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ड्राईलैंड कांग्रेस 2026: शुष्क भूमि कृषि के लिए मजबूत डेटा सिस्टम और दिल्ली घोषणा अपनाई गई

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ड्राईलैंड कांग्रेस 2026: शुष्क भूमि कृषि के लिए मजबूत डेटा सिस्टम और दिल्ली घोषणा अपनाई गई

सारांश

नई दिल्ली में तीन दिवसीय ड्राईलैंड कांग्रेस 2026 का समापन 'दिल्ली घोषणा (3डी)' को अपनाने के साथ हुआ। विशेषज्ञों ने शुष्क भूमि कृषि के लिए मजबूत डेटा सिस्टम, लिविंग लेबोरेटरीज और साउथ-साउथ सहयोग की जरूरत पर जोर दिया — जो वैश्विक खाद्य सुरक्षा की दृष्टि से एक अहम कदम है।

मुख्य बातें

ड्राईलैंड कांग्रेस 2026 का आयोजन 10 से 12 सितंबर 2026 के बीच नई दिल्ली में हुआ।
सम्मेलन का समापन ड्राइलैंड्स पर दिल्ली घोषणा (3डी) को अपनाने के साथ हुआ, जो वैश्विक दक्षिण में शुष्क भूमि कृषि सहयोग का साझा एजेंडा तय करती है।
जाट (महानिदेशक, आईसीएआर) ने आईसीएआर-एनआईएपी को शुष्क भूमि दूरदर्शिता कार्य का नेतृत्व सौंपने की माँग की।
हिमांशु पाठक (महानिदेशक, आईसीआरआईएसएटी) ने तीन दिनों की चर्चाओं को ठोस कार्रवाई में बदलने का आह्वान किया।
ग्लोबल क्रॉप डायवर्सिटी ट्रस्ट के साथ नए समझौतों की घोषणा और आईएसएससीए ग्लोबल अवार्ड्स 2026 प्रदान किए गए।

नई दिल्ली में 10 से 12 सितंबर 2026 के बीच आयोजित तीन दिवसीय ड्राईलैंड कांग्रेस 2026 के समापन पर सरकारी अधिकारियों और कृषि विशेषज्ञों ने शुष्क भूमि कृषि-खाद्य प्रणालियों के लिए मजबूत डेटा और सूचना प्रणालियों की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया। सम्मेलन का समापन ड्राइलैंड्स पर दिल्ली घोषणा (3डी) को अपनाने के साथ हुआ, जो वैश्विक दक्षिण में शुष्क भूमि कृषि को बदलने का साझा एजेंडा प्रस्तुत करती है।

मुख्य घटनाक्रम

कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार, सम्मेलन का अंतिम दिन संयुक्त राष्ट्र साउथ-साउथ सहयोग दिवस के साथ मेल खाता था। विशेषज्ञों ने साझा इनोवेशन प्लेटफॉर्म अथवा लिविंग लेबोरेटरीज विकसित करने की आवश्यकता जताई, जो शोध को व्यावहारिक क्रियान्वयन और नीति-निर्माण से सीधे जोड़ सकें। इसके अलावा, शुष्क भूमि कृषि समाधानों में तेजी लाने के लिए साउथ-साउथ और त्रिकोणीय सहयोग को मजबूत करने का आह्वान किया गया।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

डेयर (DARE) के सचिव और आईसीएआर (ICAR) के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट ने शुष्क भूमि कृषि पर प्रयासों के केंद्र में दूरदर्शिता लाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आईसीएआर-राष्ट्रीय कृषि अर्थशास्त्र और नीति अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-एनआईएपी) को शुष्क भूमि कृषि पर दूरदर्शिता कार्य का नेतृत्व करने के लिए अधिकृत किया जाना चाहिए।

आईसीआरआईएसएटी (अंतर्राष्ट्रीय अर्ध-शुष्क उष्णकटिबंधीय फसल अनुसंधान संस्थान) के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए शुष्क भूमि के रणनीतिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि तीन दिनों की चर्चाओं को ठोस कार्रवाई में बदलना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विचारों से अवधारणाओं और अवधारणाओं से ठोस कार्यान्वयन की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत है।

दिल्ली घोषणा का महत्व

ड्राइलैंड्स पर दिल्ली घोषणा (3डी) वैश्विक दक्षिण में सहयोग, ज्ञान आदान-प्रदान, नवाचार और सामूहिक कार्रवाई के माध्यम से शुष्क भूमि कृषि को रूपांतरित करने के लिए एक साझा एजेंडा निर्धारित करती है। यह ऐसे समय में आया है जब जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया भर में शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में कृषि उत्पादकता पर दबाव बढ़ता जा रहा है। गौरतलब है कि भारत में कृषि योग्य भूमि का एक बड़ा हिस्सा अनिश्चित वर्षा पर निर्भर शुष्क क्षेत्रों में पड़ता है।

