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योग में सावधानी ज़रूरी: आयुष मंत्रालय की चेतावनी, गलत अभ्यास से हो सकती हैं गंभीर चोटें

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योग में सावधानी ज़रूरी: आयुष मंत्रालय की चेतावनी, गलत अभ्यास से हो सकती हैं गंभीर चोटें

सारांश

योग फायदेमंद है — लेकिन तभी, जब सही तरीके से किया जाए। आयुष मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि बिना प्रशिक्षण के शीर्षासन गर्दन का फ्रैक्चर तक करा सकता है और गलत जल नेति से साइनस संक्रमण का खतरा है। सोशल मीडिया रील्स देखकर योग करने वाले करोड़ों भारतीयों के लिए यह चेतावनी सीधे उनसे जुड़ती है।

मुख्य बातें

आयुष मंत्रालय ने बिना प्रशिक्षण के योगाभ्यास को जोखिमभरा बताते हुए सर्टिफाइड इंस्ट्रक्टर की देखरेख में अभ्यास करने की सलाह दी।
शीर्षासन और सर्वांगासन में गलत तकनीक से डिस्क हर्निएशन, लिगामेंट टूटना और गर्दन का फ्रैक्चर तक हो सकता है।
पद्मासन में जबरदस्ती पैर मोड़ने से घुटनों और टखनों में मोच का खतरा; पुरानी चोट वाले इसे न करें।
प्राणायाम में क्षमता से अधिक सांस रोकने पर मस्तिष्क को ऑक्सीजन की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, हृदय रोग, मिर्गी या गर्भावस्था में कुंभक से बचें।
जल नेति में हमेशा उबला गुनगुना पानी और उचित मात्रा में नमक उपयोग करें; नाक से सांस लेने पर साइनस या कान में संक्रमण हो सकता है।
अभ्यास के दौरान कहीं भी अचानक तेज़ दर्द हो तो तुरंत अभ्यास बंद करें और चिकित्सक से सलाह लें।

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने योगासन और प्राणायाम के दौरान सावधानी बरतने की स्पष्ट हिदायत दी है, यह चेतावनी देते हुए कि बिना प्रशिक्षित मार्गदर्शन के किया गया योगाभ्यास मांसपेशियों में खिंचाव, जोड़ों की मोच और यहाँ तक कि गर्दन के फ्रैक्चर जैसी गंभीर समस्याओं को जन्म दे सकता है। नई दिल्ली में जारी इस परामर्श के अनुसार, योग तभी सुरक्षित और लाभकारी है जब उसे सही तकनीक और व्यक्तिगत शारीरिक सीमाओं का ध्यान रखते हुए किया जाए। अक्सर लोग सोशल मीडिया रील्स या किताबों से देखकर योगासन की नकल करने लगते हैं, जो जोखिम भरा हो सकता है।

सही तकनीक और विशेषज्ञ मार्गदर्शन क्यों अनिवार्य है

हर व्यक्ति की शारीरिक बनावट, लचीलापन और स्वास्थ्य स्थिति अलग-अलग होती है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, दूसरों की नकल करके या बिना जानकारी के शरीर पर जबरदस्ती दबाव डालने, झटका देने या जल्दबाज़ी में आसन करने से मांसपेशियों में खिंचाव, मोच या गंभीर चोट लग सकती है। अभ्यास के दौरान यदि शरीर के किसी हिस्से में अचानक तेज़ दर्द उठे, तो तत्काल अभ्यास बंद कर देना चाहिए।

मंत्रालय ने सलाह दी है कि प्रत्येक अभ्यासकर्ता को अपनी मेडिकल स्थिति अपने योग थेरपिस्ट या सर्टिफाइड इंस्ट्रक्टर को बताना अनिवार्य है, और केवल किसी योग्य विशेषज्ञ की देखरेख में ही सही तकनीक सीखनी चाहिए।

पद्मासन से लेकर शीर्षासन तक — जोखिम और सावधानियाँ

पद्मासन (कमल मुद्रा) जैसे साधारण दिखने वाले आसन में भी अत्यधिक सावधानी आवश्यक है। पैरों को जाँघों पर रखने के लिए जबरदस्ती या अत्यधिक जोर लगाने से घुटनों या टखनों में मोच आ सकती है। जिन अभ्यासकर्ताओं के घुटनों, कूल्हों या टखनों में पुरानी चोट या गंभीर दर्द हो, उन्हें यह आसन नहीं करना चाहिए।

शीर्षासन और सर्वांगासन जैसे एडवांस्ड आसनों में सावधानी की ज़रूरत और भी अधिक बढ़ जाती है। बिना सही तकनीक के इन आसनों को करने पर पूरे शरीर का भार गर्दन पर पड़ता है, जिससे डिस्क हर्निएशन, नसों का दबना, लिगामेंट्स का टूटना और यहाँ तक कि गर्दन का फ्रैक्चर भी हो सकता है। मासिक धर्म, गर्भावस्था, चक्कर आना, तीव्र सिरदर्द या हाल की किसी सर्जरी के बाद ऐसे आसन बिल्कुल नहीं करने चाहिए।

प्राणायाम में अति से बचें

प्राणायाम को आमतौर पर सभी के लिए सुरक्षित माना जाता है, लेकिन यदि क्षमता से अधिक समय तक सांस रोकी जाए तो मस्तिष्क को ऑक्सीजन की आपूर्ति अस्थायी रूप से प्रभावित हो सकती है, जिससे चक्कर आने जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। सांस रोकने की प्रक्रिया इतनी सहज होनी चाहिए कि सांस छोड़ते समय वह बिल्कुल सामान्य और बिना किसी झटके के बाहर आए।

