26 जून 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

आइसलैंड में भारतीय आमों का पहला प्रसार कार्यक्रम, दशहरी-केसर से जीता दिल

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
आइसलैंड में भारतीय आमों का पहला प्रसार कार्यक्रम, दशहरी-केसर से जीता दिल

सारांश

भारत ने पहली बार आइसलैंड में आम प्रसार कार्यक्रम आयोजित कर दशहरी, चौसा, लंगड़ा और केसर किस्मों का स्वाद चखाया। आइसलैंड का ₹27.5 करोड़ का आम बाज़ार अभी थाईलैंड-ब्राज़ील के कब्ज़े में है — भारत के लिए यह सेंध लगाने का पहला ठोस कदम है।

मुख्य बातें

24 और 25 जून 2026 को रेक्याविक और अक्यूरेरी में भारत का पहला आम प्रसार कार्यक्रम आयोजित हुआ।
एपीडा और भारतीय दूतावास के सहयोग से दशहरी, चौसा, लंगड़ा और केसर किस्मों को प्रदर्शित किया गया।
आइसलैंड ने 2025 में 33 लाख अमेरिकी डॉलर मूल्य के आमों का आयात किया, जिसमें 10 लाख डॉलर अकेले थाईलैंड से।
आइसलैंड ट्रेड फेडरेशन के महासचिव ओलाफुर स्टीफेंसन ने भारतीय आमों के आयात की संभावनाओं को उत्साहजनक बताया।
भारत–ईएफटीए टीईपीए के तहत आइसलैंड में भारतीय आमों के आयात को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

भारत ने 24 और 25 जून 2026 को यूरोपीय देश आइसलैंड में पहली बार भारतीय आम प्रसार कार्यक्रम का सफल आयोजन किया, जिसका उद्देश्य भारतीय आमों के निर्यात को नए बाज़ारों तक पहुँचाना है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने 26 जून 2026 को इस आयोजन की जानकारी सार्वजनिक की।

कार्यक्रम का विवरण

आइसलैंड की राजधानी रेक्याविक स्थित भारतीय दूतावास ने कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के सहयोग से यह दो-दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया। 24 जून को रेक्याविक और 25 जून को उत्तरी आइसलैंड के अक्यूरेरी में कार्यक्रम हुए।

कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों को भारतीय आमों की चार प्रमुख किस्मों — दशहरी, चौसा, लंगड़ा और केसर — का स्वाद चखाया गया। उपस्थित लोगों ने इन आमों के स्वाद, सुगंध और गुणवत्ता की भरपूर प्रशंसा की।

राजदूत और आइसलैंडी अधिकारियों की प्रतिक्रिया

भारत के राजदूत आर. रवीन्द्र ने भारत की विश्व-प्रसिद्ध आम किस्मों की विशिष्टताओं पर प्रकाश डाला और आइसलैंड में भारतीय आमों के निर्यात विस्तार की संभावनाओं पर बल दिया।

आइसलैंड ट्रेड फेडरेशन के महासचिव ओलाफुर स्टीफेंसन ने कहा कि आइसलैंड के कारोबारी समुदाय में भारत के प्रति रुचि लगातार बढ़ रही है और भारतीय कृषि उत्पादों, विशेषकर आमों के आयात की संभावनाएँ बेहद उत्साहजनक हैं।

आइसलैंड के विदेश मंत्रालय में व्यापार समझौता निदेशक स्वेन के. एइनार्सन ने भारत–ईएफटीए व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते (टीईपीए) के तहत आइसलैंड में भारतीय आमों के आयात को बढ़ावा मिलने की संभावनाओं पर विचार साझा किए।

आइसलैंड का मौजूदा आम बाज़ार

मंत्रालय के अनुसार, वर्तमान में आइसलैंड मुख्य रूप से थाईलैंड, ब्राज़ील, कंबोडिया, घाना और पेरू से आमों का आयात करता है। वर्ष 2025 में आइसलैंड ने लगभग ₹27.5 करोड़ (33 लाख अमेरिकी डॉलर) मूल्य के आमों का आयात किया, जिसमें से लगभग 10 लाख अमेरिकी डॉलर मूल्य के आम अकेले थाईलैंड से आए।

