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योग से पहले प्रार्थना क्यों जरूरी? आयुष मंत्रालय ने योग 365 अभियान में बताया महत्व

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योग से पहले प्रार्थना क्यों जरूरी? आयुष मंत्रालय ने योग 365 अभियान में बताया महत्व

सारांश

योग केवल शारीरिक कसरत नहीं — आयुष मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि प्रार्थना से शुरू किया गया योग अधिक ध्यानपूर्ण और फलदायी होता है। योग 365 अभियान के तहत यही संदेश पूरे वर्ष दिया जा रहा है।

मुख्य बातें

आयुष मंत्रालय के अनुसार योगाभ्यास की शुरुआत प्रार्थना से करने पर मन की चंचलता कम होती है और एकाग्रता बढ़ती है।
योग 365 अभियान का लक्ष्य योग को वर्षभर की दिनचर्या का हिस्सा बनाना है, न कि केवल एक दिन का आयोजन।
प्रार्थना के दौरान ली गई गहरी साँसें शरीर को योगाभ्यास के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार करती हैं।
मंत्रालय ने जल्दबाजी में योग न करने और पहले एक सकारात्मक संकल्प लेने की अपील की है।
पारंपरिक योग ग्रंथों में भी अभ्यास की शुरुआत मंत्र या प्रार्थना से करने का उल्लेख है।

आयुष मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि योगाभ्यास को केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करने की एक समग्र प्रक्रिया माना जाना चाहिए। मंत्रालय के अनुसार, योग का पूर्ण लाभ तभी प्राप्त होता है जब अभ्यास की शुरुआत सही मानसिक स्थिति और प्रार्थना के साथ की जाए। नई दिल्ली से जारी इस मार्गदर्शन को योग 365 अभियान के तहत व्यापक रूप से प्रसारित किया जा रहा है।

प्रार्थना से मन की एकाग्रता

मंत्रालय का कहना है कि प्रार्थना मन को केंद्रित करने का सबसे सरल और प्रभावी उपाय है। जब अभ्यासी योग से पहले कुछ क्षण प्रार्थना में लगाते हैं, तो बिखरे हुए विचार एकत्रित होते हैं और मन की चंचलता कम होती है। इस प्रक्रिया के दौरान ली गई गहरी साँसें शरीर को योगाभ्यास के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार करती हैं।

यह ठहराव दैनिक भागदौड़ से बाहर निकलकर वर्तमान क्षण में लौटने का अवसर देता है, जो ध्यानपूर्ण और फलदायी अभ्यास का आधार बनता है।

योग 365 अभियान का संदेश

आयुष मंत्रालय के योग 365 अभियान का मूल उद्देश्य योग को केवल अंतरराष्ट्रीय योग दिवस तक सीमित न रखकर इसे वर्षभर की दिनचर्या का अभिन्न अंग बनाना है। अभियान के तहत लोगों से आग्रह किया जा रहा है कि वे प्रतिदिन योग मैट बिछाएँ, प्रार्थना से दिन आरंभ करें और कृतज्ञता के भाव के साथ अभ्यास में उतरें।

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में योग को जीवनशैली की बजाय केवल एक आयोजन के रूप में देखे जाने की प्रवृत्ति पर चिंता जताई जाती रही है।

विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों के अनुसार, अभ्यास से पहले लिया गया एक छोटा सा ठहराव — जिसमें गहरी साँस और एक सकारात्मक संकल्प शामिल हो — योग को अधिक ध्यानपूर्ण और टिकाऊ बनाता है। जब शरीर और मन दोनों तैयार होते हैं, तो आसनों का प्रभाव भी गहरा होता है।

गौरतलब है कि पारंपरिक योग ग्रंथों में भी अभ्यास की शुरुआत मंत्र या प्रार्थना से करने का उल्लेख है, और आयुष मंत्रालय की यह सिफारिश उसी प्राचीन परंपरा को आधुनिक संदर्भ में पुनर्स्थापित करती है।

मंत्रालय की अपील

आयुष मंत्रालय ने नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे योगाभ्यास को जल्दबाजी में न करें। सही क्रम यह है — पहले प्रार्थना, फिर मन को शांत करना, एक सकारात्मक संकल्प लेना और उसके बाद धीरे-धीरे आसनों में प्रवेश करना।

मंत्रालय के अनुसार, यह छोटी सी तैयारी पूरे अभ्यास को अधिक सार्थक और परिणामकारी बनाती है। आगे चलकर योग 365 अभियान के अंतर्गत और भी जागरूकता सामग्री जारी किए जाने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी असली चुनौती क्रियान्वयन में है। योग 365 जैसे अभियान तब तक अधूरे हैं जब तक शहरी व्यस्त जीवनशैली में इन्हें व्यावहारिक रूप से अपनाने के ठोस उपाय न सुझाए जाएँ। मंत्रालय की मार्गदर्शिका प्राचीन परंपरा को आधुनिक संदर्भ में रखती है, किंतु 'प्रार्थना' की व्यापक और समावेशी परिभाषा — जो विभिन्न धर्मों और आस्थाओं के लोगों को समान रूप से स्वीकार्य हो — स्पष्ट नहीं है। यह अंतर भविष्य की जागरूकता सामग्री में भरना जरूरी होगा।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

योग से पहले प्रार्थना करना क्यों जरूरी है?
आयुष मंत्रालय के अनुसार, प्रार्थना मन के बिखरे विचारों को एकत्रित करती है और चंचलता को कम करती है, जिससे योगाभ्यास अधिक ध्यानपूर्ण और फलदायी बनता है। इस दौरान ली गई गहरी साँसें शरीर को शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार करती हैं।
योग 365 अभियान क्या है?
योग 365 आयुष मंत्रालय का एक जागरूकता अभियान है जिसका उद्देश्य योग को केवल अंतरराष्ट्रीय योग दिवस तक सीमित न रखकर इसे पूरे वर्ष की दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाना है। अभियान के तहत लोगों को प्रार्थना और सकारात्मक संकल्प के साथ योग शुरू करने की सलाह दी जाती है।
योगाभ्यास से पहले सही तरीका क्या है?
आयुष मंत्रालय की सिफारिश है कि पहले प्रार्थना करें, मन शांत करें, एक सकारात्मक संकल्प लें और उसके बाद धीरे-धीरे आसनों में प्रवेश करें। जल्दबाजी से योग करने पर इसका पूर्ण लाभ नहीं मिलता।
क्या प्रार्थना से योग का लाभ वाकई बढ़ता है?
विशेषज्ञों के अनुसार, अभ्यास से पहले का छोटा ठहराव — जिसमें गहरी साँस और मन में अच्छा इरादा तय करना शामिल हो — योग को अधिक प्रभावी बनाता है। पारंपरिक योग ग्रंथों में भी अभ्यास की शुरुआत मंत्र या प्रार्थना से करने का उल्लेख मिलता है।
आयुष मंत्रालय ने योग को लेकर क्या अपील की है?
मंत्रालय ने लोगों से आग्रह किया है कि वे योग को जल्दबाजी में न करें और प्रतिदिन प्रार्थना व कृतज्ञता के भाव के साथ अभ्यास शुरू करें। योग 365 अभियान के अंतर्गत इस संदेश को वर्षभर प्रसारित किया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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