आईसीएआर के 98वें स्थापना दिवस पर 386 नई फसल किस्में जारी, 94% जलवायु-अनुकूल
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार, 16 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के 98वें स्थापना दिवस समारोह में घोषणा की कि परिषद ने पिछले एक वर्ष में 44 फसलों की 386 नई और उन्नत किस्में विकसित की हैं। इनमें से 94 प्रतिशत किस्में जलवायु-अनुकूल हैं और 29 किस्में बायो-फोर्टिफाइड श्रेणी में आती हैं, जो पोषण सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।
समारोह में क्या जारी हुआ
स्थापना दिवस के अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने 43 नई उन्नत फसल किस्मों, 17 कृषि तकनीकों और 14 प्रकाशनों का औपचारिक विमोचन किया। इसके साथ ही 51 उद्योग भागीदारों के साथ 72 समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए, जिनका उद्देश्य आईसीएआर की तकनीकों का व्यावसायीकरण करना और उन्हें किसानों तक 'लास्ट-माइल डिलीवरी' के ज़रिए तेज़ी से पहुँचाना है।
समारोह में 150 अस्थायी दैनिक मज़दूरों को नियुक्ति पत्र भी सौंपे गए, जिससे उनकी सेवाएँ नियमित श्रेणी में आ गईं।
नई तकनीकों की मुख्य झलकियाँ
इस बार जारी तकनीकों में कई उल्लेखनीय उपलब्धियाँ शामिल हैं। बासमती चावल की उन्नत किस्मों के अलावा, खारी और क्षारीय मिट्टी में उगाई जा सकने वाली जलवायु-अनुकूल धान की किस्में विकसित की गई हैं — जो देश के उन लाखों किसानों के लिए राहत की बात है जो भूमि-क्षरण की समस्या से जूझ रहे हैं।
इसके अतिरिक्त, आम के निर्यात के लिए नई उत्पादन तकनीक, भारत का पहला स्वदेशी अफ्रीकन स्वाइन फीवर टीका, एक डिजिटल स्वाइन डिजीज एटलस और छोटे किसानों के लिए कम लागत वाला कसावा हार्वेस्टर भी इस वर्ष की उपलब्धियों में शामिल हैं। अफ्रीकन स्वाइन फीवर के स्वदेशी टीके का विकास विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह बीमारी पशुपालन क्षेत्र के लिए गंभीर खतरा रही है।
मंत्री की प्राथमिकताएँ और आईसीएआर की भूमिका
शिवराज सिंह चौहान ने अपने संबोधन में जलवायु-अनुकूल खेती, दालों और तिलहन में आत्मनिर्भरता, बेहतर कृषि शिक्षा और कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) नेटवर्क के माध्यम से नवाचारों को व्यापक स्तर पर फैलाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने आईसीएआर को भारतीय कृषि क्षेत्र में परिवर्तन लाने वाला प्रमुख संस्थान बताते हुए कहा कि परिषद के वैज्ञानिकों के शोध और नवाचारों ने अनाज, बागवानी, दूध और मछली उत्पादन में देश की रिकॉर्ड उपलब्धियों में अहम भूमिका निभाई है।
कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग के सचिव एवं आईसीएआर के महानिदेशक एम.एल. जाट ने 2025-26 के दौरान परिषद की प्रमुख उपलब्धियों का ब्यौरा प्रस्तुत किया और भविष्य की रणनीति साझा की।
मत्स्य पालन मंत्री का आह्वान
केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह ने भी समारोह को संबोधित किया। उन्होंने केवीके नेटवर्क के माध्यम से शोध-तकनीकों की पहुँच बढ़ाने का आह्वान किया ताकि प्रयोगशालाओं में विकसित नवाचार किसानों, पशुपालकों और मछुआरों तक शीघ्र पहुँच सकें। उन्होंने यह भरोसा भी जताया कि पशुपालन और डेयरी विभाग तथा आईसीएआर के बीच हस्ताक्षरित एमओयू 'विकसित भारत' के लक्ष्य को साकार करने में सहायक होगा।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब भारत जलवायु परिवर्तन के दबाव, बढ़ती खाद्य माँग और कृषि उत्पादकता की चुनौतियों से एक साथ जूझ रहा है। गौरतलब है कि आईसीएआर के 72 एमओयू और उद्योग भागीदारी का यह विस्तार प्रयोगशाला से खेत तक की दूरी को पाटने की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है। आने वाले महीनों में इन तकनीकों के ज़मीनी क्रियान्वयन पर सबकी नज़रें टिकी रहेंगी।