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भोपाल से स्विट्जरलैंड पहुँची फ्लेवर्ड आइस्ड टी की पहली खेप, पीयूष गोयल ने बताया एमएसएमई की वैश्विक छलांग

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भोपाल से स्विट्जरलैंड पहुँची फ्लेवर्ड आइस्ड टी की पहली खेप, पीयूष गोयल ने बताया एमएसएमई की वैश्विक छलांग

सारांश

भोपाल से स्विट्जरलैंड भेजी गई फ्लेवर्ड आइस्ड टी प्रीमिक्स की पहली खेप भारतीय एमएसएमई की वैश्विक छलांग का प्रतीक है। एक दशक में चाय निर्यात ₹4,509 करोड़ से बढ़कर ₹8,719 करोड़ — यानी 93% की बढ़ोतरी — यह बताती है कि भारत अब कच्चे माल से आगे बढ़कर मूल्य-संवर्धित उत्पादों के निर्यातक के रूप में उभर रहा है।

मुख्य बातें

भोपाल से स्विट्जरलैंड के लिए फ्लेवर्ड आइस्ड टी प्रीमिक्स की पहली निर्यात खेप 23 मई 2026 को रवाना हुई।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने इसे भारतीय एमएसएमई की वैश्विक गुणवत्ता मानकों पर पहचान का प्रमाण बताया।
यह निर्यात APEDA के सहयोग से संभव हुआ, जो मध्यप्रदेश के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए नई उपलब्धि है।
भारत का चाय निर्यात वित्त वर्ष 2013-14 के ₹4,509 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में ₹8,719 करोड़ हो गया — 93% की वृद्धि।
गोयल ने अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस पर दार्जिलिंग, असम और नीलगिरि की चाय विरासत को वैश्विक पहचान का आधार बताया।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार, 23 मई 2026 को बताया कि भोपाल से स्विट्जरलैंड के लिए फ्लेवर्ड आइस्ड टी प्रीमिक्स की पहली निर्यात खेप सफलतापूर्वक भेजी गई है। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि भारत के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) अब वैश्विक गुणवत्ता और स्वाद के मानकों पर अपनी ठोस पहचान दर्ज करा रहे हैं।

मुख्य घटनाक्रम

गोयल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी पोस्ट में लिखा, 'भोपाल से स्विट्जरलैंड भेजी गई फ्लेवर्ड आइस्ड टी प्रीमिक्स की पहली निर्यात खेप, इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि भारत के एमएसएमई अब वैश्विक गुणवत्ता और स्वाद के मानकों पर अपनी मजबूत पहचान बना रहे हैं।' यह निर्यात कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के सहयोग से संभव हुआ है।

गोयल के अनुसार, यह उपलब्धि मध्यप्रदेश के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को नई दिशा देगी और नवाचार, मूल्य संवर्धन तथा निर्यात-आधारित विकास को प्रोत्साहित करेगी।

भारतीय चाय निर्यात की बढ़ती ताकत

गौरतलब है कि भारत के चाय निर्यात में पिछले एक दशक में 93 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2013-14 में जहाँ यह निर्यात ₹4,509 करोड़ था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर ₹8,719 करोड़ हो गया है। यह आँकड़ा भारतीय चाय उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को रेखांकित करता है।

अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस पर विशेष संदेश

अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस के अवसर पर गोयल ने चाय को महज एक पेय नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा बताया। उन्होंने कहा, 'चाय एक एहसास है। पूरे भारत में, चाय महज एक पेय नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी, बातचीत और परंपराओं का एक अहम हिस्सा है।'

मंत्री ने दार्जिलिंग की पहाड़ियों, असम की घाटियों और नीलगिरि के बागानों का उल्लेख करते हुए कहा कि हर क्षेत्र की चाय अपने अनूठे स्वाद और सुगंध के साथ वैश्विक बाजार में भारत की विरासत को प्रस्तुत करती है।

एमएसएमई और निर्यात नीति का संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार एमएसएमई को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं से जोड़ने पर विशेष जोर दे रही है। APEDA के माध्यम से खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को मिला यह प्रोत्साहन मध्यप्रदेश जैसे राज्यों के लिए निर्यात-आधारित विकास का नया रास्ता खोल सकता है। चाय बोर्ड की लगातार कोशिशों के चलते भारतीय चाय की गुणवत्ता के मानक वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त कर रहे हैं।

आगे की राह

भोपाल से शुरू हुई यह पहली खेप भविष्य में और बड़े निर्यात अनुबंधों की नींव रख सकती है। रिपोर्टों के अनुसार, खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में इस तरह के मूल्य-संवर्धित उत्पादों की यूरोपीय बाजारों में बढ़ती माँग को देखते हुए अन्य एमएसएमई इकाइयाँ भी इस मॉडल को अपना सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह एकल उपलब्धि एमएसएमई के लिए टिकाऊ निर्यात मॉडल में बदल पाएगी। भारत का चाय निर्यात एक दशक में 93% बढ़ा, परंतु यह वृद्धि मुख्यतः पारंपरिक थोक चाय पर आधारित रही है — मूल्य-संवर्धित उत्पादों की हिस्सेदारी अभी भी सीमित है। APEDA की साझेदारी सही दिशा में है, पर यूरोपीय बाजारों में खाद्य सुरक्षा मानकों की कठोरता को देखते हुए, एमएसएमई इकाइयों की दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए निरंतर गुणवत्ता निगरानी और संस्थागत समर्थन अनिवार्य होगा।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भोपाल से स्विट्जरलैंड भेजी गई फ्लेवर्ड आइस्ड टी प्रीमिक्स की खेप क्या है?
यह मध्यप्रदेश के भोपाल से स्विट्जरलैंड के लिए भेजी गई फ्लेवर्ड आइस्ड टी प्रीमिक्स की पहली निर्यात खेप है, जो APEDA के सहयोग से संभव हुई। इसे भारतीय एमएसएमई की वैश्विक गुणवत्ता मानकों पर बढ़ती पकड़ का प्रतीक माना जा रहा है।
पीयूष गोयल ने इस निर्यात के बारे में क्या कहा?
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह खेप इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि भारत के एमएसएमई अब वैश्विक गुणवत्ता और स्वाद के मानकों पर अपनी मजबूत पहचान बना रहे हैं। उन्होंने इसे नवाचार, मूल्य संवर्धन और निर्यात-आधारित विकास की नई दिशा बताया।
भारत के चाय निर्यात में कितनी वृद्धि हुई है?
भारत का चाय निर्यात वित्त वर्ष 2013-14 के ₹4,509 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में ₹8,719 करोड़ हो गया है, यानी एक दशक में 93% की वृद्धि। यह आँकड़ा भारतीय चाय की वैश्विक माँग में हो रही मजबूत बढ़ोतरी को दर्शाता है।
APEDA की इस निर्यात में क्या भूमिका है?
कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने इस निर्यात खेप को सुगम बनाने में सहयोग किया। APEDA मध्यप्रदेश के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को वैश्विक बाजारों से जोड़ने के प्रयासों का हिस्सा है।
यह निर्यात मध्यप्रदेश के एमएसएमई के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
भोपाल से शुरू हुई यह पहली खेप मध्यप्रदेश के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए यूरोपीय बाजारों में प्रवेश का द्वार खोलती है। मूल्य-संवर्धित उत्पादों के निर्यात से राज्य के एमएसएमई को बेहतर मुनाफा और वैश्विक पहचान मिलने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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