27 अक्टूबर 2026
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महाकालेश्वर उज्जैन: त्रिपुंड-पुष्पमाला से बाबा महाकाल का भव्य शृंगार, कार्तिक प्रतिपदा पर भस्म आरती में उमड़े श्रद्धालु

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महाकालेश्वर उज्जैन: त्रिपुंड-पुष्पमाला से बाबा महाकाल का भव्य शृंगार, कार्तिक प्रतिपदा पर भस्म आरती में उमड़े श्रद्धालु

सारांश

कार्तिक कृष्ण पक्ष प्रतिपदा पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल का त्रिपुंड और पुष्पमाला से भव्य शृंगार किया गया। महानिर्वाणी अखाड़े की परंपरा के अनुसार भस्म आरती संपन्न हुई और निराकार से साकार दर्शन के इस दिव्य क्षण के साक्षी बनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े।

मुख्य बातें

27 अक्टूबर 2026 को कार्तिक कृष्ण पक्ष प्रतिपदा तिथि पर श्री महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन में भस्म आरती संपन्न हुई।
बाबा महाकाल के मस्तक पर त्रिपुंड और शीश पर पुष्पमाला से भव्य शृंगार किया गया।
परंपरा के अनुसार महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म आरती अर्पित की गई।
पंचामृत अभिषेक — दूध, दही, घी, शहद और फलों का रस — के साथ पूजा संपन्न की गई।
रात से ही कतारबद्ध श्रद्धालुओं ने 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष के साथ दर्शन किए।

उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में 27 अक्टूबर 2026 को कार्तिक कृष्ण पक्ष प्रतिपदा तिथि पर बाबा महाकाल की पावन भस्म आरती संपन्न हुई। मस्तक पर त्रिपुंड और शीश पर पुष्पमाला से सजे बाबा के अलौकिक स्वरूप के दर्शन के लिए मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

मंदिर के कपाट खुलने का दिव्य क्षण

मंगलवार की तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों के मंगल नाद के साथ बाबा महाकाल के पट खोले गए। मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया और उन्हें दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक कराया गया। घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार से पूरा मंदिर परिसर गुंजायमान हो उठा।

भस्म आरती की पवित्र परंपरा

पूजा के प्रथम चरण में घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया। कपूर की आरती के उपरांत बाबा महाकाल ने मुकुट धारण किया। इसके बाद झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद की दिव्य ध्वनि के साथ भस्म आरती संपन्न की गई। परंपरा के अनुसार, महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म आरती अर्पित की जाती है।

बाबा का अलौकिक शृंगार

बाबा महाकाल के मस्तक पर त्रिपुंड और शीश पर पुष्पमाला से भव्य शृंगार किया गया। भक्तों की मान्यता है कि भस्म अर्पित किए जाने के पश्चात बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं। बाबा के इस अद्भुत दिव्य स्वरूप को देखकर उपस्थित भक्त भावविभोर हो गए।

श्रद्धालुओं का उत्साह

रात से ही श्रद्धालु मंदिर के बाहर कतारबद्ध होकर अपने आराध्य के दर्शन की प्रतीक्षा में खड़े थे। भस्म आरती के पश्चात पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गूंज उठा। यह ऐसे समय में आया है जब कार्तिक मास की शुरुआत के साथ उज्जैन में श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जाती है। गौरतलब है कि देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकालेश्वर की भस्म आरती हर दिन ब्रह्म मुहूर्त में आयोजित होती है, किंतु विशेष तिथियों पर इसका धार्मिक महत्व और श्रद्धालुओं की उपस्थिति दोनों कई गुना बढ़ जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारत की जीवंत आस्था परंपरा का दैनिक प्रमाण है। कार्तिक मास में श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ यह संकेत देती है कि तीर्थ-पर्यटन और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण की दिशा में मंदिर प्रबंधन की व्यवस्था पर निरंतर ध्यान देने की आवश्यकता है। यह भी उल्लेखनीय है कि देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में महाकालेश्वर की विशिष्टता इस मान्यता में निहित है कि यहाँ बाबा स्वयं भस्म से अलंकृत होते हैं — एक परंपरा जो सदियों से अखंड है।
RashtraPress
27 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती क्या है?
भस्म आरती उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में आयोजित होने वाला विशिष्ट धार्मिक अनुष्ठान है, जिसमें बाबा महाकाल को भस्म अर्पित कर आरती की जाती है। परंपरा के अनुसार महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से यह आरती अर्पित की जाती है और मान्यता है कि इसके बाद बाबा निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं।
27 अक्टूबर 2026 को महाकाल की भस्म आरती किस तिथि पर हुई?
यह भस्म आरती कार्तिक कृष्ण पक्ष प्रतिपदा तिथि पर संपन्न हुई। इस विशेष तिथि पर श्रद्धालुओं की उपस्थिति सामान्य दिनों की तुलना में अधिक रहती है।
बाबा महाकाल का शृंगार किस प्रकार किया गया?
बाबा महाकाल के मस्तक पर त्रिपुंड और शीश पर पुष्पमाला से भव्य शृंगार किया गया। इससे पहले पंचामृत — दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस — से अभिषेक, कपूर आरती और मुकुट धारण की परंपराएँ भी पूरी की गईं।
उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन के लिए कब आना उचित है?
भस्म आरती का आयोजन प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में होता है। कार्तिक मास जैसे विशेष अवसरों पर भीड़ बढ़ जाती है, इसलिए श्रद्धालु रात से ही कतारबद्ध हो जाते हैं। मंदिर प्रबंधन समिति की वेबसाइट पर ऑनलाइन दर्शन-स्लॉट बुकिंग की सुविधा उपलब्ध है।
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का क्या महत्व है?
महाकालेश्वर भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और उज्जैन में स्थित है। यह एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग माना जाता है तथा यहाँ की भस्म आरती की परंपरा इसे अन्य तीर्थस्थलों से विशिष्ट बनाती है।
राष्ट्र प्रेस
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