16 सितंबर 2026 का पंचांग: गणेश पूजा शुभ, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:51 से दोपहर 12:40 बजे तक
सारांश
मुख्य बातें
हिंदू पंचांग के अनुसार 16 सितंबर 2026 (बुधवार) को भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि सुबह 8:59 बजे तक रहेगी, जिसके बाद षष्ठी तिथि प्रारंभ होगी। पंचांग-गणना के अनुसार इस दिन भगवान गणेश की आराधना विशेष फलदाई मानी गई है। पंचांग हिंदू काल-गणना की वह प्रणाली है जो सूर्य, चंद्रमा और ग्रहों की स्थिति पर आधारित है और शुभ कार्यों, यात्राओं, निवेश एवं पूजा-पाठ का समय निर्धारित करती है।
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्र स्थिति
बुधवार को सूर्योदय सुबह 6:17 बजे और सूर्यास्त शाम 6:26 बजे होगा। चंद्रोदय सुबह 10:52 बजे और चंद्रास्त रात 9:42 बजे होगा। पंचांग के अनुसार, इस दिन सूर्य उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में स्थित रहेगा। राशि-स्थिति की दृष्टि से सूर्य सिंह राशि में और चंद्रमा तुला राशि में विराजमान रहेंगे।
अभिजीत मुहूर्त और अमृत काल
दिन का सर्वाधिक शुभ समय अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:51 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक रहेगा। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार यह मुहूर्त किसी भी महत्त्वपूर्ण कार्य को आरंभ करने के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। इसके अतिरिक्त, अमृत काल सुबह 7:53 बजे से 9:37 बजे तक रहेगा, जिसे भी शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त माना गया है।
योग: वैधृति और विष्कुम्भ
बुधवार को दोपहर 12:21 बजे तक वैधृति योग प्रभावी रहेगा। इसके बाद विष्कुम्भ योग प्रारंभ होगा। ज्योतिषीय परंपराओं के अनुसार विभिन्न योगों का शुभाशुभ प्रभाव दिनभर के कार्यों पर पड़ता है।
राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड काल
पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, राहुकाल दोपहर 12:21 बजे से 1:52 बजे तक, गुलिक काल सुबह 10:50 बजे से दोपहर 12:21 बजे तक और यमगंड काल सुबह 7:48 बजे से 9:19 बजे तक रहेगा। इन अवधियों को अशुभ माना जाता है और इनमें नए कार्यों का आरंभ वर्जित बताया गया है।
दिशाशूल और यात्रा परामर्श
इस दिन उत्तर दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु परंपराओं के अनुसार इस दिशा में यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है। यदि उत्तर दिशा में यात्रा अपरिहार्य हो, तो ज्योतिषीय उपाय अपनाकर प्रस्थान किया जा सकता है। 16 सितंबर 2026 के पंचांग का समग्र स्वरूप गणेश उपासकों के लिए अनुकूल है, विशेष रूप से अभिजीत मुहूर्त का लाभ उठाकर पूजा-अर्चना की जा सकती है।