आईसीएआर-सीजीआईएआर साइंस एंड पार्टनरशिप वीक: अप्रैल 2027 में नई दिल्ली में जुटेंगे 100+ देशों के वैज्ञानिक
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और अंतरराष्ट्रीय कृषि अनुसंधान साझेदारी सीजीआईएआर संयुक्त रूप से अप्रैल 2027 में नई दिल्ली में 'आईसीएआर-सीजीआईएआर साइंस एंड पार्टनरशिप वीक' का आयोजन करने जा रहे हैं। इस सप्ताह भर चलने वाले कार्यक्रम में दुनिया के 100 से अधिक देशों के शोधकर्ता, किसान, सरकारी प्रतिनिधि, स्टार्टअप और व्यवसाय एकत्रित होंगे। यह मंच वैज्ञानिक ज्ञान, कृषि तकनीकों और बेहतरीन कार्यप्रणालियों के अंतरराष्ट्रीय आदान-प्रदान को नई गति देगा।
आयोजन का उद्देश्य और स्वरूप
आधिकारिक बयान के अनुसार, इस कार्यक्रम में विशेषज्ञ मिलकर उन नवाचारों पर विचार करेंगे जो पहले से ही किसानों तक पहुँच रहे हैं और यह भी तय करेंगे कि अधिक से अधिक किसानों तक पहुँच बनाने के लिए अभी कहाँ और काम करने की ज़रूरत है। गौरतलब है कि पहला सीजीआईएआर साइंस वीक अप्रैल 2025 में नैरोबी, केन्या में आयोजित हुआ था — यह भारत में इसका दूसरा संस्करण होगा।
सीजीआईएआर वर्तमान में 100 से अधिक देशों में सक्रिय 15 अनुसंधान केंद्रों का एक वैश्विक नेटवर्क है। इसके 10 अनुसंधान केंद्र भारत में फसलों, पानी, पशुधन, मछली, पोषण और नीति पर पहले से काम कर रहे हैं।
आईसीएआर प्रमुख का बयान
कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग (डेयर) के सचिव एवं आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एमएल जाट ने कहा कि हरित क्रांति के बाद से भारत के कृषि परिवर्तन में सीआईएमएमवाईटी, आईआरआरआई और आईसीआरआईएसएटी जैसे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के सहयोग ने देश की खाद्य उत्पादन क्षमताओं को सुदृढ़ किया है। उन्होंने कहा कि भारत, आयात पर निर्भर खाद्यान्न की कमी वाले देश से एक प्रमुख खाद्य उत्पादक और निर्यातक देश के रूप में उभरा है।
डॉ. जाट ने भारत की प्राथमिकताओं में दक्षिण-दक्षिण सहयोग को बढ़ावा देने और सफल कृषि नवाचारों को ग्लोबल साउथ, विशेष रूप से अफ्रीकी देशों के साथ साझा करने को प्रमुख बताया। उन्होंने जलवायु-लचीली कृषि, डिजिटल कृषि, एग्रीस्टैक, कृषि मशीनीकरण, मोटे अनाज, प्राकृतिक खेती और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बड़े अवसर वाले क्षेत्रों के रूप में रेखांकित किया।
सीजीआईएआर प्रमुख का नज़रिया
सीजीआईएआर की कार्यकारी प्रबंध निदेशक डॉ. इस्महाने एलोआफी ने कहा कि यह आयोजन दशकों पुरानी भारत-सीजीआईएआर साझेदारी की उपलब्धियों का जश्न मनाएगा और साथ ही अगले 50 वर्षों के कृषि सहयोग के लिए भविष्य का एजेंडा तैयार करेगा। उन्होंने कहा, 'भारत ने दिखाया है कि मज़बूत राष्ट्रीय विज्ञान बड़े पैमाने पर क्या हासिल कर सकता है। भारत के बीज और ज्ञान पहले से ही अफ्रीका और एशिया के किसानों की मदद कर रहे हैं।'
आईसीआरआईएसएटी की भूमिका
आईसीआरआईएसएटी के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने कहा कि खाद्यान्न की कमी वाले देश से एक प्रमुख खाद्य उत्पादक और निर्यातक देश तक भारत की कृषि यात्रा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी की परिवर्तनकारी शक्ति को दर्शाती है। यह ऐसे समय में आया है जब जलवायु परिवर्तन वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौतियाँ पेश कर रहा है।
आगे की राह
आईसीएआर दुनिया की सबसे बड़ी राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणालियों में से एक है और इसके वैज्ञानिक 50 से अधिक वर्षों से सीजीआईएआर के साथ काम कर रहे हैं। इस आयोजन से भारत वैश्विक कृषि विज्ञान में अपनी नेतृत्वकारी भूमिका को और मज़बूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाएगा।