महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती: राम नाम माला, त्रिपुंड-त्रिनेत्र से सजे बाबा महाकाल
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 22 जून 2025 को ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष अष्टमी के पावन अवसर पर बाबा महाकाल की विशेष भस्म आरती संपन्न हुई। सोमवार की इस दिव्य आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे, जिन्होंने देर रात से ही पंक्तिबद्ध होकर बाबा के दर्शन किए।
कपाट खुलने का दिव्य क्षण
सोमवार तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूँज के बीच बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। जैसे ही दिव्य शृंगार और भस्म आरती के बाद श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन हुए, समूचा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गूँज उठा। घंटियों की ध्वनि, शंखनाद और मंत्रोच्चार ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
विशेष शृंगार और अभिषेक
मंदिर के पट खुलने के साथ ही मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके पश्चात दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। बाबा महाकाल को त्रिपुंड और त्रिनेत्र से सुसज्जित किया गया तथा राम नाम की माला पहनाकर उनके मस्तक पर भस्म रमाई गई। मंदिर के पुजारी ने विधिवत महाआरती संपन्न कराई।
भस्म की विशेषता और परंपरा
जानकारी के अनुसार, पूर्व में महाकाल को श्मशान की राख अर्पित की जाती थी, किंतु अब विशेष रूप से कपिला गाय के गोबर एवं औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का उपयोग किया जाता है। भस्म आरती के दौरान पुरुष श्रद्धालुओं के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है। यह नियम मंदिर की पवित्रता और परंपरा के संरक्षण के उद्देश्य से लागू है।
विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति
इस अवसर पर टेलीविजन अभिनेता सौरभ राज जैन और अर्पित रांका ने भी महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दौरान दर्शन किए और अपने आगामी शो की सफलता के लिए बाबा महाकाल से आशीर्वाद माँगा। बाबा महाकाल की यह आरती देश-विदेश में प्रसिद्ध है और इसे देखने के लिए आम श्रद्धालुओं से लेकर著名 हस्तियाँ तक यहाँ पहुँचती हैं।
सुरक्षा व्यवस्था
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर और उसके आसपास बड़े पैमाने पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी, जिससे दर्शन व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित हो सके। आगामी दिनों में भी सोमवार को इसी प्रकार की भव्य भस्म आरती के आयोजन की परंपरा जारी रहेगी।