30 जून 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

अर्थराइटिस में राहत के लिए योगासन: आयुष मंत्रालय की सलाह, 6 आसन जो जोड़ों का दर्द करें कम

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
अर्थराइटिस में राहत के लिए योगासन: आयुष मंत्रालय की सलाह, 6 आसन जो जोड़ों का दर्द करें कम

सारांश

जोड़ों की अकड़न और गठिया के दर्द से परेशान लोगों के लिए आयुष मंत्रालय ने योग को प्रभावी समाधान बताया है। गोमुखासन, पवनमुक्तासन, मर्जरीआसन, ताड़ासन, भ्रामरी और शीतली प्राणायाम — ये 6 अभ्यास जोड़ों की गतिशीलता बहाल कर सकते हैं।

मुख्य बातें

आयुष मंत्रालय के अनुसार गठिया (अर्थराइटिस) के प्रबंधन में नियमित योगाभ्यास प्रभावी है।
प्रतिदिन सुबह खाली पेट 30–45 मिनट का योग लक्षणों में सुधार ला सकता है।
गोमुखासन, पवनमुक्तासन, मर्जरीआसन और ताड़ासन जोड़ों की अकड़न व दर्द कम करने में सहायक बताए गए हैं।
भ्रामरी प्राणायाम तनाव घटाता है और शीतली प्राणायाम सूजन कम करने में मददगार है।
योगाभ्यास शुरू करने से पहले प्रमाणित योग विशेषज्ञ से परामर्श लेना आवश्यक।

जोड़ों में लगातार अकड़न, सूजन और दर्द से जूझ रहे लाखों भारतीयों के लिए भारत सरकार का आयुष मंत्रालय योग को एक प्रभावी और प्राकृतिक विकल्प के रूप में प्रस्तुत करता है। 16 मई को जारी मंत्रालय की सलाह के अनुसार, गठिया (अर्थराइटिस) अब एक व्यापक समस्या बन चुकी है और नियमित योगाभ्यास इसके लक्षणों को नियंत्रित करने में सहायक हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सही मार्गदर्शन में किया गया योग जोड़ों की गतिशीलता बनाए रखने और दर्द कम करने में उल्लेखनीय भूमिका निभाता है।

गठिया क्या है और यह क्यों बढ़ रहा है

गठिया एक दीर्घकालिक स्थिति है जिसमें जोड़ों में सूजन, अकड़न और लगातार बेचैनी बनी रहती है। इससे व्यक्ति की दैनिक गतिविधियाँ — जैसे सीढ़ियाँ चढ़ना, चलना या सामान्य घरेलू काम — भी कठिन हो जाती हैं। आधुनिक जीवनशैली में घंटों एक ही मुद्रा में बैठे रहना, शारीरिक निष्क्रियता और गलत बैठने की आदतें जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव डालती हैं, जिससे लचीलापन घटता है और दर्द बढ़ता है।

योग किस प्रकार देता है राहत

आयुष मंत्रालय के अनुसार, नियमित योगाभ्यास जोड़ों को भीतर से मज़बूत करता है, आसपास की मांसपेशियों को सक्रिय करता है और सूजन को कम करने में सहायक होता है। मंत्रालय का मार्गदर्शन है — 'योग युक्त रहें, रोग मुक्त बने रहें।' विशेषज्ञों के अनुसार, प्रतिदिन सुबह खाली पेट 30 से 45 मिनट का योग दिनचर्या में शामिल करने से उल्लेखनीय सुधार देखा जा सकता है। योगाभ्यास न केवल लक्षणों को नियंत्रित करता है, बल्कि समस्या की जड़ पर भी काम करता है।

गठिया प्रबंधन के लिए अनुशंसित योगासन और प्राणायाम

विशेषज्ञों ने गठिया के प्रबंधन में निम्नलिखित 6 योगासन और प्राणायाम को विशेष रूप से लाभकारी बताया है:

गोमुखासन कंधों, घुटनों और कूल्हों की अकड़न दूर करने में बेहद प्रभावशाली माना जाता है। पवनमुक्तासन कमर और घुटनों के दर्द को कम करने के साथ-साथ पाचन तंत्र को भी सुधारता है। मर्जरीआसन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाकर जोड़ों की जकड़न घटाता है। ताड़ासन शरीर की मुद्रा में सुधार लाता है और जोड़ों पर संतुलित दबाव बनाए रखता है।

