सऊदी अरब में मिसाइल-ड्रोन हमले: अमेरिकी दूतावास ने जारी की नई एडवाइजरी, गैर-आपातकालीन कर्मचारियों को देश छोड़ने का आदेश
सारांश
मुख्य बातें
रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास ने 30 अक्टूबर 2026 को सऊदी अरब में जारी मिसाइल और ड्रोन हमलों के मद्देनज़र एक नई सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है, जिसमें सभी गैर-आपातकालीन अमेरिकी सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों को सऊदी अरब छोड़ने का निर्देश दिया गया है। एडवाइजरी में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों को इन हमलों के लिए ज़िम्मेदार बताया गया है, जिन्होंने नागरिक हवाई अड्डों और ऊर्जा अवसंरचना को निशाना बनाया है।
हमलों का विवरण और पृष्ठभूमि
10 अक्टूबर और 25 अक्टूबर 2026 को रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट सहित विभिन्न ऊर्जा ठिकानों पर मिसाइल और मानवरहित हवाई वाहनों (यूएवी) से हमले किए गए थे। इन हमलों के कारण आम नागरिकों की जानें गई हैं और यात्रा व्यवस्था में गंभीर व्यवधान उत्पन्न हुआ है। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में क्षेत्रीय तनाव पहले से ही उच्च स्तर पर है।
गौरतलब है कि हूती विद्रोही यमन-सऊदी संघर्ष के दौरान वर्षों से सऊदी ठिकानों को निशाना बनाते रहे हैं, लेकिन हालिया हमलों की आवृत्ति और सटीकता ने अमेरिकी प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतने पर मजबूर किया है।
अमेरिकी मिशन की चेतावनी
एडवाइजरी के अनुसार, सऊदी अरब में तैनात अमेरिकी सरकारी कर्मचारियों को देश के किसी भी हवाई अड्डे का उपयोग करने से पहले मिशन प्रमुख से विशेष अनुमति लेना अनिवार्य किया गया है। अमेरिकी मिशन ने आशंका जताई है कि मौजूदा शत्रुता तेज़ी से बढ़ सकती है और इसका प्रभाव प्रभावित क्षेत्र की सीमाओं से आगे भी फैल सकता है।
अमेरिकी नागरिकों को आगाह किया गया है कि सऊदी अरब के हवाई अड्डों पर हमले, हवाई क्षेत्र बंद होने, उड़ानें रद्द होने और यात्रा में व्यवधान की आशंका बनी हुई है। यदि कोई नागरिक सऊदी हवाई अड्डे का उपयोग करने का निर्णय लेता है, तो उसे उड़ान की स्थिति की जानकारी सीधे संबंधित एयरलाइन और हवाई अड्डे से प्राप्त करने की सलाह दी गई है।
आम नागरिकों और यात्रियों पर असर
हवाई अड्डों पर हमलों के चलते अंतरराष्ट्रीय उड़ानें प्रभावित हो रही हैं, जिससे न केवल अमेरिकी बल्कि अन्य देशों के नागरिक और भारतीय प्रवासी कामगार भी सीधे प्रभावित हैं। सऊदी अरब में करीब 25 लाख भारतीय कार्यरत हैं, और ऐसी स्थिति में उनकी यात्रा व्यवस्था भी जोखिम में पड़ सकती है।
नागरिक ढांचे पर हमलों ने ऊर्जा आपूर्ति को लेकर भी वैश्विक बाज़ारों में चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि सऊदी अरब दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादकों में से एक है।
क्या होगा आगे
अमेरिकी मिशन ने स्पष्ट किया है कि स्थिति की निगरानी जारी है और ज़रूरत पड़ने पर नई एडवाइजरी जारी की जाएगी। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि हमलों की तीव्रता बढ़ती है, तो अन्य पश्चिमी देशों के दूतावास भी इसी तरह के कदम उठा सकते हैं। यह स्थिति पश्चिम एशिया में कूटनीतिक और सुरक्षा संतुलन के लिए आने वाले दिनों में कड़ी परीक्षा बन सकती है।