गिग वर्कर्स को हीटवेव से बचाने की मांग, IFAT ने श्रम मंत्रालय को लिखा अहम पत्र

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गिग वर्कर्स को हीटवेव से बचाने की मांग, IFAT ने श्रम मंत्रालय को लिखा अहम पत्र

सारांश

IFAT ने श्रम मंत्रालय को पत्र लिखकर गिग वर्कर्स के लिए हीटवेव सुरक्षा की मांग की है। IMD अलर्ट के दौरान सशुल्क अवकाश, ORS, कूलिंग शेल्टर और एग्रीगेटर जवाबदेही डैशबोर्ड जैसे उपाय प्रस्तावित किए गए हैं। सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 के तहत बाध्यकारी नियम लागू करने की अपील की गई है।

Key Takeaways

  • IFAT ने 26 अप्रैल 2025 को श्रम एवं रोजगार मंत्रालय को पत्र लिखकर गिग वर्कर्स के लिए हीटवेव सुरक्षा की मांग की।
  • IMD के ऑरेंज और रेड अलर्ट के दौरान सशुल्क शीतलन अवकाश देने का प्रस्ताव रखा गया है।
  • गर्मी में काम रोकने पर श्रमिकों की आईडी ब्लॉक, जुर्माना या प्रोत्साहन राशि कटौती से सुरक्षा की मांग की गई।
  • सभी गिग वर्कर्स के लिए पीने का पानी, ORS और कूलिंग शेल्टर अनिवार्य करने की अपील की गई।
  • दक्षिण कोरिया, UAE, फ्रांस, जापान, सिंगापुर और कैलिफोर्निया पहले ही ऐसे सुरक्षा उपाय लागू कर चुके हैं।
  • भारत में गिग वर्कर्स की संख्या 2030 तक 2.35 करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है।

नई दिल्ली, 26 अप्रैल: भारत में भीषण गर्मी और हीटवेव के बीच ऐप-आधारित ट्रांसपोर्ट वर्कर्स के भारतीय संघ (IFAT) ने श्रम एवं रोजगार मंत्रालय को एक महत्वपूर्ण पत्र लिखकर गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की है। संगठन ने सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत बाध्यकारी सुरक्षा उपायों को लागू करने पर जोर दिया है।

क्या है IFAT की मांग?

IFAT ने अपने पत्र में डिलीवरी कर्मियों, राइड-हेलिंग ड्राइवरों और होम-सर्विस कर्मचारियों की दुर्दशा का हवाला देते हुए कई ठोस प्रस्ताव रखे हैं। संगठन का कहना है कि ये श्रमिक 45°C से अधिक तापमान में भी बिना किसी पर्याप्त सुरक्षा के काम करने को मजबूर हैं, जिससे उनकी जान को गंभीर खतरा है।

संगठन ने मांग की है कि भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी ऑरेंज और रेड अलर्ट के दौरान श्रमिकों को सशुल्क शीतलन अवकाश (Paid Cooling Break) दिया जाए। इसके साथ ही, अत्यधिक गर्मी के कारण काम रोकने पर श्रमिकों पर जुर्माना, आईडी ब्लॉक या प्रोत्साहन राशि में कटौती जैसी दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा दी जाए।

पीने का पानी, ORS और कूलिंग शेल्टर की अनिवार्यता

IFAT ने यह भी मांग की है कि उच्च तापमान में काम करने वाले सभी गिग वर्कर्स के लिए पीने के पानी, ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्ट (ORS) और कूलिंग शेल्टर्स की अनिवार्य व्यवस्था की जाए। यह मांग इसलिए भी अहम है क्योंकि गर्मी से होने वाली बीमारियाँ जैसे हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन इन श्रमिकों के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं।

इसके अतिरिक्त, संघ ने एग्रीगेटर कंपनियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ऐप में आपातकालीन संकट प्रणाली (Emergency Distress System) और सार्वजनिक अनुपालन डैशबोर्ड शुरू करने की सिफारिश की है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कंपनियाँ नियमों का पालन कर रही हैं।

अंतरराष्ट्रीय उदाहरणों का हवाला

IFAT ने अपनी मांगों को और मजबूत करने के लिए वैश्विक उदाहरण प्रस्तुत किए। संगठन ने बताया कि दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, फ्रांस, जापान, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य ने पहले ही प्लेटफॉर्म कर्मचारियों के लिए इसी तरह के हीटवेव सुरक्षा उपाय लागू कर दिए हैं।

