PM मोदी की पाँच देशों की यात्रा: भाजपा ने जताई उम्मीद, वैश्विक ईंधन संकट का कूटनीतिक हल निकलेगा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
PM मोदी की पाँच देशों की यात्रा: भाजपा ने जताई उम्मीद, वैश्विक ईंधन संकट का कूटनीतिक हल निकलेगा

सारांश

पश्चिम एशिया संघर्ष और वैश्विक ईंधन संकट के बीच PM मोदी की पाँच देशों की यात्रा महज़ एक राजनयिक औपचारिकता नहीं — भाजपा इसे ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार साझेदारी की दिशा में एक निर्णायक कदम बता रही है। UAE से इटली तक का यह दौरा भारत की बहु-आयामी विदेश नीति की परीक्षा भी है।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 15 मई 2025 को संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की पाँच देशों की यात्रा शुरू की, जो 20 मई तक चलेगी।
यात्रा का मुख्य एजेंडा ऊर्जा, रक्षा, प्रौद्योगिकी, हरित परिवर्तन और व्यापार में साझेदारी मज़बूत करना है।
भाजपा नेताओं ने उम्मीद जताई कि यह दौरा पश्चिम एशिया संघर्ष से उपजे वैश्विक ईंधन संकट का कूटनीतिक समाधान निकालेगा।
भाजपा सांसद गुलाम अली खटाना के अनुसार 2014 के बाद से रूस, अमेरिका, मध्य-पूर्व और यूरोपीय संघ ने भारत के लिए अपने बाज़ार खोले हैं।
बिहार मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि PM मोदी की ईंधन खपत कम करने की अपील पर आधारित पहल पहले ही शुरू हो चुकी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 मई 2025 को संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की पाँच देशों की यात्रा शुरू की, जो 20 मई तक चलेगी। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने शुक्रवार को विश्वास जताया कि यह दौरा पश्चिम एशिया संघर्ष से उपजे वैश्विक ईंधन संकट का कूटनीतिक समाधान निकालने में निर्णायक साबित होगा।

यात्रा का उद्देश्य और प्राथमिकताएँ

इस दौरे में ऊर्जा, रक्षा, प्रौद्योगिकी, हरित परिवर्तन और व्यापार जैसे प्रमुख क्षेत्रों में भारत की रणनीतिक और आर्थिक साझेदारियों को मज़बूत करना प्रमुख एजेंडा है। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें दबाव में हैं और भारत के ऊर्जा आयात बिल पर असर पड़ रहा है।

गौरतलब है कि भारत अपनी कच्चे तेल की ज़रूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से पूरा करता है, जिससे संयुक्त अरब अमीरात का पड़ाव इस दौरे में विशेष महत्व रखता है।

भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया

भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा, 'पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पाँच देशों का दौरा भारत के लिए निश्चित रूप से बहुत महत्वपूर्ण है। इन देशों में प्रधानमंत्री भारत का दृष्टिकोण मज़बूती से पेश करेंगे। इससे भारत की स्थिति मज़बूत होगी और देश की भूमिका और भी अधिक प्रभावशाली रूप से सामने आएगी।'

बिहार के मंत्री रामकृपाल यादव ने रेखांकित किया कि बड़ी संख्या में भारतीय संयुक्त अरब अमीरात में रहते और काम करते हैं, इसलिए यह यात्रा प्रवासी भारतीयों के हितों की दृष्टि से भी अहम है। उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री कूटनीतिक संबंधों को मज़बूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं।'

बिहार के ही मंत्री दिलीप जायसवाल ने कच्चे तेल की बढ़ती वैश्विक कीमतों के संदर्भ में नागरिकों से डीज़ल और पेट्रोल की खपत कम करने की प्रधानमंत्री की अपील का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री मोदी की अपील पर आधारित पहल पहले ही शुरू हो चुकी है। वे इस मुद्दे का कूटनीतिक समाधान खोजने के लिए खाड़ी देशों और अन्य देशों का भी दौरा कर रहे हैं।'

विधायी और संसदीय समर्थन

उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पाँच देशों की यात्रा देश के कल्याण के लिहाज़ से सफल रहेगी, जिसमें अंतरराष्ट्रीय संबंध, व्यापार और मौजूदा वैश्विक संकट से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।'

