26 अक्टूबर 2026
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योग में अत्यधिक जोर से चोट का खतरा: आयुष मंत्रालय ने जारी की ज़रूरी सावधानियाँ

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योग में अत्यधिक जोर से चोट का खतरा: आयुष मंत्रालय ने जारी की ज़रूरी सावधानियाँ

सारांश

आयुष मंत्रालय ने एक्स पर चेतावनी देते हुए कहा कि योग के दौरान ज़बरदस्ती खिंचाव या अत्यधिक दबाव से गंभीर चोट लग सकती है। शरीर की सीमाओं का सम्मान करना, सांस पर ध्यान देना और माइंडफुल प्रैक्टिस अपनाना ही सुरक्षित योग का असली रास्ता है।

मुख्य बातें

आयुष मंत्रालय ने 26 अक्टूबर 2026 को एक्स पर पोस्ट कर योग के दौरान अत्यधिक दबाव डालने से बचने की चेतावनी दी।
मंत्रालय के अनुसार झटके, ज़ोर या ज़बरदस्ती खिंचाव से मांसपेशियों में खिंचाव, मोच और घुटनों-पीठ पर चोट का खतरा रहता है।
नेशनल सेंटर फॉर कॉम्प्लिमेंटरी एंड इंटीग्रेटिव हेल्थ के अनुसार, शरीर के किसी हिस्से में तेज़ दर्द होने पर योग तुरंत बंद करना चाहिए।
हर व्यक्ति की शारीरिक क्षमता अलग होती है — दूसरों की नकल करके अपने शरीर पर दबाव डालना उचित नहीं।
मंत्रालय ने माइंडफुल प्रैक्टिस — सांस, मुद्रा और शरीर के संकेतों पर ध्यान देते हुए अभ्यास — को योग का अनिवार्य हिस्सा बताया।

आयुष मंत्रालय ने 26 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक महत्वपूर्ण पोस्ट साझा करते हुए चेतावनी दी कि योगाभ्यास के दौरान शरीर पर ज़रूरत से अधिक दबाव डालने से मांसपेशियों में खिंचाव, घुटनों और पीठ में चोट तथा अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ हो सकती हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि योग का पूरा लाभ तभी मिलता है जब इसे अपनी शारीरिक क्षमता के अनुरूप और पूरी जागरूकता के साथ किया जाए।

मंत्रालय की चेतावनी: क्या कहा गया

आयुष मंत्रालय ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'योग के अभ्यास के लिए जागरूकता, कंट्रोल और अपने शरीर की क्षमता का सम्मान करना ज़रूरी है। धीरे-धीरे अभ्यास करें, अपने मूवमेंट्स को सहज रखें और झटके, ज़ोर या दबाव से बचें। अगर शरीर के किसी भी हिस्से में तेज़ दर्द हो, तो अभ्यास तुरंत बंद कर दें। हर मूवमेंट को जागरूकता के साथ करें और माइंडफुल प्रैक्टिस को अपने योग रूटीन का ज़रूरी हिस्सा बनाएँ।' मंत्रालय के अनुसार, योग को जल्दबाज़ी में नहीं, बल्कि धैर्य और सतर्कता के साथ करना चाहिए।

सबसे आम गलती: दूसरों को देखकर शरीर पर दबाव

मंत्रालय ने बताया कि शुरुआती अभ्यासियों में सबसे बड़ी गलती यह देखी जाती है कि वे दूसरों को देखकर कठिन आसन करने की कोशिश करते हैं। हर व्यक्ति की शारीरिक संरचना और लचीलापन अलग होता है — किसी का शरीर आसानी से आगे झुक सकता है, तो किसी को उसी अवस्था तक पहुँचने में महीनों लग सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, यदि कोई पादहस्तासन में हाथों से पैर नहीं छू पा रहा, तो ज़बरदस्ती खिंचाव देने के बजाय जितना संभव हो उतना ही झुकना उचित है। नियमित अभ्यास से धीरे-धीरे क्षमता स्वतः बढ़ती है।

विशेषज्ञ संस्थान भी दे चुके हैं इसी तरह की राय

अमेरिका के नेशनल सेंटर फॉर कॉम्प्लिमेंटरी एंड इंटीग्रेटिव हेल्थ के अनुसार, शरीर के किसी भी हिस्से में तेज़ दर्द होने पर योग नहीं करना चाहिए। रिपोर्टों के अनुसार, कई लोग आसन को पूर्णता तक पहुँचाने के चक्कर में दर्द को नज़रअंदाज़ कर देते हैं, जिससे मांसपेशियों, घुटनों, कंधों या पीठ पर चोट लगने का जोखिम बढ़ जाता है। मोच और मांसपेशियों में खिंचाव जैसी समस्याएँ इसी कारण सामान्य हो जाती हैं।

