डोनाल्ड ट्रंप के वीजा प्रतिबंधों का भारत और चीन पर गंभीर प्रभाव: नई रिपोर्ट
सारांश
Key Takeaways
- भारत और चीन में कानूनी आप्रवासन में गिरावट हुई है।
- ट्रंप प्रशासन की सख्त वीजा नीतियों का प्रभाव।
- छात्र वीजा में 30%25 से अधिक की कमी।
- अर्थव्यवस्था पर संभावित नकारात्मक प्रभाव।
- राजनीतिक बदलावों का दीर्घकालिक परिणाम।
वॉशिंगटन, 23 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। संयुक्त राज्य अमेरिका में 2025 के पहले आठ महीनों में कानूनी आप्रवासन में अत्यधिक कमी आई है, जिसमें भारत और चीन सबसे अधिक प्रभावित देशों में शामिल हैं। यह गिरावट ट्रंप प्रशासन द्वारा वीजा नीतियों को सख्त करने के कारण हुई है, जैसा कि द वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट में बताया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी विदेश विभाग ने जनवरी से अगस्त 2025 के बीच 2024 की इसी अवधि की तुलना में लगभग 250,000 कम वीजा जारी किए। मार्च के प्रारंभ में जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, स्थायी निवासी और अस्थायी वीजा की कुल स्वीकृतियों में 11 प्रतिशत की कमी आई है।
यह गिरावट छात्रों, श्रमिकों और अमेरिकी नागरिकों व कानूनी निवासियों के परिवार के सदस्यों के वीजा में देखी गई है। इसी अवधि में पर्यटक वीजा की संख्या में भी कमी आई है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारत और चीन के नागरिकों के वीजा में सबसे अधिक कमी आई है, जिसमें लगभग 84,000 की गिरावट दर्ज की गई। वाशिंगटन पोस्ट के अनुसार, यह कमी मुख्यतः छात्र, श्रमिक और पारिवारिक वीजा की संख्या में कमी के कारण हुई है।
अंतर्राष्ट्रीय छात्रों पर इसका सबसे अधिक प्रभाव पड़ा है। 2025 के पहले आठ महीनों में छात्र वीजा में 30 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है। एक्सचेंज वीजा की संख्या में भी भारी कमी आई है, जो लगभग 30,000 कम हो गई। स्थायी निवास या ग्रीन कार्ड के लिए वीजा स्वीकृतियों में भी कमी आई है। सबसे बड़ी गिरावट कामगारों, अफगानिस्तान और इराक जैसे देशों के नागरिकों के वीजा में देखी गई है।
विशेषज्ञों और अधिकारियों का मानना है कि इस गिरावट का मुख्य कारण नीतिगत बदलाव और प्रशासनिक कारक हैं। अखबार के अनुसार, इसमें 19 देशों पर यात्रा प्रतिबंध, छात्र वीजा साक्षात्कारों पर अस्थायी रोक और सोशल मीडिया की जांच सहित विस्तारित जांच आवश्यकताएं शामिल हैं।
विदेश विभाग में कर्मचारियों की छंटनी भी इस प्रक्रिया की क्षमता को कम कर रही है। कई व्यस्त स्थानों पर कम कांसुलर अपॉइंटमेंट और लंबे प्रतीक्षा समय की भी जानकारी प्राप्त हुई है।
विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगोट ने कहा, “वीजा एक विशेषाधिकार है, अधिकार नहीं। बाइडन प्रशासन के विपरीत, राष्ट्रपति ट्रंप अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा से समझौता करके बिना जांच-पड़ताल वाले विदेशी नागरिकों को बड़े पैमाने पर देश में प्रवेश की अनुमति देने के लिए तैयार नहीं हैं।”
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एबिगेल जैक्सन ने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप को अमेरिकी नागरिकों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के भारी जनादेश के साथ चुना गया था और उनके द्वारा लिए गए हर नीतिगत निर्णय में यह प्राथमिकता झलकती है।”
विश्लेषकों का कहना है कि नीति और मांग दोनों ही इस गिरावट के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।
निस्कनेन सेंटर की सेसिलिया एस्टरलाइन ने कहा, “हमारे पास यह स्पष्ट रूप से बताने के लिए कोई डेटा नहीं है कि इस गिरावट का कितना हिस्सा मांग और कितना नीति के कारण है। ये दोनों ही स्पष्ट रूप से जारी किए जाने वाले वीजा की संख्या पर दबाव डाल रहे हैं।”
आलोचकों का तर्क है कि इन प्रतिबंधों से अमेरिकी अर्थव्यवस्था और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को नुकसान पहुंचने का खतरा है।
हार्वर्ड विश्वविद्यालय के जेसन फरमैन ने कहा, "अमेरिकी अर्थव्यवस्था के वर्तमान और भविष्य के लिए आप्रवासन से अधिक महत्वपूर्ण कोई नीति नहीं है। जब हम आप्रवासन को प्रतिबंधित करते हैं, तो हम न केवल आज श्रम शक्ति की वृद्धि को बाधित करते हैं, बल्कि भविष्य में नवाचार और उत्पादकता वृद्धि को भी कम करते हैं।"