यह तथ्य इस ओर इशारा करता है कि भारत जैसे देश में — जहाँ गिग इकॉनमी में करोड़ों श्रमिक जुड़े हैं और जलवायु परिवर्तन के कारण हर साल गर्मी का प्रकोप बढ़ रहा है — इस दिशा में नीतिगत कदम उठाना अब अपरिहार्य हो गया है।

सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 और गिग वर्कर्स

सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 देश भर में गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के सामाजिक सुरक्षा अधिकारों को नियंत्रित करने वाला प्रमुख कानून है। हालांकि, इसके प्रावधानों के क्रियान्वयन को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं।

गौरतलब है कि भारत में गिग वर्कर्स की संख्या वर्तमान में लगभग 77 लाख से अधिक है और 2030 तक यह संख्या 2.35 करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है। इतनी बड़ी कार्यबल को बिना किसी हीटवेव सुरक्षा के छोड़ना न केवल मानवीय दृष्टि से अनुचित है, बल्कि देश की उत्पादकता पर भी गहरा असर डाल सकता है।

आगे क्या होगा?

अब सभी की निगाहें श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। यदि सरकार IFAT की मांगों को स्वीकार करती है, तो यह भारत में गिग इकॉनमी वर्कर्स के अधिकारों की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून सत्र से पहले इस मुद्दे पर स्पष्ट नीतिगत दिशा-निर्देश जारी होने की संभावना है।

Point of View

तब उन्हीं श्रमिकों को 45°C की गर्मी में बिना किसी सुरक्षा के काम करने पर मजबूर करना एक गंभीर विरोधाभास है। IFAT की मांगें कोई नई नहीं हैं — दुनिया के छह प्रमुख देश पहले ही ऐसे नियम लागू कर चुके हैं, लेकिन भारत में सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 के बावजूद जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन शून्य है। असली सवाल यह है कि क्या सरकार इन श्रमिकों को वोट बैंक की तरह देखती है या नागरिक की तरह — क्योंकि नीति और हकीकत के बीच की यह खाई हर गर्मी में और चौड़ी होती जा रही है।
NationPress
26/04/2026

Frequently Asked Questions

IFAT ने सरकार से गिग वर्कर्स के लिए क्या मांगें की हैं?
IFAT ने श्रम मंत्रालय से IMD के ऑरेंज और रेड अलर्ट के दौरान सशुल्क शीतलन अवकाश, पीने का पानी, ORS, कूलिंग शेल्टर और एग्रीगेटर जवाबदेही डैशबोर्ड की मांग की है। साथ ही गर्मी में काम रोकने पर श्रमिकों पर किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा की भी अपील की गई है।
गिग वर्कर्स को हीटवेव से क्यों खतरा है?
डिलीवरी कर्मी, राइड-हेलिंग ड्राइवर और होम-सर्विस कर्मचारी खुले वातावरण में काम करते हैं और उन्हें भीषण गर्मी में भी काम जारी रखना पड़ता है। पर्याप्त सुरक्षा उपायों के अभाव में उन्हें हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 गिग वर्कर्स के लिए क्या प्रावधान करती है?
सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 देश भर में गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के सामाजिक सुरक्षा अधिकारों को नियंत्रित करती है। IFAT ने इसी कानून के तहत हीटवेव सुरक्षा उपायों को बाध्यकारी बनाने की मांग की है।
किन देशों ने पहले से गिग वर्कर्स के लिए हीटवेव सुरक्षा लागू की है?
दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, फ्रांस, जापान, संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य ने पहले ही प्लेटफॉर्म कर्मचारियों के लिए हीटवेव सुरक्षा उपाय लागू किए हैं। IFAT ने इन्हीं उदाहरणों का हवाला देकर भारत में भी ऐसे नियम लागू करने की मांग की है।
भारत में गिग वर्कर्स की कुल संख्या कितनी है?
वर्तमान में भारत में गिग वर्कर्स की संख्या लगभग 77 लाख से अधिक है और 2030 तक यह संख्या 2.35 करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है। यह बड़ी कार्यबल देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
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