माइंडफुल योगा सेशन का सही समापन: आयुष मंत्रालय की सलाह — ध्यान और शांति पाठ है ज़रूरी
सारांश
मुख्य बातें
आज की भागदौड़ भरी दिनचर्या में माइंडफुल योगा मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का एक प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है, लेकिन आयुष मंत्रालय के अनुसार योग का पूर्ण लाभ तभी मिलता है जब सेशन का समापन भी उतनी ही सजगता से किया जाए जितनी सजगता से उसकी शुरुआत होती है। मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की गई जानकारी में स्पष्ट किया कि अभ्यास के बाद ध्यान और शांति पाठ को नज़रअंदाज़ करना पूरे सेशन की सार्थकता को कम कर सकता है।
माइंडफुल योगा का अर्थ क्या है
माइंडफुल योगा का तात्पर्य केवल विभिन्न आसनों के अभ्यास से नहीं है — इसमें हर क्रिया को पूरी जागरूकता, धैर्य और उपस्थिति के साथ करना शामिल है। आयुष मंत्रालय का कहना है कि योग सेशन का सबसे महत्वपूर्ण और प्रायः उपेक्षित हिस्सा उसका शांतिपूर्ण समापन होता है। यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक है जब लोग व्यस्त जीवनशैली के चलते योग को भी एक और 'टास्क' की तरह निपटाने लगे हैं।
अभ्यास के बाद नहाने और भोजन में अंतर रखें
यदि आप प्रतिदिन सुबह योग करते हैं, तो अभ्यास समाप्त होते ही सीधे स्नान के लिए न जाएँ। आयुष मंत्रालय की सलाह है कि योग सेशन खत्म होने के बाद स्नान से पहले कम से कम 25 से 30 मिनट का अंतराल लें। इसकी वजह यह है कि योग के दौरान शरीर सक्रिय अवस्था में होता है और श्वास-क्रिया में भी बदलाव आता है; ऐसे में शरीर को सामान्य स्थिति में आने का समय देना आवश्यक है।
इसी तरह, योग के तुरंत बाद भोजन करने से भी परहेज़ करना चाहिए। मंत्रालय के अनुसार, अभ्यास के बाद भोजन से पहले 15 से 30 मिनट का इंतज़ार उचित रहता है। इस दौरान हल्का और पौष्टिक आहार — जैसे फल, हल्का नाश्ता या अपनी नियमित डाइट के अनुसार संतुलित खाना — सर्वोत्तम विकल्प है।
ध्यान और मौन: सेशन का अनिवार्य हिस्सा
आयुष मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुसार, योग अभ्यास खत्म होने के बाद कुछ मिनट ध्यान या गहरे मौन में अवश्य बिताने चाहिए। इसके लिए किसी शांत स्थान पर आरामदायक स्थिति में बैठें, आँखें बंद करें और अपनी साँसों पर ध्यान केंद्रित करें। यह छोटा-सा अभ्यास मन को वर्तमान क्षण में लाने और विचारों की अनावश्यक दौड़ को थामने में सहायक होता है।
शांति पाठ से करें सेशन का समापन
ध्यान के बाद शांति पाठ यानी अंतिम प्रार्थना के साथ योग सेशन का विधिवत समापन करने की सलाह दी जाती है। अपनी आस्था के अनुसार शांति मंत्र का उच्चारण करें। मंत्रालय का मानना है कि इससे मन में सकारात्मकता, कृतज्ञता और आंतरिक शांति का भाव जाग्रत होता है — और पूरे दिन की शुरुआत एक स्थिर, केंद्रित मनःस्थिति से होती है।
आम जनता पर असर
गौरतलब है कि भारत में करोड़ों लोग प्रतिदिन योग का अभ्यास करते हैं, लेकिन अधिकांश केवल आसनों पर ध्यान देते हैं और समापन की विधि की अनदेखी करते हैं। आयुष मंत्रालय की यह जागरूकता-पहल ऐसे अभ्यासियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जो योग को एक समग्र अनुभव के रूप में अपनाना चाहते हैं। सही समापन-विधि अपनाने से दीर्घकालिक मानसिक स्वास्थ्य लाभ और तनाव में कमी की संभावना बढ़ती है।