31 अक्टूबर 2026
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आयुष मंत्रालय के योग सिद्धांत: नियमित अभ्यास और धैर्य ही असली कुंजी

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आयुष मंत्रालय के योग सिद्धांत: नियमित अभ्यास और धैर्य ही असली कुंजी

सारांश

आयुष मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि योग प्रतियोगिता नहीं, आत्म-जागरूकता की प्रक्रिया है। सोशल मीडिया की नकल और ज़बरदस्ती के आसनों से बचने की सलाह दी गई। नियमित अभ्यास, सांसों पर ध्यान और यम-नियम का पालन ही योग का असली सार है।

मुख्य बातें

आयुष मंत्रालय ने 31 अक्टूबर 2026 को योग अभ्यास के महत्वपूर्ण सिद्धांत जारी किए।
योग कोई प्रतियोगिता नहीं — इसका उद्देश्य शरीर और मन के बीच बेहतर तालमेल बनाना है।
एक ही दिन घंटों करने की बजाय प्रतिदिन नियमित अभ्यास अधिक लाभदायक है।
सोशल मीडिया देखकर कठिन आसन दोहराना चोट का कारण बन सकता है — मंत्रालय ने चेताया।
योग में यम (दूसरों के प्रति व्यवहार) और नियम (आत्म-अनुशासन) का पालन भी उतना ही ज़रूरी।

आयुष मंत्रालय ने 31 अक्टूबर 2026 को योग अभ्यास से जुड़े महत्वपूर्ण सिद्धांत साझा किए हैं, जिनमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि योग कोई प्रतियोगिता नहीं, बल्कि शरीर और मन के बीच तालमेल बनाने की एक सतत प्रक्रिया है। मंत्रालय के अनुसार, जल्दबाज़ी और दिखावटी कठिन आसनों से बचना चाहिए और नियमित, संयमित अभ्यास को प्राथमिकता देनी चाहिए।

नियमितता ही योग का आधार

मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि योग का पूरा लाभ तभी मिलता है जब इसे दिनचर्या का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाए। एक ही दिन में घंटों अभ्यास करने की बजाय प्रतिदिन अपनी सुविधा के अनुसार कुछ निश्चित समय तक योग करना कहीं अधिक प्रभावशाली है। शुरुआती अभ्यासकर्ता सरल आसनों से शुरुआत कर सकते हैं और धीरे-धीरे अभ्यास का समय व जटिलता बढ़ा सकते हैं।

सोशल मीडिया की नकल से बचें

मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि सोशल मीडिया पर किसी को कठिन आसन करते देखकर उसे दोहराने की कोशिश करना नुकसानदायक हो सकता है। हर व्यक्ति की शारीरिक संरचना और क्षमता भिन्न होती है, इसलिए किसी भी आसन को जबरदस्ती करने या शरीर पर अत्यधिक दबाव डालने से सख्त परहेज़ करना चाहिए। मंत्रालय के अनुसार, अपनी शारीरिक स्थिति, ज़रूरत और सीमाओं को समझना योग अभ्यास की पहली शर्त है।

शरीर के संकेतों पर ध्यान दें

आयुष मंत्रालय ने यह भी रेखांकित किया कि योग करते समय केवल आसन पूरा करने पर ही ध्यान केंद्रित न रखें। सांसों की गति, शरीर में होने वाला खिंचाव और मन की स्थिति पर जागरूक रहना उतना ही ज़रूरी है। यदि किसी आसन के दौरान दर्द या असहजता महसूस हो, तो उसे नज़रअंदाज़ करने की बजाय तुरंत रुकना चाहिए — शरीर के संकेतों को पहचानना और मानना योग अभ्यास का अभिन्न अंग है।

यम और नियम: योग का नैतिक आयाम

मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि योग को केवल शारीरिक व्यायाम तक सीमित नहीं मानना चाहिए। इसके अंतर्गत यम और नियम — जो क्रमशः दूसरों के प्रति उचित व्यवहार और आत्म-अनुशासन, स्वच्छता तथा संतोष के सिद्धांत हैं — को भी विशेष महत्व दिया गया है। ये सिद्धांत जीवन को सही दिशा देने वाले नैतिक व व्यक्तिगत अनुशासन के स्तंभ हैं।

आम जनता पर असर

देश में करोड़ों लोग वज़न नियंत्रण, तनाव प्रबंधन और मानसिक शांति के लिए योग का सहारा लेते हैं। आयुष मंत्रालय के ये दिशा-निर्देश उन लोगों के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक हैं जो बिना प्रशिक्षित मार्गदर्शन के घर पर योग सीखते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब सोशल मीडिया पर योग की 'फ्लेक्सिबिलिटी चैलेंज' संस्कृति तेज़ी से फैल रही है, जो कई बार चोट का कारण बन सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, मंत्रालय का यह कदम योग को उसके समग्र और वैज्ञानिक स्वरूप में जन-जन तक पहुँचाने की दिशा में सराहनीय है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इनकी सीमा यह है कि ये केवल परामर्शात्मक हैं — इन्हें लागू करने का कोई तंत्र नहीं है। सोशल मीडिया पर योग की 'परफॉर्मेंस कल्चर' जिस रफ़्तार से बढ़ रही है, उसके मुकाबले महज़ दिशा-निर्देश जारी करना पर्याप्त नहीं। असली ज़रूरत प्रशिक्षित योग प्रशिक्षकों की सुलभता और डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ जवाबदेही की है, ताकि अप्रमाणित कंटेंट से होने वाली चोटों को रोका जा सके।
RashtraPress
31 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आयुष मंत्रालय ने योग के बारे में क्या सिद्धांत बताए हैं?
आयुष मंत्रालय ने बताया कि योग कोई प्रतियोगिता नहीं है और इसका लक्ष्य शरीर व मन में बेहतर तालमेल बनाना है। मंत्रालय ने नियमित अभ्यास, शरीर के संकेतों को समझना और यम-नियम का पालन करने पर ज़ोर दिया।
क्या रोज़ थोड़ा योग करना बेहतर है या एक दिन ज़्यादा?
आयुष मंत्रालय के अनुसार, प्रतिदिन अपनी सुविधा के अनुसार कुछ समय तक नियमित योग करना, एक ही दिन में घंटों अभ्यास करने से कहीं अधिक फायदेमंद है। निरंतरता और नियमितता ही योग का मूल सिद्धांत है।
सोशल मीडिया देखकर कठिन योगासन करना क्यों नुकसानदायक है?
हर व्यक्ति की शारीरिक संरचना और क्षमता अलग होती है। सोशल मीडिया पर दिखे आसन को बिना उचित तैयारी के दोहराने से चोट लग सकती है। मंत्रालय ने अपनी क्षमता से अधिक दबाव डालने से बचने की सलाह दी है।
योग में यम और नियम क्या होते हैं?
यम वे नैतिक सिद्धांत हैं जो दूसरों के प्रति उचित व्यवहार सिखाते हैं, जबकि नियम आत्म-अनुशासन, स्वच्छता और संतोष जैसे व्यक्तिगत गुणों को अपनाने की प्रेरणा देते हैं। आयुष मंत्रालय के अनुसार, ये दोनों पहलू योग को महज़ शारीरिक व्यायाम से आगे ले जाते हैं।
योग करते समय दर्द या असहजता हो तो क्या करें?
आयुष मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी आसन के दौरान दर्द या असहजता महसूस हो तो उसे नज़रअंदाज़ न करें और तुरंत रुकें। शरीर के संकेतों को पहचानना और उनका सम्मान करना योग अभ्यास का अहम हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
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