पेट्रोल-डीजल महंगा होते ही गिग वर्कर्स का विरोध: 20 रुपये/किमी की मांग, शनिवार को 5 घंटे ऐप बंद
सारांश
मुख्य बातें
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 15 मई को हुई 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद देशभर के गिग और ऐप-आधारित कामगारों में तीव्र आक्रोश उभरा है। गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विसेज वर्कर्स यूनियन (GIPSWU) ने सरकार और डिजिटल प्लेटफॉर्म कंपनियों के खिलाफ बड़े विरोध प्रदर्शन का ऐलान करते हुए शनिवार को दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक देशभर में ऐप सेवाएं ठप रखने का आह्वान किया है। यूनियन के अनुसार, यह लगभग चार साल बाद ईंधन कीमतों में पहली बड़ी राष्ट्रीय स्तर की वृद्धि है।
मुख्य मांगें और विरोध का स्वरूप
GIPSWU ने मांग की है कि फूड डिलीवरी, ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स से जुड़े ऐप-आधारित वर्कर्स को न्यूनतम 20 रुपये प्रति किलोमीटर का भुगतान किया जाए। यूनियन ने स्विगी, जोमैटो और ब्लिंकिट जैसी कंपनियों से इस दर को तत्काल लागू करने की अपील की है। शनिवार को 5 घंटे के ऐप बंद को यूनियन ने अपनी ताकत दिखाने का पहला कदम बताया है।
कितने कामगार प्रभावित
GIPSWU के आंकड़ों के अनुसार, देश में करीब 1.2 करोड़ गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स इस ईंधन मूल्य वृद्धि से सीधे प्रभावित हुए हैं। इनमें फूड डिलीवरी, राइड-हेलिंग, लॉजिस्टिक्स और अन्य ऐप-आधारित सेवाओं से जुड़े लाखों कामगार शामिल हैं, जो अपने निजी दोपहिया वाहनों पर ईंधन खर्च वहन करते हैं।
यूनियन अध्यक्ष की चेतावनी
GIPSWU की अध्यक्ष सीमा सिंह ने कहा कि पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के साथ-साथ एलपीजी सिलेंडर में पहले हुई बढ़ोतरी ने भी कामगारों पर भारी आर्थिक बोझ डाला है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द भुगतान संरचना में बदलाव नहीं किया गया, तो बड़ी संख्या में गिग वर्कर्स इस क्षेत्र को छोड़ने पर मजबूर हो सकते हैं। सिंह ने यह भी रेखांकित किया कि ये कामगार लंबे समय तक तेज गर्मी और प्रतिकूल मौसम में काम करते हैं, इसलिए ईंधन मूल्य वृद्धि का सर्वाधिक असर इन्हीं पर पड़ता है।
ईंधन बढ़ोतरी की वजह
यूनियन ने ईंधन कीमतों में इस वृद्धि के लिए अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को जिम्मेदार ठहराया है। गौरतलब है कि 15 मई 2026 को पेट्रोल और डीजल दोनों में करीब 3 रुपये प्रति लीटर की एकमुश्त बढ़ोतरी की गई, जो लगभग चार साल के अंतराल के बाद हुई पहली बड़ी कटौती है।
आगे क्या
यूनियन ने देशभर के गिग वर्कर्स से शनिवार के 5 घंटे के ऐप बंद में सक्रिय भागीदारी की अपील की है। यदि सरकार और प्लेटफॉर्म कंपनियों की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आती, तो आने वाले दिनों में विरोध का दायरा और बढ़ सकता है। यह आंदोलन गिग इकॉनमी में श्रम अधिकारों की बहस को एक बार फिर केंद्र में ला सकता है।