नासिक TCS केस: पाँचों आरोपियों की जमानत याचिका खारिज, सेंट्रल जेल में जारी रहेगी न्यायिक हिरासत
सारांश
मुख्य बातें
नासिक सेशन कोर्ट ने 15 मई 2026 को टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) से जुड़े कथित अत्याचार और धार्मिक भावना आहत करने के मामले में एक अहम फैसला सुनाया — न्यायिक हिरासत में बंद पाँचों आरोपियों की जमानत याचिकाएँ खारिज कर दी गईं। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए किसी भी आरोपी को राहत देने से इनकार कर दिया, जिससे सभी आरोपी फ़िलहाल नासिक सेंट्रल जेल में ही बंद रहेंगे।
किन आरोपियों की याचिका खारिज हुई
सेशन कोर्ट में जमानत के लिए आवेदन करने वाले पाँच आरोपियों में अश्विनी चेनानी, रज़ा मेनन, आसिफ अंसारी, शाहरुख कुरेशी और तौसिफ अत्तार के नाम शामिल हैं। अदालत ने इनकी याचिकाओं पर विस्तृत सुनवाई के बाद जमानत देने से इनकार कर दिया।
इससे पूर्व, इसी मामले में आरोपी निदा खान को अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा था। रिमांड की अवधि समाप्त होने पर पुलिस ने उन्हें कोर्ट में पेश किया। निदा खान को 7 मई को छत्रपति संभाजीनगर के नरेगांव क्षेत्र स्थित कैसर कॉलोनी के एक आवासीय अपार्टमेंट से गिरफ्तार किया गया था।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद तब सामने आया जब नासिक स्थित TCS कार्यालय में कार्यरत एक महिला कर्मचारी ने अपने सहकर्मी दानिश शेख के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि दानिश शेख ने पहले से विवाहित होने के बावजूद शादी का झाँसा देकर उनके साथ शारीरिक संबंध बनाए।
जाँच आगे बढ़ने पर कई अन्य महिलाओं ने भी नासिक शाखा के वरिष्ठ कर्मचारियों पर उत्पीड़न के आरोप लगाए। इन महिलाओं का कहना है कि फरवरी 2022 से मार्च 2026 के बीच उन्हें मानसिक और यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ा, लेकिन उनकी शिकायतों को कंपनी के मानव संसाधन विभाग ने नज़रअंदाज़ कर दिया।
पुलिस और जाँच एजेंसियों की स्थिति
पुलिस के अनुसार, इस प्रकरण में अत्याचार और धार्मिक भावना आहत करने के आरोप लगाए गए हैं। जाँच एजेंसियाँ पूरे मामले की गहराई से पड़ताल कर रही हैं और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है। अदालत ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आरोपियों को जमानत देने से स्पष्ट रूप से इनकार किया।
आगे क्या होगा
सभी आरोपी अगली सुनवाई तक नासिक सेंट्रल जेल में न्यायिक हिरासत में रहेंगे। मामले में जाँच जारी है और अदालत में आगे की कार्यवाही तय होगी। यह मामला कार्यस्थल पर उत्पीड़न की शिकायतों को लेकर कॉर्पोरेट जवाबदेही के व्यापक सवाल भी उठाता है।