प्राणायाम में भ्रामरी प्राणायाम तनाव को कम करता है — जो गठिया को बढ़ाने वाला एक प्रमुख कारक है। शीतली प्राणायाम शरीर को ठंडक प्रदान करता है और सूजन घटाने में सहायक होता है।

सावधानियाँ और विशेषज्ञ की राय

आयुष मंत्रालय और स्वास्थ्य विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि योगाभ्यास शुरू करने से पहले किसी प्रमाणित योग विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लेना चाहिए, विशेषकर यदि दर्द गंभीर हो या कोई अन्य चिकित्सीय स्थिति हो। गठिया से पीड़ित व्यक्तियों को अपनी क्षमता के अनुसार ही आसन करने की सलाह दी जाती है।

यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब भारत में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियाँ तेज़ी से बढ़ रही हैं और दवाओं पर निर्भरता कम करने के लिए प्राकृतिक उपायों की माँग बढ़ रही है। आयुष मंत्रालय का यह प्रयास पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धति को आधुनिक स्वास्थ्य चुनौतियों से जोड़ने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान देना ज़रूरी है कि योग एक सहायक उपाय है, न कि चिकित्सीय उपचार का विकल्प। गठिया के गंभीर मामलों में केवल योग पर निर्भर रहना जोखिमपूर्ण हो सकता है और रोगी को रुमेटोलॉजिस्ट की देखरेख में रहना चाहिए। इसके अलावा, मंत्रालय की सलाह में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि ये लाभ किस प्रकार के अर्थराइटिस — रुमेटॉइड या ऑस्टियोआर्थराइटिस — पर लागू होते हैं, जो दोनों की प्रकृति और उपचार में भिन्न हैं। सार्वजनिक स्वास्थ्य परामर्श में यह सूक्ष्मता ज़रूरी है।
RashtraPress
30 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गठिया (अर्थराइटिस) में कौन से योगासन सबसे ज़्यादा फायदेमंद हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार गठिया में गोमुखासन, पवनमुक्तासन, मर्जरीआसन, ताड़ासन, भ्रामरी प्राणायाम और शीतली प्राणायाम विशेष रूप से लाभकारी हैं। ये आसन जोड़ों की अकड़न कम करते हैं, मांसपेशियों को मज़बूत करते हैं और सूजन घटाने में सहायक होते हैं।
क्या योग से अर्थराइटिस का दर्द स्थायी रूप से ठीक हो सकता है?
आयुष मंत्रालय के अनुसार नियमित योगाभ्यास गठिया के लक्षणों को नियंत्रित करने और गतिशीलता बनाए रखने में सहायक है। हालाँकि, योग को चिकित्सीय उपचार का पूर्ण विकल्प नहीं माना जाना चाहिए; गंभीर मामलों में चिकित्सक की सलाह आवश्यक है।
अर्थराइटिस के लिए योग कब और कितनी देर करना चाहिए?
विशेषज्ञों की सलाह है कि सुबह खाली पेट 30 से 45 मिनट का योगाभ्यास करना सबसे प्रभावी रहता है। नियमित दिनचर्या में शामिल करने पर कुछ सप्ताहों में सुधार देखा जा सकता है।
क्या गठिया के मरीज़ बिना विशेषज्ञ के योग शुरू कर सकते हैं?
नहीं। आयुष मंत्रालय और स्वास्थ्य विशेषज्ञ स्पष्ट रूप से कहते हैं कि योगाभ्यास शुरू करने से पहले किसी प्रमाणित योग विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें, विशेषकर यदि दर्द तीव्र हो या अन्य चिकित्सीय स्थितियाँ हों। गलत तरीके से किया गया योग जोड़ों को और नुकसान पहुँचा सकता है।
गठिया को बढ़ाने वाले मुख्य कारण क्या हैं?
घंटों एक ही मुद्रा में बैठे रहना, शारीरिक निष्क्रियता, गलत बैठने की आदतें और मानसिक तनाव गठिया को बढ़ाने वाले प्रमुख कारण हैं। भ्रामरी प्राणायाम जैसे अभ्यास तनाव कम करके इस जोखिम को घटाने में सहायक माने जाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 8 महीने पहले