17 अक्टूबर 2026
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महाकालेश्वर मंदिर में आश्विन सप्तमी पर भस्म आरती, बेल पत्र-रुद्राक्ष माला से सजे बाबा महाकाल

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महाकालेश्वर मंदिर में आश्विन सप्तमी पर भस्म आरती, बेल पत्र-रुद्राक्ष माला से सजे बाबा महाकाल

सारांश

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में आश्विन शुक्ल सप्तमी पर भस्म आरती का अलौकिक आयोजन हुआ। बेल पत्र, रुद्राक्ष माला और मुकुट से सजे बाबा महाकाल के दर्शन के लिए श्रद्धालु रात से ही कतारबद्ध रहे। महानिर्वाणी अखाड़े की परंपरा के अनुसार भस्म अर्पण के साथ बाबा ने साकार रूप में दर्शन दिए।

मुख्य बातें

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 17 अक्टूबर 2026 को आश्विन शुक्ल पक्ष सप्तमी तिथि पर भस्म आरती संपन्न हुई।
भगवान वीरभद्र की आज्ञा के बाद ढोल-नगाड़ों के साथ मंदिर के कपाट खोले गए।
बाबा का पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, फलों का रस) से अभिषेक किया गया; फलों और मिष्ठान का भोग लगाया गया।
बाबा महाकाल को बेल पत्र, मुकुट और रुद्राक्ष की माला से सजाया गया।
महानिर्वाणी अखाड़े की परंपरा के अनुसार भस्म आरती अर्पित की गई; बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 17 अक्टूबर 2026 को आश्विन शुक्ल पक्ष सप्तमी तिथि के पावन अवसर पर बाबा महाकाल की भस्म आरती संपन्न हुई। इस अलौकिक अनुष्ठान के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु रात से ही मंदिर परिसर में कतारबद्ध हो गए थे।

कपाट खुलने का क्रम

शनिवार की तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात् ढोल-नगाड़ों की गूँज के बीच बाबा महाकाल के कपाट विधिवत खोले गए। कपाट खुलते ही मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार ने पूरे परिसर को एक दिव्य वातावरण से भर दिया।

पंचामृत अभिषेक और शृंगार

मंदिर के कपाट खुलने के साथ ही मंत्रोच्चार के बीच जलाभिषेक के बाद भगवान महाकाल का दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया। पूजा के प्रथम चरण में घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया।

कपूर आरती के उपरांत बाबा ने मुकुट धारण किया। तत्पश्चात् बाबा महाकाल को बेल पत्र, मुकुट और रुद्राक्ष की माला से सजाया गया तथा फलों और मिष्ठान का भोग लगाया गया।

भस्म आरती की परंपरा

परंपरा के अनुसार, महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म आरती अर्पित की जाती है। झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद के साथ भस्म आरती का यह क्रम पूर्ण हुआ। मान्यता है कि भस्म अर्पित किए जाने के बाद बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं — यही आस्था प्रतिदिन हज़ारों श्रद्धालुओं को पावन नगरी उज्जैन की ओर खींचती है।

श्रद्धालुओं का उत्साह

दिव्य शृंगार और भस्म आरती के पश्चात् श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। गौरतलब है कि आश्विन मास में महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या विशेष रूप से बढ़ जाती है, क्योंकि इस काल को शिव उपासना के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।

आने वाले पर्वों और तिथियों पर भी उज्जैन में श्रद्धालुओं के बड़ी संख्या में पहुँचने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उज्जैन की सांस्कृतिक पहचान और पर्यटन अर्थव्यवस्था की धुरी भी है। आश्विन मास में श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ मंदिर प्रशासन के लिए व्यवस्था और सुरक्षा की दृष्टि से एक चुनौती भी प्रस्तुत करती है। महाकाल लोक परियोजना के बाद से यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो इस तीर्थ की राष्ट्रीय महत्ता को और गहरा करती है।
RashtraPress
17 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती क्या है?
भस्म आरती उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर का एक विशिष्ट प्रतिदिन का अनुष्ठान है, जिसमें महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की जाती है। मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद बाबा निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं।
17 अक्टूबर 2026 को महाकाल की भस्म आरती किस तिथि को हुई?
17 अक्टूबर 2026 को आश्विन शुक्ल पक्ष सप्तमी तिथि पर भस्म आरती संपन्न हुई। इस विशेष तिथि पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए उपस्थित रहे।
महाकाल भस्म आरती में किस प्रकार का शृंगार किया गया?
बाबा महाकाल को बेल पत्र, मुकुट और रुद्राक्ष की माला से सजाया गया। पंचामृत अभिषेक के बाद फलों और मिष्ठान का भोग लगाया गया तथा कपूर आरती संपन्न हुई।
महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती कब होती है?
भस्म आरती प्रतिदिन तड़के होती है। कपाट खुलने से पहले भगवान वीरभद्र की आज्ञा ली जाती है, इसके बाद जलाभिषेक, पंचामृत अभिषेक, शृंगार और अंत में भस्म आरती का क्रम पूर्ण होता है।
उज्जैन महाकाल भस्म आरती के दर्शन कैसे करें?
भस्म आरती के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को मंदिर प्रशासन द्वारा निर्धारित पंजीकरण प्रक्रिया का पालन करना होता है। आश्विन मास जैसे विशेष पर्वों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु रात से ही कतारबद्ध हो जाते हैं, इसलिए समय से पूर्व पहुँचना आवश्यक है।
राष्ट्र प्रेस
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