भारत का HSBC फ्लैश PMI मई में 58.1 पर, वैश्विक अस्थिरता से निर्यात ऑर्डर 19 महीने के निचले स्तर पर
सारांश
मुख्य बातें
HSBC फ्लैश इंडिया PMI कम्पोजिट आउटपुट इंडेक्स मई 2026 में मामूली गिरकर 58.1 पर आ गया, जो अप्रैल 2026 में 58.2 था — वैश्विक अस्थिरता के बीच भारत के प्राइवेट सेक्टर की गतिविधियों में हल्की नरमी का संकेत। 21 मई को जारी इस निजी सर्वेक्षण के अनुसार, सर्विस सेक्टर की मज़बूत रफ्तार ने मैन्युफैक्चरिंग की कमज़ोरी को काफी हद तक संतुलित किया।
मुख्य आँकड़े
PMI डेटा के अनुसार, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस — दोनों क्षेत्रों में नए कारोबार की वृद्धि दर धीमी रही, जिससे समग्र स्तर पर विस्तार की गति में कमी आई। उल्लेखनीय रूप से, नए निर्यात ऑर्डर में वृद्धि पिछले 19 महीनों में सबसे कम रही। वस्तु उत्पादकों ने सितंबर 2024 के बाद से अंतरराष्ट्रीय बिक्री में दूसरी सबसे धीमी वृद्धि दर्ज की।
मैन्युफैक्चरिंग पर दबाव
HSBC के चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी ने कहा, 'उत्पादन और नए ऑर्डर की वृद्धि दर में नरमी आने से मैन्युफैक्चरिंग गतिविधि में मामूली गिरावट आई है, जबकि नए निर्यात ऑर्डर की वृद्धि में तेज कमी आई है। फिर भी, निरंतर इन्वेंट्री के कारण मैन्युफैक्चरिंग PMI मोटे तौर पर अपने दीर्घकालिक औसत के अनुरूप बना रहा।'
भंडारी ने यह भी बताया कि मई में तैयार माल के भंडार में लगातार दूसरे महीने वृद्धि हुई और खरीद भंडार में पिछले तीन महीनों में सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई। इनपुट कीमतों में महंगाई जुलाई 2022 के बाद से सबसे तेज रफ्तार से बढ़ी।
सर्विस सेक्टर की भूमिका
आँकड़ों के अनुसार, सर्विस अर्थव्यवस्था की तेज रफ्तार ने फैक्ट्री उत्पादन की कमज़ोरी की भरपाई की। सर्विसेज़ सेक्टर पर महंगाई का दबाव मैन्युफैक्चरिंग की तुलना में कम रहा। कंपनियों ने इनपुट लागत बढ़ने के बावजूद उत्पादन शुल्क में सीमित वृद्धि कर ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ डालने से परहेज किया।
कारोबारी विश्वास और आगे की राह
मई में कारोबारी विश्वास सकारात्मक बना रहा, हालाँकि समग्र भावना तीन महीने के निचले स्तर पर आ गई। यह स्तर अभी भी दीर्घकालिक औसत से ऊपर है, जो यह संकेत देता है कि बाज़ार में बुनियादी मज़बूती बरकरार है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार तनाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितता निर्यात-उन्मुख क्षेत्रों पर दबाव बना रही है। आने वाले महीनों में निर्यात ऑर्डर की दिशा और इनपुट महंगाई का प्रबंधन भारतीय प्राइवेट सेक्टर की विकास गति के लिए निर्णायक रहेगा।