भारत-अमेरिका संबंधों पर पूर्व राजदूत रिचर्ड वर्मा की चेतावनी: टैरिफ, वीजा कटौती और क्लीन एनर्जी बने नए दबाव बिंदु
सारांश
मुख्य बातें
भारत में अमेरिका के पूर्व राजदूत रिचर्ड वर्मा ने 16 मई 2026 को वाशिंगटन में आयोजित काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के 2026 इंटरनेशनल अफेयर्स फेलोशिप कीनोट में स्पष्ट चेतावनी दी कि अमेरिका-भारत संबंध फिलहाल गंभीर दबाव में हैं। टैरिफ में बढ़ोतरी, भारतीय छात्रों के लिए वीजा अनुमोदन में भारी गिरावट और स्वच्छ ऊर्जा सहयोग में कमी को उन्होंने इस तनाव के प्रमुख कारण बताया। इसके बावजूद उन्होंने भारत को इस सदी में अमेरिका की 'सबसे महत्वपूर्ण साझेदारियों' में से एक करार दिया।
दो दशकों की साझेदारी और मौजूदा संकट
वर्मा — जो वर्तमान में मास्टरकार्ड में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी और अमेरिकी विदेश विभाग के पूर्व उपसचिव हैं — ने कहा कि वर्ष 2000 में राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के भारत दौरे के बाद से दोनों देशों के बीच संबंध तेज़ी से परिपक्व हुए हैं। उनके अनुसार, रक्षा व्यापार शून्य से 20 अरब डॉलर और द्विपक्षीय व्यापार 20 अरब से 200 अरब डॉलर से अधिक तक पहुँच गया। फिर भी उन्होंने माना कि यह साझेदारी अब नए दबाव बिंदुओं का सामना कर रही है।
टैरिफ और वीजा: दो बड़े घाव
वर्मा ने कहा कि भारत और ब्राजील ही ऐसे दो देश थे जिन पर 50 फीसदी टैरिफ था — यह कुछ समझ से बाहर था। उन्होंने यह भी बताया कि एफ-1 स्टूडेंट वीजा अनुमोदन दर भारतीय छात्रों के लिए कम से कम 60-70 फीसदी तक गिर चुकी है। यह बात ट्रंप प्रशासन के दूसरे कार्यकाल में सख्त अमेरिकी इमिग्रेशन नीतियों को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच आई है।
गौरतलब है कि अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों में भारतीय सबसे बड़ा समूह हैं। वर्मा ने आगाह किया कि ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जापान, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे देश इन छात्रों को आकर्षित करने के लिए आक्रामक प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।
भारत का भविष्य और वैश्विक महत्व
वर्मा ने 2030 तक भारत के उभरने की भविष्यवाणी करते हुए कहा कि उस समय भारत में दुनिया का सबसे बड़ा मध्यम वर्ग, सर्वाधिक कॉलेज स्नातक और सबसे अधिक इंटरनेट उपयोगकर्ता होंगे। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति ड्वाइट आइजनहावर की उस भविष्यवाणी को भी याद दिलाया जिसमें कहा गया था कि यदि अमेरिका और भारत घनिष्ठ साझेदार होते तो दुनिया अधिक सुरक्षित होती। राष्ट्रपति जॉन एफ. केनेडी के उस कथन का भी उल्लेख किया कि एशिया की किस्मत का फैसला भारत पर है।
संयुक्त राष्ट्र सुधार और तकनीकी सहयोग
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के सवाल पर वर्मा ने कहा कि वैश्विक संस्थानों में व्यापक सुधार की आवश्यकता है ताकि नई भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित किया जा सके। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण खनिजों में भारत-अमेरिका सहयोग की संभावनाओं को भी रेखांकित किया।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता जारी है। वर्मा की टिप्पणियाँ स्पष्ट संकेत देती हैं कि रणनीतिक साझेदारी की मज़बूत नींव के बावजूद, नीतिगत घर्षण को यदि समय रहते संबोधित नहीं किया गया तो दीर्घकालिक संबंधों पर इसका असर पड़ सकता है।