महाकाल की भस्म आरती: वैष्णव तिलक, त्रिनेत्र व त्रिपुंड से राजा स्वरूप में सजे बाबा, रुद्राक्ष-फूलों की माला अर्पित
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 15 सितंबर 2026, मंगलवार को भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया-चतुर्थी तिथि पर बाबा महाकाल की दिव्य भस्म आरती संपन्न हुई। इस अलौकिक आयोजन में सम्मिलित होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु रातभर कतारबद्ध रहे और मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के जयघोष से गुंजायमान हो उठा।
मुख्य घटनाक्रम
मंगलवार की तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूँज के साथ बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। कपाट उद्घाटन के तुरंत बाद मंत्रोच्चार के बीच जलाभिषेक किया गया और दूध, दही, घी, शहद तथा फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक सम्पन्न हुआ।
प्रथम घंटाल बजाते हुए हरिओम जल अर्पित किया गया। इसके उपरांत कपूर आरती हुई, जिसके बाद बाबा ने मुकुट धारण किया। झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद की त्रिवेणी में भस्म आरती का पावन अनुष्ठान पूरा हुआ।
बाबा का राजा स्वरूप शृंगार
भस्म आरती के अवसर पर बाबा महाकाल को वैष्णव तिलक, त्रिनेत्र और त्रिपुंड से सुसज्जित कर राजा स्वरूप में श्रृंगारित किया गया। बाबा को रुद्राक्ष और फूलों की माला अर्पित की गई। इस दिव्य शृंगार के दर्शन कर श्रद्धालुओं की आँखें भर आईं और परिसर में भक्ति की अनुभूति छा गई।
परंपरा और मान्यता
परंपरा के अनुसार, महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म आरती अर्पित की जाती है। मान्यता है कि भस्म अर्पित किए जाने के बाद बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही आस्था लाखों श्रद्धालुओं को उज्जैन की पावन नगरी तक खींच लाती है।
श्रद्धालुओं के लिए नियम
भस्म आरती में सम्मिलित होने के लिए पोशाक-संहिता का पालन अनिवार्य है — पुरुषों के लिए धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना आवश्यक होता है। मंदिर के पुजारी ने महाआरती का विधिवत संचालन किया और परिसर में घंटियों, शंखध्वनि व मंत्रोच्चार की त्रिवेणी बहती रही।
आने वाले दिनों में भी भाद्रपद मास के पर्वों के उपलक्ष्य में श्री महाकालेश्वर मंदिर में विशेष आयोजन जारी रहने की संभावना है।