भोपाल से स्विट्जरलैंड पहुँची फ्लेवर्ड आइस्ड टी की पहली खेप, पीयूष गोयल ने बताया एमएसएमई की वैश्विक छलांग
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार, 23 मई 2026 को बताया कि भोपाल से स्विट्जरलैंड के लिए फ्लेवर्ड आइस्ड टी प्रीमिक्स की पहली निर्यात खेप सफलतापूर्वक भेजी गई है। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि भारत के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) अब वैश्विक गुणवत्ता और स्वाद के मानकों पर अपनी ठोस पहचान दर्ज करा रहे हैं।
मुख्य घटनाक्रम
गोयल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी पोस्ट में लिखा, 'भोपाल से स्विट्जरलैंड भेजी गई फ्लेवर्ड आइस्ड टी प्रीमिक्स की पहली निर्यात खेप, इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि भारत के एमएसएमई अब वैश्विक गुणवत्ता और स्वाद के मानकों पर अपनी मजबूत पहचान बना रहे हैं।' यह निर्यात कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के सहयोग से संभव हुआ है।
गोयल के अनुसार, यह उपलब्धि मध्यप्रदेश के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को नई दिशा देगी और नवाचार, मूल्य संवर्धन तथा निर्यात-आधारित विकास को प्रोत्साहित करेगी।
भारतीय चाय निर्यात की बढ़ती ताकत
गौरतलब है कि भारत के चाय निर्यात में पिछले एक दशक में 93 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2013-14 में जहाँ यह निर्यात ₹4,509 करोड़ था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर ₹8,719 करोड़ हो गया है। यह आँकड़ा भारतीय चाय उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को रेखांकित करता है।
अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस पर विशेष संदेश
अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस के अवसर पर गोयल ने चाय को महज एक पेय नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा बताया। उन्होंने कहा, 'चाय एक एहसास है। पूरे भारत में, चाय महज एक पेय नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी, बातचीत और परंपराओं का एक अहम हिस्सा है।'
मंत्री ने दार्जिलिंग की पहाड़ियों, असम की घाटियों और नीलगिरि के बागानों का उल्लेख करते हुए कहा कि हर क्षेत्र की चाय अपने अनूठे स्वाद और सुगंध के साथ वैश्विक बाजार में भारत की विरासत को प्रस्तुत करती है।
एमएसएमई और निर्यात नीति का संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार एमएसएमई को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं से जोड़ने पर विशेष जोर दे रही है। APEDA के माध्यम से खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को मिला यह प्रोत्साहन मध्यप्रदेश जैसे राज्यों के लिए निर्यात-आधारित विकास का नया रास्ता खोल सकता है। चाय बोर्ड की लगातार कोशिशों के चलते भारतीय चाय की गुणवत्ता के मानक वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त कर रहे हैं।
आगे की राह
भोपाल से शुरू हुई यह पहली खेप भविष्य में और बड़े निर्यात अनुबंधों की नींव रख सकती है। रिपोर्टों के अनुसार, खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में इस तरह के मूल्य-संवर्धित उत्पादों की यूरोपीय बाजारों में बढ़ती माँग को देखते हुए अन्य एमएसएमई इकाइयाँ भी इस मॉडल को अपना सकती हैं।