माइंडफुल प्रैक्टिस: सांस और जागरूकता पर ध्यान दें

आयुष मंत्रालय ने माइंडफुल प्रैक्टिस — अर्थात पूरी जागरूकता के साथ योग करने — पर विशेष ज़ोर दिया है। योगाभ्यास के दौरान श्वास की गति, शरीर की मुद्रा और उसके संकेतों पर ध्यान देना अनिवार्य बताया गया है। यदि कोई अभ्यासी जल्दबाज़ी में एक आसन से दूसरे आसन की ओर जा रहा है या सांस पर ध्यान नहीं दे रहा, तो वह शरीर की तकलीफ़ को अनदेखा कर सकता है। हर मूवमेंट को आराम से करना, ज़रूरत पड़ने पर रुकना और शरीर की सीमाओं का सम्मान करना ही सुरक्षित और प्रभावी योग का आधार है।

आगे क्या करें: सही तरीके से शुरुआत कैसे करें

यह सलाह ऐसे समय में आई है जब देशभर में योग की लोकप्रियता तेज़ी से बढ़ रही है और ऑनलाइन वीडियो देखकर बिना प्रशिक्षण के अभ्यास करने वालों की संख्या में भी इज़ाफ़ा हो रहा है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि नए अभ्यासियों को किसी प्रशिक्षित योग गुरु के मार्गदर्शन में शुरुआत करनी चाहिए। गौरतलब है कि योग को चोट-मुक्त रखने के लिए धैर्य, अनुशासन और शरीर के संकेतों की समझ तीनों बराबर ज़रूरी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल भी उठाती है कि सरकारी स्तर पर योग के प्रचार-प्रसार के साथ सुरक्षित अभ्यास की शिक्षा कितनी प्राथमिकता पाती है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के बड़े आयोजनों में भीड़ को कठिन आसन दिखाए जाते हैं, जबकि शुरुआती अभ्यासियों के लिए सुरक्षित तकनीक की जानकारी पीछे रह जाती है। ऑनलाइन वीडियो देखकर बिना प्रशिक्षण के योग करने वालों की बढ़ती संख्या को देखते हुए, एक सोशल मीडिया पोस्ट पर्याप्त नहीं — स्कूल और सामुदायिक स्तर पर प्रशिक्षित योग शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना ज़्यादा ज़रूरी है।
RashtraPress
26 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आयुष मंत्रालय ने योग को लेकर क्या चेतावनी दी है?
आयुष मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि योग के दौरान शरीर पर ज़रूरत से अधिक दबाव, झटके या ज़बरदस्ती खिंचाव से मांसपेशियों में खिंचाव, मोच और घुटनों-पीठ पर चोट लग सकती है। मंत्रालय ने कहा कि हर मूवमेंट को धीरे-धीरे और जागरूकता के साथ करना चाहिए।
योग करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
आयुष मंत्रालय के अनुसार, योग करते समय अपनी शारीरिक क्षमता का सम्मान करना, सांस पर ध्यान देना और दर्द होने पर अभ्यास तुरंत बंद करना ज़रूरी है। दूसरों को देखकर अपने शरीर पर दबाव डालने से बचना चाहिए क्योंकि हर व्यक्ति की क्षमता अलग होती है।
क्या योग करते समय दर्द को नज़रअंदाज़ करना सही है?
नहीं। नेशनल सेंटर फॉर कॉम्प्लिमेंटरी एंड इंटीग्रेटिव हेल्थ के अनुसार शरीर के किसी भी हिस्से में तेज़ दर्द होने पर योग नहीं करना चाहिए। आसन पूरा करने के चक्कर में दर्द को नज़रअंदाज़ करने से गंभीर चोट का जोखिम बढ़ जाता है।
माइंडफुल योग प्रैक्टिस क्या होती है?
माइंडफुल प्रैक्टिस का अर्थ है पूरी जागरूकता के साथ योग करना — यानी अभ्यास के दौरान सांस, शरीर की मुद्रा और उसके संकेतों पर एकाग्र रहना। आयुष मंत्रालय ने इसे योग रूटीन का अनिवार्य हिस्सा बताया है।
शुरुआती योग अभ्यासियों के लिए सबसे ज़रूरी सलाह क्या है?
शुरुआती अभ्यासियों को सरल आसनों से शुरुआत करनी चाहिए और किसी प्रशिक्षित योग गुरु के मार्गदर्शन में अभ्यास करना चाहिए। नियमित अभ्यास से शरीर की क्षमता धीरे-धीरे बढ़ती है — जल्दी परिणाम पाने की कोशिश में कठिन आसन करना नुकसानदेह हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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