वातावरण 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से भर गया।

पंचामृत अभिषेक और विशेष शृंगार

कपाट खुलने के उपरांत मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके पश्चात दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से बाबा का अभिषेक संपन्न हुआ। पूजा के क्रम में प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया। कपूर की आरती के बाद बाबा महाकाल ने मुकुट धारण किया और उन्हें रजत मुकुट तथा रुद्राक्ष से विभूषित किया गया।

भस्म आरती की पवित्र परंपरा

परंपरा के अनुसार, महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म आरती अर्पित की जाती है। मान्यता है कि भस्म अर्पित किए जाने के पश्चात बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं — यही इस आरती की आध्यात्मिक विशिष्टता है जो देशभर के श्रद्धालुओं को उज्जैन खींचती है। झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद के बीच भस्म आरती का यह अनुष्ठान पूरा हुआ।

श्रद्धालुओं की उपस्थिति

आश्विन शुक्ल द्वादशी के पावन अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु रात से ही महाकाल की नगरी उज्जैन पहुँच गए थे। दिव्य शृंगार और भस्म आरती के पश्चात श्रद्धालुओं को बाबा महाकाल के दर्शन का लाभ मिला, जिससे भक्तगण खुद को धन्य महसूस करते दिखे। गौरतलब है कि श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यहाँ की भस्म आरती सम्पूर्ण भारत में अद्वितीय मानी जाती है।

आगामी धार्मिक अनुष्ठान

आश्विन मास के शेष पक्ष में भी इसी प्रकार भव्य शृंगार और आरती का क्रम जारी रहेगा। महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के अनुसार, विशेष तिथियों और पर्वों पर श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना है। आने वाले दिनों में भी देश के कोने-कोने से भक्त इस पावन नगरी में भस्म आरती के दर्शन के लिए पहुँचते रहेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उज्जैन की सांस्कृतिक पहचान का केंद्रबिंदु है, जो हर तिथि पर लाखों श्रद्धालुओं को एकत्र करती है। यह आयोजन उज्जैन के तीर्थ-पर्यटन की रीढ़ भी है, जहाँ मंदिर प्रबंध समिति और स्थानीय प्रशासन की समन्वित भूमिका अनिवार्य हो जाती है। महाकाल लोक परियोजना के विस्तार के बाद से श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो अवसंरचना प्रबंधन के लिए निरंतर चुनौती बनी हुई है। भीड़ प्रबंधन, दर्शन व्यवस्था और प्रसाद वितरण की गुणवत्ता — ये वे पहलू हैं जिन पर प्रशासन का ध्यान केंद्रित रहना आवश्यक है।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती क्या है?
भस्म आरती श्री महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन में प्रतिदिन भोर में संपन्न होने वाला एक विशेष अनुष्ठान है, जिसमें भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की जाती है। मान्यता है कि इस आरती के पश्चात बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं।
भस्म आरती की परंपरा कौन निभाता है?
परंपरा के अनुसार महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म आरती अर्पित की जाती है। यह सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा है जो आज भी उसी विधि-विधान से निभाई जाती है।
23 अक्टूबर 2026 को महाकाल की आरती में क्या विशेष था?
इस दिन आश्विन शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि थी, जिस अवसर पर बाबा महाकाल को रजत मुकुट और रुद्राक्ष से विशेष रूप से सुसज्जित किया गया। रात से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए मंदिर परिसर में कतारबद्ध थे।
महाकाल मंदिर में पंचामृत अभिषेक किससे होता है?
भगवान महाकाल का पंचामृत अभिषेक दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से तैयार मिश्रण से किया जाता है। इससे पूर्व जलाभिषेक और हरिओम जल अर्पण की परंपरा भी निभाई जाती है।
उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन के लिए कब जाएँ?
भस्म आरती भोर में होती है, इसलिए दर्शनार्थियों को रात से ही या अत्यंत सुबह पहुँचने की सलाह दी जाती है। विशेष तिथियों, पर्वों और शुक्ल पक्ष की प्रमुख तिथियों पर श्रद्धालुओं की संख्या सर्वाधिक रहती है, इसलिए पहले से ऑनलाइन दर्शन पंजीकरण उचित रहता है।
राष्ट्र प्रेस
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