सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस में राहत के लिए आयुष मंत्रालय ने बताए 6 कारगर योगासन
सारांश
मुख्य बातें
आयुष मंत्रालय ने 21 मई 2026 को सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस से पीड़ित लोगों के लिए छह विशेष योगासनों की सूची जारी की है, जो गर्दन की अकड़न, दर्द और सीमित गतिशीलता को दूर करने में सहायक बताए गए हैं। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस में लगभग एक महीना शेष रहते मंत्रालय का यह कदम उसके व्यापक जागरूकता अभियान का हिस्सा है, जिसका केंद्रीय संदेश है — 'योग-युक्त रहें, रोग-मुक्त रहें'।
समस्या की जड़: स्क्रीन और गलत मुद्रा
आयुष मंत्रालय के अनुसार, आधुनिक जीवनशैली में स्क्रीन के सामने लंबे समय तक झुके रहना और गलत मुद्रा में बैठना सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस का प्रमुख कारण बन चुका है। यह समस्या केवल गर्दन के दर्द तक सीमित नहीं रहती — यह धीरे-धीरे गतिशीलता को कम करती है, रोज़मर्रा के साधारण कार्यों को कठिन बनाती है और ऊपरी पीठ तथा गर्दन की मांसपेशियों को कमज़ोर कर देती है। दीर्घकालिक रूप से यह अंदरूनी तनाव भी बढ़ाती है।
योग क्यों है प्रभावी समाधान
योग विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित योगाभ्यास इस स्थिति का प्राकृतिक और टिकाऊ उपाय है। योगासन रीढ़ की हड्डी के जोड़ों को लचीला बनाते हैं, मांसपेशियों की अकड़न को दूर करते हैं और गर्दन व ऊपरी पीठ को मज़बूती प्रदान करते हैं। मंत्रालय का कहना है कि इन आसनों के नियमित अभ्यास से न केवल शारीरिक दर्द, बल्कि मानसिक तनाव में भी उल्लेखनीय कमी आती है।
मंत्रालय द्वारा अनुशंसित 6 योगासन
अर्ध मत्स्येंद्रासन रीढ़ को घुमाकर गर्दन और पीठ की अकड़न को दूर करता है। उष्ट्रासन छाती को खोलता है और गर्दन व कंधों की जकड़न को कम करता है। ताड़ासन शरीर की मुद्रा को सुधारता है और रीढ़ को मज़बूती देता है। अर्ध चक्रासन कमर के साथ-साथ गर्दन के लचीलेपन को भी बढ़ाता है। भुजंगासन पीठ की मांसपेशियों को सुदृढ़ करता है और दर्द से राहत दिलाता है। अंत में, मार्जरीआसन रीढ़ की हड्डी को पूरी तरह लचीला बनाकर तनाव मुक्त करने में विशेष रूप से कारगर है।
आम जनता पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब शहरी भारत में वर्क-फ्रॉम-होम और लंबे समय तक लैपटॉप-मोबाइल उपयोग के चलते सर्वाइकल संबंधी शिकायतें तेज़ी से बढ़ी हैं। आयुष मंत्रालय ने नागरिकों से इन आसनों को अपनी दैनिक दिनचर्या में शामिल करने की अपील की है। मंत्रालय के अनुसार, इन आसनों का नियमित अभ्यास सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस को नियंत्रित करने और गतिशीलता पुनः प्राप्त करने में सहायक है।
योग दिवस की तैयारी
21 जून को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले मंत्रालय इस तरह के जागरूकता संदेश लगातार जारी कर रहा है। आने वाले हफ्तों में विभिन्न स्वास्थ्य स्थितियों के लिए और अधिक योग-आधारित दिशा-निर्देश जारी किए जाने की संभावना है।