मोदी की पांच देशों की यात्रा से भारत की वैश्विक साझेदारी मजबूत: अमित मालवीय
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की पाँच देशों की हालिया यात्रा को भारत की कूटनीतिक गतिविधियों में एक निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रभारी अमित मालवीय ने कहा कि इस दौरे ने भारत को रणनीतिक, आर्थिक, तकनीकी और भू-राजनीतिक — चारों मोर्चों पर मजबूती दी है। उनके अनुसार, यह यात्रा हाल के वर्षों की सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहलों में से एक है।
मालवीय का आकलन: भारत अब 'अनिवार्य वैश्विक शक्ति'
अमित मालवीय ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत अब केवल एक बड़ा बाज़ार नहीं रहा, बल्कि उसे एक भरोसेमंद, प्रभावशाली और अनिवार्य वैश्विक शक्ति के रूप में पहचाना जाने लगा है। उनका कहना है कि यह दौरा ऐसे समय में हुआ जब दुनिया मध्य पूर्व में संघर्ष, सप्लाई चेन में व्यवधान और बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियों से जूझ रही है।
मालवीय के अनुसार, इन परिस्थितियों में भारत ने स्वयं को एक स्थिरता प्रदान करने वाले और भरोसेमंद वैश्विक साझेदार के रूप में स्थापित किया है — जो इस यात्रा का सबसे बड़ा कूटनीतिक संदेश है।
यूएई: ऊर्जा सुरक्षा और स्थानीय मुद्रा व्यापार
यूएई में इस यात्रा के दौरान कच्चे तेल, एलएनजी और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारों को लेकर सहयोग और गहरा हुआ। मालवीय ने बताया कि इससे वैश्विक अस्थिरता के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को ठोस आधार मिला है। इस समझौते के तहत यूएई की भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार में भागीदारी बढ़ी है और स्थानीय मुद्रा में द्विपक्षीय व्यापार को भी प्रोत्साहन मिला है।
यूरोपीय देशों में तकनीक और रक्षा साझेदारी
नीदरलैंड में संबंधों को और प्रगाढ़ करते हुए सेमीकंडक्टर, चिप निर्माण इकोसिस्टम और साइबर सुरक्षा जैसे भविष्य के तकनीकी क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया। स्वीडन भारत के डिजिटल परिवर्तन में एक प्रमुख साझेदार के रूप में उभरा है, जहाँ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, 6जी टेलीकॉम रिसर्च और आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।
विदेश मंत्रालय ने भी पुष्टि की कि इन देशों के साथ ऐसे ठोस परिणाम सामने आए हैं, जो भारत को उन्नत यूरोपीय तकनीक और मैन्युफैक्चरिंग प्रणालियों से गहराई से जोड़ेंगे। नॉर्वे में आयोजित भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में ग्रीन शिपिंग, आर्कटिक रिसर्च और ब्लू इकोनॉमी पर केंद्रित साझेदारी की रूपरेखा तैयार की गई।
इटली के साथ द्विपक्षीय संबंधों को 'स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप' के स्तर तक उन्नत किया गया। यहाँ रक्षा उत्पादन, एयरोस्पेस और महत्वपूर्ण खनिजों में सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर (IMEC) को आगे बढ़ाने पर भी काम हुआ।
उद्योग जगत से संवाद और निवेश की संभावनाएँ
प्रधानमंत्री मोदी ने यूरोप और नॉर्डिक देशों के प्रमुख उद्योगपतियों तथा व्यापारिक नेताओं से भी मुलाकात की। इन बैठकों ने भारत की छवि को एक भरोसेमंद निवेश, नवाचार और मैन्युफैक्चरिंग केंद्र के रूप में और पुख्ता किया।
गौरतलब है कि यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक कंपनियाँ अपनी सप्लाई चेन में विविधता लाने की कोशिश में हैं और भारत को एक वैकल्पिक विनिर्माण केंद्र के रूप में देख रही हैं।
आगे की राह
मालवीय के अनुसार, इन सभी समझौतों और उपलब्धियों का स्पष्ट संदेश यह है कि भारत अब वैश्विक सप्लाई चेन पुनर्गठन का एक केंद्रीय स्तंभ बन चुका है। एक भरोसेमंद लोकतांत्रिक साझेदार के रूप में भारत भविष्य की वैश्विक व्यवस्था को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की स्थिति में है। अब देखना यह होगा कि इन कूटनीतिक प्रतिबद्धताओं को जमीनी स्तर पर किस गति और प्रभाव के साथ लागू किया जाता है।