31 जुलाई 2026
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महाकालेश्वर मंदिर में राजा स्वरूप भस्म आरती: अधिक मास चतुर्दशी पर हजारों श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

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महाकालेश्वर मंदिर में राजा स्वरूप भस्म आरती: अधिक मास चतुर्दशी पर हजारों श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

सारांश

अधिक मास कृष्ण पक्ष चतुर्दशी पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल को राजा स्वरूप में सजाया गया। पंचामृत अभिषेक, भस्म आरती और 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से परिसर गूंज उठा — हजारों श्रद्धालु शनिवार रात से ही कतार में थे।

मुख्य बातें

14 जून 2026 को अधिक मास कृष्ण पक्ष चतुर्दशी पर श्री महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन में भव्य भस्म आरती संपन्न हुई।
भगवान महाकाल को त्रिशूल, त्रिपुंड, डमरू, भांग, चंदन और बेल पत्र अर्पित कर राजा स्वरूप में श्रृंगार किया गया।
पंचामृत (दूध, दही, घी, शक्कर, फलों का रस) से अभिषेक और मंत्रोच्चार के साथ महाआरती संपन्न हुई।
भस्म आरती में अब कपिला गाय के गोबर व औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार विशेष भस्म का उपयोग होता है।
हजारों श्रद्धालु शनिवार देर रात से कतार में खड़े रहे; व्यवस्था के लिए बड़े पैमाने पर पुलिसकर्मी तैनात किए गए।

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 14 जून 2026 को अधिक मास कृष्ण पक्ष चतुर्दशी के पावन अवसर पर भगवान महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। बाबा महाकाल को त्रिशूल, त्रिपुंड, डमरू, भांग, चंदन और बेल पत्र अर्पित कर राजा स्वरूप में विशेष श्रृंगार किया गया, जिसके दर्शन के लिए देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु उमड़ पड़े।

कपाट खुलने का क्रम

रविवार की तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने की परंपरा के बाद ढोल-नगाड़ों की गूंज के साथ बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। मंदिर परिसर घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार से गुंजायमान हो उठा। जैसे ही दिव्य श्रृंगार और भस्म आरती के बाद श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन हुए, 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से समूचा परिसर कंपित हो उठा।

अभिषेक और श्रृंगार की विधि

मंदिर के कपाट खुलते ही मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके पश्चात दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। मंदिर के पुजारी ने विधि-विधान से महाआरती संपन्न कराई।

भस्म की विशेषता

जानकारी के अनुसार, पहले महाकाल को श्मशान की राख अर्पित की जाती थी, किंतु अब कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से विशेष रूप से तैयार भस्म का उपयोग किया जाता है। भस्म आरती के दौरान पुरुषों के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है।

श्रद्धालुओं की भीड़ और व्यवस्था

अपने आराध्य के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु शनिवार देर रात से ही कतार में खड़े रहे। बाबा महाकाल की भस्म आरती देश-विदेश में विख्यात है और इसे देखने के लिए सामान्य जनमानस से लेकर著名 हस्तियाँ भी उज्जैन पहुँचती हैं। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़े पैमाने पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। आने वाले दिनों में अधिक मास के शेष पर्वों पर भी इसी प्रकार के विशेष आयोजन अपेक्षित हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उज्जैन की सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान का केंद्र बन चुकी है। अधिक मास जैसे विशेष पर्वों पर श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि यह दर्शाती है कि धार्मिक पर्यटन मध्य प्रदेश के लिए एक बड़ी संभावना है, जिसे व्यवस्थित अवसंरचना की दरकार है। भस्म की परंपरा में श्मशान राख से कपिला गाय के गोबर की ओर आया बदलाव परंपरा और आधुनिक स्वच्छता मानकों के बीच संतुलन का प्रयास है — यह बदलाव कब और किसके निर्देश पर हुआ, इसका पारदर्शी दस्तावेज़ीकरण अभी भी अपेक्षित है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती क्या होती है?
भस्म आरती उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन तड़के होने वाला विशेष अनुष्ठान है, जिसमें भगवान महाकाल का भस्म से श्रृंगार किया जाता है। पहले श्मशान की राख का उपयोग होता था, अब कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार विशेष भस्म अर्पित की जाती है।
14 जून 2026 को महाकाल भस्म आरती का विशेष महत्व क्यों था?
14 जून 2026 को अधिक मास कृष्ण पक्ष चतुर्दशी का पावन संयोग था, जो हिंदू पंचांग में विशेष पुण्यकाल माना जाता है। इस अवसर पर बाबा महाकाल को राजा स्वरूप में विशेष श्रृंगार किया गया और हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए उमड़े।
भस्म आरती में शामिल होने के लिए क्या नियम हैं?
भस्म आरती के दौरान पुरुषों के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है। यह परंपरागत वेशभूषा नियम मंदिर प्रशासन द्वारा लागू किया जाता है।
महाकाल का राजा स्वरूप श्रृंगार कैसे किया जाता है?
राजा स्वरूप श्रृंगार में भगवान महाकाल को त्रिशूल, त्रिपुंड, डमरू, भांग, चंदन और बेल पत्र अर्पित किए जाते हैं। इससे पहले दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया जाता है।
महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दर्शन कब होते हैं?
भस्म आरती प्रतिदिन तड़के होती है। कपाट खुलने से पहले भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने की परंपरा निभाई जाती है, जिसके बाद ढोल-नगाड़ों के साथ मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले जाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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