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महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती: राम नाम माला, त्रिपुंड-त्रिनेत्र से सजे बाबा महाकाल

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महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती: राम नाम माला, त्रिपुंड-त्रिनेत्र से सजे बाबा महाकाल

सारांश

ज्येष्ठ शुक्ल अष्टमी के सोमवार को उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती का भव्य आयोजन हुआ। राम नाम माला, त्रिपुंड और त्रिनेत्र से सजे बाबा महाकाल के दर्शन के लिए देर रात से श्रद्धालुओं की कतारें लगी रहीं। टीवी अभिनेता सौरभ राज जैन भी मंदिर पहुँचे।

मुख्य बातें

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में 22 जून 2025 को ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष अष्टमी पर भव्य भस्म आरती संपन्न हुई।
बाबा महाकाल को राम नाम की माला , त्रिपुंड और त्रिनेत्र से सजाया गया तथा मस्तक पर भस्म रमाई गई।
अब श्मशान राख के स्थान पर कपिला गाय के गोबर व औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का उपयोग होता है।
टेलीविजन अभिनेता सौरभ राज जैन और अर्पित रांका ने भस्म आरती में दर्शन किए और आगामी शो की सफलता की प्रार्थना की।
भस्म आरती में पुरुषों के लिए धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है।

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 22 जून 2025 को ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष अष्टमी के पावन अवसर पर बाबा महाकाल की विशेष भस्म आरती संपन्न हुई। सोमवार की इस दिव्य आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे, जिन्होंने देर रात से ही पंक्तिबद्ध होकर बाबा के दर्शन किए।

कपाट खुलने का दिव्य क्षण

सोमवार तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूँज के बीच बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। जैसे ही दिव्य शृंगार और भस्म आरती के बाद श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन हुए, समूचा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गूँज उठा। घंटियों की ध्वनि, शंखनाद और मंत्रोच्चार ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

विशेष शृंगार और अभिषेक

मंदिर के पट खुलने के साथ ही मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके पश्चात दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। बाबा महाकाल को त्रिपुंड और त्रिनेत्र से सुसज्जित किया गया तथा राम नाम की माला पहनाकर उनके मस्तक पर भस्म रमाई गई। मंदिर के पुजारी ने विधिवत महाआरती संपन्न कराई।

भस्म की विशेषता और परंपरा

जानकारी के अनुसार, पूर्व में महाकाल को श्मशान की राख अर्पित की जाती थी, किंतु अब विशेष रूप से कपिला गाय के गोबर एवं औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का उपयोग किया जाता है। भस्म आरती के दौरान पुरुष श्रद्धालुओं के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है। यह नियम मंदिर की पवित्रता और परंपरा के संरक्षण के उद्देश्य से लागू है।

विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति

इस अवसर पर टेलीविजन अभिनेता सौरभ राज जैन और अर्पित रांका ने भी महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दौरान दर्शन किए और अपने आगामी शो की सफलता के लिए बाबा महाकाल से आशीर्वाद माँगा। बाबा महाकाल की यह आरती देश-विदेश में प्रसिद्ध है और इसे देखने के लिए आम श्रद्धालुओं से लेकर著名 हस्तियाँ तक यहाँ पहुँचती हैं।

सुरक्षा व्यवस्था

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर और उसके आसपास बड़े पैमाने पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी, जिससे दर्शन व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित हो सके। आगामी दिनों में भी सोमवार को इसी प्रकार की भव्य भस्म आरती के आयोजन की परंपरा जारी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उज्जैन की सांस्कृतिक पहचान का केंद्रबिंदु है जो देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। श्मशान राख से कपिला गाय के गोबर व जड़ी-बूटियों से बनी भस्म की ओर हुआ परिवर्तन परंपरा और स्वच्छता के बीच संतुलन का प्रयास दर्शाता है। यह भी उल्लेखनीय है कि सेलिब्रिटी दर्शन की बढ़ती आवृत्ति मंदिर प्रबंधन के लिए आम श्रद्धालुओं की पहुँच और व्यवस्था के प्रश्न को और प्रासंगिक बनाती है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती क्या है?
भस्म आरती उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन तड़के होने वाला एक विशिष्ट धार्मिक अनुष्ठान है, जिसमें बाबा महाकाल को भस्म अर्पित कर उनका दिव्य शृंगार किया जाता है। यह आरती 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकालेश्वर की विशेष परंपरा है और देश-विदेश में प्रसिद्ध है।
महाकाल भस्म आरती में किस भस्म का उपयोग होता है?
जानकारी के अनुसार, पहले श्मशान की राख का उपयोग होता था, लेकिन अब विशेष रूप से कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का उपयोग किया जाता है। यह बदलाव परंपरा को बनाए रखते हुए स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए किया गया है।
महाकाल भस्म आरती में दर्शन के लिए क्या पहनना अनिवार्य है?
भस्म आरती के दौरान पुरुष श्रद्धालुओं के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिला श्रद्धालुओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है। यह नियम मंदिर की पवित्रता और परंपरा के संरक्षण हेतु लागू है।
22 जून की भस्म आरती में कौन-से विशिष्ट अतिथि उपस्थित थे?
22 जून 2025 को टेलीविजन अभिनेता सौरभ राज जैन और अर्पित रांका ने महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दौरान दर्शन किए। उन्होंने अपने आगामी शो की सफलता के लिए बाबा महाकाल से आशीर्वाद माँगा।
22 जून को महाकाल का विशेष शृंगार कैसे किया गया?
ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष अष्टमी के अवसर पर बाबा महाकाल को त्रिपुंड और त्रिनेत्र से सुसज्जित किया गया। उन्हें राम नाम की माला पहनाई गई और मस्तक पर भस्म रमाई गई। इससे पूर्व पंचामृत — दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस — से अभिषेक संपन्न हुआ।
राष्ट्र प्रेस
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