भारतीय मिशन द्वारा स्थानीय उपभोक्ताओं से बातचीत में पता चला कि आइसलैंड के लोग आम काफी पसंद करते हैं और इन्हें विशेष रूप से स्मूदी, मिष्ठान और फ्रूट सलाद में उपयोग करते हैं। वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं की सीमित उपलब्धता भारत के लिए एक स्पष्ट अवसर प्रस्तुत करती है।

आर्थिक और कूटनीतिक महत्व

यह आयोजन भारत और आइसलैंड के बीच व्यावसायिक संबंधों को मज़बूत करने तथा कृषि निर्यात को नई दिशा देने की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण कदम है। भारत–ईएफटीए टीईपीए के ढाँचे में यह कार्यक्रम भारतीय कृषि उत्पादों के यूरोपीय बाज़ारों में प्रवेश को और सुगम बना सकता है।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक स्तर पर अपने कृषि निर्यात को विविधता देने की रणनीति पर काम कर रहा है और नए गैर-पारंपरिक बाज़ारों की तलाश में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह कार्यक्रम एक बड़ी रणनीतिक सोच का हिस्सा है — उन गैर-पारंपरिक बाज़ारों में पैठ बनाना जहाँ भारतीय प्रतिस्पर्धा अभी नगण्य है। असली सवाल यह है कि क्या एपीडा इस रुचि को नियमित आपूर्ति श्रृंखला में बदल पाएगा, क्योंकि भारतीय आम का निर्यात मौसमी और लॉजिस्टिक चुनौतियों से अब भी जूझता है। थाईलैंड और ब्राज़ील की मज़बूत पकड़ को तोड़ने के लिए केवल स्वाद-परीक्षण काफी नहीं — प्रतिस्पर्धी मूल्य, नियमित आपूर्ति और यूरोपीय खाद्य मानकों का अनुपालन अनिवार्य होगा।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आइसलैंड में भारतीय आम प्रसार कार्यक्रम क्या था?
यह 24 और 25 जून 2026 को आइसलैंड के रेक्याविक और अक्यूरेरी में आयोजित भारत का पहला आम प्रसार कार्यक्रम था, जिसे भारतीय दूतावास और एपीडा ने संयुक्त रूप से आयोजित किया। इसमें दशहरी, चौसा, लंगड़ा और केसर किस्मों को प्रदर्शित किया गया।
आइसलैंड में भारतीय आमों की क्या संभावनाएँ हैं?
आइसलैंड ने 2025 में 33 लाख अमेरिकी डॉलर मूल्य के आमों का आयात किया, जो मुख्यतः थाईलैंड, ब्राज़ील और अन्य देशों से आए। स्थानीय उपभोक्ताओं में आम की खपत स्मूदी, मिष्ठान और फ्रूट सलाद में अच्छी है, जो भारतीय आमों के लिए एक स्पष्ट बाज़ार अवसर प्रस्तुत करती है।
भारत–ईएफटीए टीईपीए का आम निर्यात से क्या संबंध है?
भारत–ईएफटीए व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौता (टीईपीए) आइसलैंड सहित ईएफटीए देशों के साथ व्यापार को सुगम बनाने का ढाँचा प्रदान करता है। आइसलैंड के विदेश मंत्रालय के व्यापार निदेशक स्वेन के. एइनार्सन ने कहा कि टीईपीए के माध्यम से भारतीय आमों के आयात को और बढ़ावा मिल सकता है।
आइसलैंड अभी किन देशों से आम आयात करता है?
आइसलैंड मुख्य रूप से थाईलैंड, ब्राज़ील, कंबोडिया, घाना और पेरू से आम आयात करता है। 2025 में थाईलैंड की हिस्सेदारी अकेले 10 लाख अमेरिकी डॉलर थी, जो कुल आयात के एक-तिहाई से अधिक है।
इस कार्यक्रम में कौन-सी भारतीय आम किस्में पेश की गईं?
कार्यक्रम में दशहरी, चौसा, लंगड़ा और केसर — भारत की चार प्रमुख आम किस्मों — का स्वाद चखाया गया। उपस्थित अतिथियों ने इनके स्वाद, सुगंध और गुणवत्ता की विशेष प्रशंसा की।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 3 सप्ताह पहले
  4. 3 सप्ताह पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 5 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले