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लेड पॉइज़निंग का खतरा: पेंट, खिलौने और बर्तनों में छिपा जहर, WHO ने जताई चिंता

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लेड पॉइज़निंग का खतरा: पेंट, खिलौने और बर्तनों में छिपा जहर, WHO ने जताई चिंता

सारांश

पुराना पेंट, खिलौने, कॉस्मेटिक्स — घर की ये आम चीजें लेड (सीसा) का अदृश्य खतरा बन सकती हैं। WHO के मुताबिक यह जहरीली धातु सालाना 35 लाख से अधिक जानें लेती है और बच्चों के मानसिक विकास को गहरी क्षति पहुँचा सकती है। सतर्कता ही सुरक्षा है।

मुख्य बातें

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आँकड़ों के अनुसार लेड विषाक्तता से दुनिया में हर साल 35 लाख से अधिक मौतें होती हैं।
पुराना पेंट, सिरेमिक बर्तन, मानक-विहीन खिलौने, नकली गहने और कुछ कॉस्मेटिक्स लेड संपर्क के प्रमुख स्रोत हैं।
छोटे बच्चों को सबसे अधिक खतरा — लेड उनके मानसिक विकास, सीखने की क्षमता और व्यवहार को स्थायी रूप से प्रभावित कर सकता है।
वयस्कों में दीर्घकालिक संपर्क से किडनी और हृदय रोग का जोखिम बढ़ जाता है।
WHO की इंटरनेशनल लीड पॉइज़निंग प्रिवेंशन वीक 2026 की थीम है — 'पहचान से बचाव की ओर' ।
बचाव के लिए: गीले पोछे से सफाई, मानक-अनुरूप उत्पाद चुनें, पुराने पेंट को स्वयं न खुरचें और पानी की गुणवत्ता जाँचें।

लेड (सीसा) — एक जहरीली धातु — आपके घर की रोज़मर्रा की चीजों में चुपचाप मौजूद हो सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दीवारों का पुराना पेंट, खिलौने, कॉस्मेटिक्स, नकली गहने और कुछ सिरेमिक बर्तन लेड के संपर्क के प्रमुख स्रोत हैं। WHO के आँकड़ों के अनुसार, लेड विषाक्तता से दुनिया भर में हर साल 35 लाख से अधिक मौतें होती हैं।

लेड के संभावित स्रोत कहाँ हैं?

लेड यानी सीसा एक ऐसी जहरीली धातु है जिसका उपयोग अतीत में कई उत्पादों में बड़े पैमाने पर होता था। आज भी इसके संपर्क में आने के कई रास्ते बचे हुए हैं। पुराने या खराब होते पेंट से निकलने वाली बारीक धूल, दूषित मिट्टी और पानी, कुछ सिरेमिक बर्तन, असुरक्षित नकली गहने, मानक-विहीन कॉस्मेटिक्स और खिलौने इसके प्रमुख ज़रिए हैं।

गौरतलब है कि कुछ मसालों और पारंपरिक दवाओं में भी मिलावट या संदूषण के चलते लेड की मौजूदगी कथित तौर पर पाई जाती है। यह ऐसे समय में और अधिक चिंताजनक है जब घरेलू उत्पादों में गुणवत्ता नियंत्रण की जाँच अक्सर अपर्याप्त रहती है।

बच्चों पर सबसे गहरा असर

लेड का प्रभाव हर आयु वर्ग पर पड़ता है, लेकिन छोटे बच्चों के लिए यह विशेष रूप से घातक है। बच्चों का मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र अभी विकास की अवस्था में होते हैं, इसलिए लेड के अल्प संपर्क से भी उनकी मानसिक वृद्धि, सीखने की क्षमता और व्यवहार पर दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

बच्चे अक्सर ज़मीन पर खेलते हैं, विभिन्न सतहों को हाथ लगाते हैं और फिर उन्हीं हाथों को मुँह में डालते हैं। यदि उनके आसपास लेड-दूषित धूल या मिट्टी मौजूद हो, तो वह उनके शरीर में प्रवेश कर सकती है। गर्भावस्था के दौरान भी लेड का संपर्क माँ और गर्भस्थ शिशु दोनों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।

वयस्कों के लिए भी कम नहीं है जोखिम

लेड का खतरा सिर्फ बच्चों तक सीमित नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, वयस्कों में लंबे समय तक लेड के संपर्क में रहने से किडनी और हृदय संबंधी बीमारियों का जोखिम उल्लेखनीय रूप से बढ़ जाता है। यह शरीर के कई अंगों को एक साथ प्रभावित कर सकता है।

