योग शुरू करने से पहले जानें ज़रूरी सावधानियाँ, आयुष मंत्रालय की सलाह — हर उम्र के लिए अलग नियम
सारांश
मुख्य बातें
आयुष मंत्रालय के अनुसार, योगाभ्यास केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि संतुलित जीवन जीने की एक समग्र कला है — और इसे बिना उचित जानकारी के अपनाना लाभ की जगह नुकसान पहुँचा सकता है। उम्र, स्वास्थ्य स्थिति, शारीरिक-मानसिक अवस्था और मौसम जैसे कारक मिलकर तय करते हैं कि किसी व्यक्ति के लिए कौन-सा अभ्यास उपयुक्त है। विशेषज्ञों की राय है कि योग शुरू करने से पहले प्रत्येक अभ्यास के कॉन्ट्राइंडिकेशन्स — यानी किन परिस्थितियों में वह अभ्यास नहीं करना चाहिए — को अच्छी तरह समझना अनिवार्य है।
आयुष मंत्रालय की मुख्य सलाह
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि हर व्यक्ति का शरीर और मन अलग होता है, इसलिए सभी के लिए एकसमान योगाभ्यास उचित नहीं है। मंत्रालय के अनुसार, अपने योग प्रशिक्षक या थेरेपिस्ट को अपनी स्वास्थ्य स्थिति के बारे में पूरी जानकारी देना ज़रूरी है और उनके निर्देशों का पालन करते हुए ही अभ्यास करना चाहिए। कुछ स्वास्थ्य समस्याओं में विशेष योगासन पूरी तरह वर्जित होते हैं।
मंत्रालय ने यह भी सुझाव दिया है कि योगाभ्यास खाली पेट या भोजन के कम से कम 3-4 घंटे बाद ही किया जाए। सुबह का समय योग के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। इसके साथ ही, अपनी शारीरिक क्षमताओं और सीमाओं को पहचानना भी उतना ही आवश्यक है।
बुज़ुर्गों के लिए विशेष सावधानी
बढ़ती उम्र के साथ शरीर की क्षमता और ज़रूरतें बदल जाती हैं। इसलिए बुज़ुर्गों को बहुत अधिक आगे या पीछे झुकने वाले आसनों और लंबे समय तक एक ही मुद्रा में रहने वाले अभ्यासों से बचने की सलाह दी जाती है। उदाहरण के तौर पर, पादहस्तासन और चक्रासन में शरीर को अत्यधिक मोड़ना पड़ता है, जो बुज़ुर्गों के लिए कठिन और जोखिमपूर्ण हो सकता है।
विशेषज्ञों की सलाह है कि ऐसे आसन या तो बिल्कुल न किए जाएँ या चिकित्सक की स्वीकृति के बाद ही, अत्यंत सावधानी के साथ किए जाएँ। गौरतलब है कि उम्र के साथ हड्डियों और मांसपेशियों की लचीलापन कम हो जाती है, जिससे चोट का खतरा बढ़ जाता है।
प्राणायाम में भी बरतें सतर्कता
योग के साथ-साथ प्राणायाम के अभ्यास में भी व्यक्ति की शारीरिक और मानसिक स्थिति का विशेष महत्व है। उदाहरण के रूप में, भस्त्रिका प्राणायाम में तेज़ और बलपूर्वक साँस ली और छोड़ी जाती है, जिससे शरीर में अचानक ऊर्जा और रक्त संचार में वृद्धि होती है।
उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) के रोगियों में यह अभ्यास हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर को खतरनाक स्तर तक बढ़ा सकता है, जिससे चक्कर आना या अन्य गंभीर कार्डियक समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक है जब देश में हृदय रोगों के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं।
महिलाओं और विशेष स्वास्थ्य स्थितियों के लिए नियम
महिलाओं को मासिक धर्म और गर्भावस्था के दौरान कुछ विशेष आसनों से परहेज़ करने की सलाह दी जाती है। इसी तरह, हर्निया के रोगियों को पीछे झुकने वाले आसन वर्जित हैं। प्रत्येक चिकित्सीय स्थिति के लिए योग में कड़े निषेध होते हैं, जिनका पालन करना स्वास्थ्य की दृष्टि से अनिवार्य है।
यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब बिना प्रमाणित मार्गदर्शन के ऑनलाइन योग वीडियो देखकर अभ्यास करने का चलन तेज़ी से बढ़ा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि गलत अभ्यास से शरीर पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है और दीर्घकालिक नुकसान भी संभव है।
सुरक्षित योगाभ्यास के मूल सिद्धांत
विशेषज्ञ सुझाते हैं कि योगाभ्यास सदैव जागरूकता, सही जानकारी और योग्य मार्गदर्शन के साथ ही किया जाना चाहिए। अभ्यास से पूर्व अपनी मेडिकल कंडीशन के अनुसार निषेधों की पूरी जानकारी लें। किसी भी नई दिनचर्या को शुरू करने से पहले अपने चिकित्सक और प्रमाणित योग प्रशिक्षक से परामर्श करना सबसे सुरक्षित विकल्प है। सही मार्गदर्शन के साथ किया गया योग जीवन की गुणवत्ता को दीर्घकालिक रूप से बेहतर बना सकता है।