भाजपा सांसद राहुल सिन्हा ने इस यात्रा को वैश्विक स्थिति सुधारने और भारत के कूटनीतिक संबंधों को मज़बूत बनाने के लिए 'बेहद महत्वपूर्ण' बताया। उन्होंने कहा, 'मेरा मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह यात्रा विश्व शांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।'

2014 से बदला कूटनीतिक परिदृश्य

भाजपा सांसद गुलाम अली खटाना ने 2014 में प्रधानमंत्री मोदी के सत्ता संभालने के बाद से भारत के कूटनीतिक संबंधों में आए बदलाव का ज़िक्र किया। उनके अनुसार, 'जो देश पहले हमारे साथ व्यापार नहीं करते थे, वे अब भारत में निवेश करने को तैयार हैं।' उन्होंने कहा कि आज रूस, अमेरिका, मध्य-पूर्व और यूरोपीय संघ जैसे देश भी भारत में निवेश करना चाहते हैं और उन्होंने अपने बाज़ार भारत के लिए खोल दिए हैं।

इस यात्रा के नतीजे आने वाले दिनों में स्पष्ट होंगे, लेकिन ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार साझेदारी के मोर्चे पर किसी भी ठोस समझौते को भारत की दीर्घकालिक कूटनीतिक रणनीति की कसौटी पर परखा जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या इस दौरे से कोई ठोस ऊर्जा समझौता निकलेगा या यह कूटनीतिक संबंध-प्रदर्शन तक सीमित रहेगा। पश्चिम एशिया संघर्ष पर भारत की 'तटस्थ मध्यस्थ' वाली भूमिका की सराहना होती रही है, पर ईंधन की कीमतें घरेलू राजनीति में सीधे असर डालती हैं — और वहाँ कूटनीतिक बयानबाज़ी काफी नहीं होती। यात्रा के बाद जारी संयुक्त बयानों और वास्तविक आपूर्ति समझौतों के बीच का अंतर ही इस दौरे की सफलता का असली पैमाना होगा।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी किन पाँच देशों की यात्रा पर गए हैं?
PM नरेंद्र मोदी 15 से 20 मई 2025 तक संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की यात्रा पर हैं। इस दौरे का उद्देश्य ऊर्जा, रक्षा, प्रौद्योगिकी, हरित परिवर्तन और व्यापार में साझेदारी को मज़बूत करना है।
इस यात्रा से वैश्विक ईंधन संकट पर क्या असर पड़ेगा?
भाजपा नेताओं का मानना है कि पश्चिम एशिया संघर्ष से उपजे वैश्विक ईंधन संकट का कूटनीतिक समाधान इस यात्रा से निकल सकता है। हालाँकि कोई ठोस समझौता अभी सामने नहीं आया है और नतीजे यात्रा पूरी होने के बाद स्पष्ट होंगे।
संयुक्त अरब अमीरात का पड़ाव भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
UAE में बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी रहते और काम करते हैं, और यह भारत के प्रमुख ऊर्जा आपूर्तिकर्ताओं में से एक है। बिहार मंत्री रामकृपाल यादव ने इसी कारण UAE पड़ाव को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया।
भाजपा ने मोदी की इस यात्रा को कैसे परिभाषित किया है?
भाजपा नेताओं ने इसे भारत की कूटनीतिक शक्ति और वैश्विक प्रभाव को प्रदर्शित करने का अवसर बताया है। सांसद राहुल सिन्हा ने कहा कि यह यात्रा 'विश्व शांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी', जबकि सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने इसे भारत का दृष्टिकोण मज़बूती से पेश करने का मंच बताया।
2014 के बाद से भारत की कूटनीति में क्या बदलाव आया है?
भाजपा सांसद गुलाम अली खटाना के अनुसार 2014 के बाद रूस, अमेरिका, मध्य-पूर्व और यूरोपीय संघ जैसे देश भारत में निवेश करने और अपने बाज़ार खोलने को तैयार हुए हैं। उनका कहना है कि यह PM मोदी के विज़न का नतीजा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 घंटे पहले
  2. 2 घंटे पहले
  3. 7 घंटे पहले
  4. 9 घंटे पहले
  5. कल
  6. 2 दिन पहले
  7. 3 दिन पहले
  8. 1 महीना पहले