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि लेड के संपर्क में आने पर तत्काल लक्षण हमेशा सामने नहीं आते। कई बार नुकसान काफी बाद में — और अपरिवर्तनीय रूप में — प्रकट होता है, जिससे समय पर पहचान और इलाज मुश्किल हो जाता है।

WHO की थीम और बचाव के उपाय

WHO ने इंटरनेशनल लीड पॉइज़निंग प्रिवेंशन वीक 2026 की थीम 'पहचान से बचाव की ओर' रखी है, जिसका उद्देश्य लेड के स्रोतों की पहचान और उन्हें समूल खत्म करने पर ध्यान केंद्रित करना है।

घर में धूल को नियमित रूप से गीले कपड़े या पोछे से साफ करें ताकि कण हवा में न फैलें। पुराने पेंट को स्वयं खुरचने से बचें, इससे जहरीली धूल वातावरण में फैलती है। बच्चों को टूटे-फूटे या मानक-विहीन खिलौनों से दूर रखें। यदि पीने के पानी के दूषित होने की आशंका हो, तो उसकी जाँच करवाएं। कॉस्मेटिक्स, बर्तन और अन्य घरेलू उत्पाद खरीदते समय उनके गुणवत्ता एवं सुरक्षा मानकों की पुष्टि अवश्य करें।

आगे का रास्ता

विशेषज्ञ मानते हैं कि लेड विषाक्तता से बचाव के लिए सरकारी नीति और व्यक्तिगत सतर्कता — दोनों ज़रूरी हैं। उत्पाद सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू करना और जन-जागरूकता अभियान इस दिशा में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि भारतीय घरों में पुराने पेंट, असंगठित क्षेत्र के खिलौने और मानक-विहीन कॉस्मेटिक्स के ज़रिए यह खतरा रोज़ाना लाखों परिवारों तक पहुँचता है। भारत में उत्पाद सुरक्षा नियमों का प्रवर्तन अक्सर कमज़ोर रहता है — खासकर असंगठित बाज़ार में बिकने वाली चीजों के लिए। WHO का यह अभियान महत्वपूर्ण है, लेकिन असली बदलाव तब आएगा जब नीति-निर्माता उपभोक्ता वस्तुओं में लेड की अनिवार्य जाँच और उल्लंघन पर सख्त दंड को ज़मीनी स्तर पर लागू करेंगे।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लेड (सीसा) विषाक्तता क्या है और यह कैसे होती है?
लेड एक जहरीली धातु है जो पुराने पेंट की धूल, दूषित पानी, मिट्टी, असुरक्षित खिलौनों और मानक-विहीन कॉस्मेटिक्स के ज़रिए शरीर में प्रवेश कर सकती है। यह साँस लेने, मुँह के माध्यम से या त्वचा संपर्क से अवशोषित होती है और कई अंगों को नुकसान पहुँचाती है।
बच्चों के लिए लेड का खतरा इतना गंभीर क्यों है?
बच्चों का मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र विकासशील अवस्था में होते हैं, इसलिए लेड का अल्प संपर्क भी उनकी बौद्धिक क्षमता, सीखने की शक्ति और व्यवहार को स्थायी रूप से प्रभावित कर सकता है। बच्चे ज़मीन पर खेलते और हाथ मुँह में डालते हैं, जिससे दूषित धूल उनके शरीर में आसानी से पहुँचती है।
घर में लेड के संपर्क से कैसे बचें?
घर में नियमित रूप से गीले पोछे या कपड़े से सफाई करें और पुराने पेंट को स्वयं न खुरचें। बच्चों को मानक-विहीन खिलौनों से दूर रखें, पीने के पानी की गुणवत्ता जाँचें और कॉस्मेटिक्स व बर्तन खरीदते समय सुरक्षा मानकों की पुष्टि करें।
WHO की इंटरनेशनल लीड पॉइज़निंग प्रिवेंशन वीक 2026 की थीम क्या है?
WHO ने इस वर्ष की थीम 'पहचान से बचाव की ओर' रखी है। इसका उद्देश्य लेड के स्रोतों की सटीक पहचान करना और उन्हें समाप्त करने के व्यावहारिक उपायों पर जोर देना है।
क्या वयस्कों को भी लेड से खतरा है?
हाँ, वयस्कों में लंबे समय तक लेड के संपर्क में रहने से किडनी और हृदय संबंधी बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार चिंताजनक बात यह है कि लक्षण अक्सर तुरंत प्रकट नहीं होते और तब तक नुकसान अपरिवर्तनीय हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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