महाकालेश्वर मंदिर में राजा स्वरूप भस्म आरती: अधिक मास चतुर्दशी पर हजारों श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 14 जून 2026 को अधिक मास कृष्ण पक्ष चतुर्दशी के पावन अवसर पर भगवान महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। बाबा महाकाल को त्रिशूल, त्रिपुंड, डमरू, भांग, चंदन और बेल पत्र अर्पित कर राजा स्वरूप में विशेष श्रृंगार किया गया, जिसके दर्शन के लिए देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु उमड़ पड़े।
कपाट खुलने का क्रम
रविवार की तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने की परंपरा के बाद ढोल-नगाड़ों की गूंज के साथ बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। मंदिर परिसर घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार से गुंजायमान हो उठा। जैसे ही दिव्य श्रृंगार और भस्म आरती के बाद श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन हुए, 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से समूचा परिसर कंपित हो उठा।
अभिषेक और श्रृंगार की विधि
मंदिर के कपाट खुलते ही मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके पश्चात दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। मंदिर के पुजारी ने विधि-विधान से महाआरती संपन्न कराई।
भस्म की विशेषता
जानकारी के अनुसार, पहले महाकाल को श्मशान की राख अर्पित की जाती थी, किंतु अब कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से विशेष रूप से तैयार भस्म का उपयोग किया जाता है। भस्म आरती के दौरान पुरुषों के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है।
श्रद्धालुओं की भीड़ और व्यवस्था
अपने आराध्य के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु शनिवार देर रात से ही कतार में खड़े रहे। बाबा महाकाल की भस्म आरती देश-विदेश में विख्यात है और इसे देखने के लिए सामान्य जनमानस से लेकर著名 हस्तियाँ भी उज्जैन पहुँचती हैं। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़े पैमाने पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। आने वाले दिनों में अधिक मास के शेष पर्वों पर भी इसी प्रकार के विशेष आयोजन अपेक्षित हैं।