जिन अभ्यासकर्ताओं को हृदय रोग, मिर्गी, हर्निया या जो गर्भावस्था में हों, उन्हें बिना प्रमाणित योग ट्रेनर के मार्गदर्शन के कुंभक का अभ्यास नहीं करना चाहिए।

नेति क्रियाएँ: जल नेति और सूत्र नेति में बरतें विशेष सावधानी

योग में श्वसन मार्ग की सफाई के लिए जल नेति और सूत्र नेति का व्यापक प्रचलन है, परंतु इन्हें गलत तरीके से करने पर गंभीर संक्रमण और स्वास्थ्य समस्याएँ हो सकती हैं। जल नेति के दौरान हमेशा मुँह से सांस लेनी चाहिए — नाक से सांस लेने पर पानी साइनस या कान में जा सकता है, जिससे दर्द, सिरदर्द या संक्रमण हो सकता है। प्रक्रिया के तुरंत बाद हल्का कपालभाति प्राणायाम करके नाक में रुका पानी बाहर निकालना ज़रूरी है।

नल का सीधा ठंडा या बहुत गर्म पानी और नमक की गलत मात्रा नाक के नाज़ुक ऊतकों में जलन और सूजन पैदा कर सकती है। विशेषज्ञों की सलाह है कि हमेशा उबला हुआ गुनगुना पानी और उचित मात्रा में सेंधा या सादा नमक मिलाकर ही यह क्रिया करें। सूत्र नेति में सूत्र को तेज़ी या झटके से डालने की कोशिश करने से नाक की अंदरूनी परत छिल सकती है और खून आ सकता है।

आम जनता पर असर और अगला कदम

भारत में करोड़ों लोग प्रतिदिन योगाभ्यास करते हैं, और इनमें से बड़ी संख्या में लोग बिना किसी प्रमाणित प्रशिक्षक के स्वयं से या डिजिटल माध्यमों से सीखते हैं। आयुष मंत्रालय की यह गाइडलाइन उन सभी के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों का कहना है कि योग को दिनचर्या में शामिल करने से पहले एक बार किसी सर्टिफाइड योग विशेषज्ञ से परामर्श लेना दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ सुनिश्चित करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके समानांतर डिजिटल माध्यमों से 'सेल्फ-टॉट योग' की प्रवृत्ति भी उतनी ही तेज़ी से पनप रही है — यही वह अंतर्विरोध है जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ करती है। आयुष मंत्रालय की यह गाइडलाइन समय पर है, लेकिन सवाल यह है कि क्या सरकार केवल परामर्श जारी करने से आगे जाकर प्रमाणित योग प्रशिक्षकों की सुलभता सुनिश्चित करने की दिशा में भी काम कर रही है। जब तक सस्ती और सुलभ प्रमाणित ट्रेनिंग व्यवस्था नहीं बनती, तब तक 'सर्टिफाइड इंस्ट्रक्टर से सीखें' की सलाह शहरी मध्यम वर्ग तक ही सीमित रहने का जोखिम है।
RashtraPress
27 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिना ट्रेनर के योग करना क्यों खतरनाक हो सकता है?
बिना प्रशिक्षित मार्गदर्शन के योग करने पर शरीर पर गलत दबाव पड़ सकता है, जिससे मांसपेशियों में खिंचाव, जोड़ों की मोच और डिस्क हर्निएशन जैसी गंभीर चोटें लग सकती हैं। आयुष मंत्रालय के अनुसार, हर व्यक्ति की शारीरिक बनावट और क्षमता अलग होती है, इसलिए सर्टिफाइड इंस्ट्रक्टर की देखरेख में ही सीखना सुरक्षित है।
शीर्षासन करते समय कौन सी सावधानियाँ बरतनी चाहिए?
शीर्षासन में बिना सही तकनीक के पूरे शरीर का भार गर्दन पर आ जाता है, जिससे सर्वाइकल स्पाइन पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। मासिक धर्म, गर्भावस्था, चक्कर, तीव्र सिरदर्द या हाल की सर्जरी के बाद यह आसन बिल्कुल न करें और हमेशा किसी प्रमाणित योग विशेषज्ञ की उपस्थिति में ही इसका अभ्यास करें।
जल नेति सही तरीके से कैसे करें?
जल नेति के दौरान हमेशा मुँह से सांस लें और उबले हुए गुनगुने पानी में उचित मात्रा में सेंधा या सादा नमक मिलाकर उपयोग करें। नाक से सांस लेने पर पानी साइनस या कान में जाकर संक्रमण कर सकता है; क्रिया के तुरंत बाद हल्का कपालभाति प्राणायाम करके नाक में रुका पानी बाहर निकालें।
प्राणायाम में सांस रोकने की सही सीमा क्या है?
प्राणायाम में क्षमता से अधिक सांस रोकने पर मस्तिष्क को ऑक्सीजन की आपूर्ति अस्थायी रूप से प्रभावित हो सकती है और चक्कर आ सकते हैं। सांस रोकने की अवधि धीरे-धीरे और सहजता से बढ़ाएँ; हृदय रोग, मिर्गी, हर्निया या गर्भावस्था में बिना विशेषज्ञ के कुंभक का अभ्यास न करें।
पद्मासन करते समय किन लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए?
पद्मासन में पैरों को जाँघों पर रखने के लिए जबरदस्ती या अत्यधिक जोर लगाने से घुटनों, टखनों में मोच और लिगामेंट चोट का खतरा होता है। जिन लोगों के घुटनों, कूल्हों या टखनों में पुरानी चोट या गंभीर दर्द है, उन्हें यह आसन नहीं करना चाहिए।
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