अर्थराइटिस में राहत के लिए योगासन: आयुष मंत्रालय की सलाह, 6 आसन जो जोड़ों का दर्द करें कम
सारांश
मुख्य बातें
जोड़ों में लगातार अकड़न, सूजन और दर्द से जूझ रहे लाखों भारतीयों के लिए भारत सरकार का आयुष मंत्रालय योग को एक प्रभावी और प्राकृतिक विकल्प के रूप में प्रस्तुत करता है। 16 मई को जारी मंत्रालय की सलाह के अनुसार, गठिया (अर्थराइटिस) अब एक व्यापक समस्या बन चुकी है और नियमित योगाभ्यास इसके लक्षणों को नियंत्रित करने में सहायक हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सही मार्गदर्शन में किया गया योग जोड़ों की गतिशीलता बनाए रखने और दर्द कम करने में उल्लेखनीय भूमिका निभाता है।
गठिया क्या है और यह क्यों बढ़ रहा है
गठिया एक दीर्घकालिक स्थिति है जिसमें जोड़ों में सूजन, अकड़न और लगातार बेचैनी बनी रहती है। इससे व्यक्ति की दैनिक गतिविधियाँ — जैसे सीढ़ियाँ चढ़ना, चलना या सामान्य घरेलू काम — भी कठिन हो जाती हैं। आधुनिक जीवनशैली में घंटों एक ही मुद्रा में बैठे रहना, शारीरिक निष्क्रियता और गलत बैठने की आदतें जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव डालती हैं, जिससे लचीलापन घटता है और दर्द बढ़ता है।
योग किस प्रकार देता है राहत
आयुष मंत्रालय के अनुसार, नियमित योगाभ्यास जोड़ों को भीतर से मज़बूत करता है, आसपास की मांसपेशियों को सक्रिय करता है और सूजन को कम करने में सहायक होता है। मंत्रालय का मार्गदर्शन है — 'योग युक्त रहें, रोग मुक्त बने रहें।' विशेषज्ञों के अनुसार, प्रतिदिन सुबह खाली पेट 30 से 45 मिनट का योग दिनचर्या में शामिल करने से उल्लेखनीय सुधार देखा जा सकता है। योगाभ्यास न केवल लक्षणों को नियंत्रित करता है, बल्कि समस्या की जड़ पर भी काम करता है।
गठिया प्रबंधन के लिए अनुशंसित योगासन और प्राणायाम
विशेषज्ञों ने गठिया के प्रबंधन में निम्नलिखित 6 योगासन और प्राणायाम को विशेष रूप से लाभकारी बताया है:
गोमुखासन कंधों, घुटनों और कूल्हों की अकड़न दूर करने में बेहद प्रभावशाली माना जाता है। पवनमुक्तासन कमर और घुटनों के दर्द को कम करने के साथ-साथ पाचन तंत्र को भी सुधारता है। मर्जरीआसन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाकर जोड़ों की जकड़न घटाता है। ताड़ासन शरीर की मुद्रा में सुधार लाता है और जोड़ों पर संतुलित दबाव बनाए रखता है।
प्राणायाम में भ्रामरी प्राणायाम तनाव को कम करता है — जो गठिया को बढ़ाने वाला एक प्रमुख कारक है। शीतली प्राणायाम शरीर को ठंडक प्रदान करता है और सूजन घटाने में सहायक होता है।
सावधानियाँ और विशेषज्ञ की राय
आयुष मंत्रालय और स्वास्थ्य विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि योगाभ्यास शुरू करने से पहले किसी प्रमाणित योग विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लेना चाहिए, विशेषकर यदि दर्द गंभीर हो या कोई अन्य चिकित्सीय स्थिति हो। गठिया से पीड़ित व्यक्तियों को अपनी क्षमता के अनुसार ही आसन करने की सलाह दी जाती है।
यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब भारत में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियाँ तेज़ी से बढ़ रही हैं और दवाओं पर निर्भरता कम करने के लिए प्राकृतिक उपायों की माँग बढ़ रही है। आयुष मंत्रालय का यह प्रयास पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धति को आधुनिक स्वास्थ्य चुनौतियों से जोड़ने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।