सम्मेलन के प्रमुख परिणाम

कांग्रेस के सह-अध्यक्ष डॉ. डी.के. यादव, डीडीजी (फसल विज्ञान), आईसीएआर और डॉ. स्टैनफोर्ड ब्लेड, डीडीजी (रिसर्च एंड इनोवेशन), आईसीआरआईएसएटी ने तीन दिवसीय विचार-विमर्श का सारांश प्रस्तुत किया और सम्मेलन की प्रमुख सिफारिशों पर प्रकाश डाला। सम्मेलन में ग्लोबल क्रॉप डायवर्सिटी ट्रस्ट के साथ नए समझौतों और सहमति पत्रों की घोषणा भी की गई।

इस अवसर पर आईएसएससीए ग्लोबल अवार्ड्स 2026 भी प्रदान किए गए, जो ग्लोबल साउथ के संस्थानों से सिद्ध कृषि नवाचारों को मान्यता देने की एक वार्षिक प्रमुख पहल है — विशेष रूप से उन नवाचारों को जिनमें विस्तार और अंतर-देशीय अनुकूलन की क्षमता हो।

आगे की राह

विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली घोषणा को केवल एक दस्तावेज़ के रूप में नहीं, बल्कि एक क्रियाशील रोडमैप के रूप में लागू करने की आवश्यकता है। अल्पकालिक और दीर्घकालिक कार्रवाइयों में प्राथमिकता तय करते हुए संस्थागत तंत्र को सुदृढ़ बनाना इस दिशा में पहला ठोस कदम होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इसे क्रियान्वयन योग्य नीति में कैसे बदला जाएगा। भारत में शुष्क भूमि कृषि पर अनेक सम्मेलन हो चुके हैं, फिर भी किसान-स्तर तक डेटा और नवाचार की पहुँच सीमित रही है। आईसीएआर-एनआईएपी को दूरदर्शिता कार्य सौंपने का प्रस्ताव सराहनीय है, परंतु संस्थागत अधिकार और बजटीय प्रतिबद्धता के बिना यह भी एक और घोषणा बनकर रह सकती है। साउथ-साउथ सहयोग तभी कारगर होगा जब ज्ञान का प्रवाह द्विपक्षीय हो और स्थानीय कृषि परिस्थितियों के अनुरूप अनुकूलित किया जाए।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ड्राईलैंड कांग्रेस 2026 क्या है और यह कहाँ आयोजित हुई?
ड्राईलैंड कांग्रेस 2026 एक तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन था जो 10 से 12 सितंबर 2026 के बीच नई दिल्ली में आयोजित हुआ। इसमें सरकारी अधिकारियों, कृषि वैज्ञानिकों और अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों के विशेषज्ञों ने शुष्क भूमि कृषि-खाद्य प्रणालियों के समाधान पर विचार-विमर्श किया।
दिल्ली घोषणा (3डी) क्या है?
दिल्ली घोषणा (3डी) ड्राईलैंड कांग्रेस 2026 के समापन पर अपनाया गया एक साझा एजेंडा दस्तावेज़ है। यह वैश्विक दक्षिण में सहयोग, ज्ञान आदान-प्रदान, नवाचार और सामूहिक कार्रवाई के माध्यम से शुष्क भूमि कृषि को रूपांतरित करने की दिशा में प्रतिबद्धता व्यक्त करता है।
शुष्क भूमि कृषि के लिए डेटा सिस्टम की जरूरत क्यों है?
विशेषज्ञों के अनुसार, शुष्क भूमि क्षेत्रों में कृषि उत्पादकता को बेहतर बनाने के लिए सटीक और अद्यतन डेटा आवश्यक है। मजबूत डेटा सिस्टम के अभाव में नीति-निर्माण और नवाचार का लाभ किसानों तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुँच पाता, जिससे वैश्विक खाद्य सुरक्षा प्रभावित होती है।
आईसीएआर-एनआईएपी की इस सम्मेलन में क्या भूमिका बताई गई?
डेयर सचिव और आईसीएआर महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट ने कहा कि आईसीएआर-राष्ट्रीय कृषि अर्थशास्त्र और नीति अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-एनआईएपी) को शुष्क भूमि कृषि पर दूरदर्शिता कार्य का नेतृत्व करने के लिए अधिकृत किया जाना चाहिए। यह एक मजबूत संस्थागत तंत्र की माँग का हिस्सा था।
आईएसएससीए ग्लोबल अवार्ड्स 2026 किसे और क्यों दिए गए?
आईएसएससीए ग्लोबल अवार्ड्स 2026 ग्लोबल साउथ के उन संस्थानों को दिए गए जिन्होंने सिद्ध कृषि नवाचार विकसित किए हैं जिनमें विस्तार और अंतर-देशीय अनुकूलन की मजबूत क्षमता है। यह एक वार्षिक पहल है जो कृषि नवाचार को पहचान और प्रोत्साहन देती है।
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