जीवाश्म ईंधन जलवायु संकट की जड़, यूएन महासचिव गुटेरेस ने नवीकरणीय ऊर्जा की ओर तेज बदलाव का आह्वान किया

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जीवाश्म ईंधन जलवायु संकट की जड़, यूएन महासचिव गुटेरेस ने नवीकरणीय ऊर्जा की ओर तेज बदलाव का आह्वान किया

सारांश

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 141 देशों के समर्थन से आईसीजे की जलवायु सलाहकारी राय पर प्रस्ताव पारित किया। महासचिव गुटेरेस ने जीवाश्म ईंधन को संकट की जड़ बताते हुए नवीकरणीय ऊर्जा की ओर तेज और न्यायपूर्ण बदलाव का आह्वान किया — और कहा कि 1.5 डिग्री का लक्ष्य अभी भी पहुँच में है।

मुख्य बातें

यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने 21 मई को कहा कि जीवाश्म ईंधन जलवायु संकट का मुख्य कारण हैं।
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 141 देशों के समर्थन, 8 के विरोध और 28 के परहेज के साथ जलवायु प्रस्ताव पारित किया।
प्रस्ताव में जुलाई 2025 की आईसीजे सलाहकारी राय का स्वागत किया गया, जो देशों की जलवायु जिम्मेदारियाँ रेखांकित करती है।
गुटेरेस ने 1.5 डिग्री सेल्सियस के तापमान लक्ष्य को बनाए रखने और नवीकरणीय ऊर्जा को सबसे सस्ता व सुरक्षित विकल्प बताया।
प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है, लेकिन इसे वैश्विक जलवायु जवाबदेही के लिए नैतिक दबाव का माध्यम माना जा रहा है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने 21 मई को स्पष्ट शब्दों में कहा कि जीवाश्म ईंधन वैश्विक जलवायु संकट की मूल वजह हैं और इनसे बाहर निकलकर नवीकरणीय ऊर्जा की ओर तेज़, न्यायपूर्ण तथा समान बदलाव ही जलवायु न्याय का एकमात्र रास्ता है। यह बयान उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) द्वारा एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किए जाने के अवसर पर दिया, जो अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) की जलवायु परिवर्तन संबंधी सलाहकारी राय से जुड़ा था।

यूएनजीए का ऐतिहासिक प्रस्ताव

बुधवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने रिकॉर्ड मतदान के साथ एक मसौदा प्रस्ताव को स्वीकृति दी। 141 देशों ने इसके पक्ष में मतदान किया, जबकि 8 देशों ने विरोध किया और 28 देशों ने मतदान से परहेज किया। इस व्यापक समर्थन को जलवायु कार्रवाई के लिए वैश्विक एकजुटता का संकेत माना जा रहा है।

इस प्रस्ताव में जुलाई 2025 में आईसीजे द्वारा दी गई उस सलाहकारी राय का स्वागत किया गया है, जिसमें देशों की जलवायु परिवर्तन से संबंधित अंतरराष्ट्रीय कानूनी जिम्मेदारियों को रेखांकित किया गया था। प्रस्ताव में इस राय को अंतरराष्ट्रीय कानून की एक महत्वपूर्ण व्याख्या करार दिया गया है।

गुटेरेस का स्पष्ट संदेश

गुटेरेस ने प्रस्ताव का स्वागत करते हुए कहा, 'जिन लोगों ने जलवायु बदलाव में सबसे कम योगदान दिया है, वे इसकी सबसे बड़ी मार झेल रहे हैं। यह अन्याय खत्म होना चाहिए।' उन्होंने जोर देकर कहा कि आगे का काम साफ है — 1.5 डिग्री सेल्सियस के तापमान लक्ष्य को पहुँच के भीतर रखना और सभी के लिए एक सुरक्षित, न्यायपूर्ण और अधिक मज़बूत भविष्य का निर्माण करना।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि नवीकरणीय ऊर्जा अब सबसे सस्ता और सबसे सुरक्षित ऊर्जा स्रोत साबित हो चुकी है — एक तथ्य जो जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता जारी रखने के किसी भी आर्थिक तर्क को कमज़ोर करता है।

देशों की जिम्मेदारी और आईसीजे की राय

पारित प्रस्ताव में सभी सदस्य देशों से आग्रह किया गया है कि वे अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपनी जिम्मेदारियों का पालन करें, ताकि ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन से हो रहे जलवायु परिवर्तन से पृथ्वी और पर्यावरण की रक्षा की जा सके। यह ऐसे समय में आया है जब आईसीजे की सलाहकारी राय को अंतरराष्ट्रीय जलवायु जवाबदेही के लिए एक नई कानूनी नींव के रूप में देखा जा रहा है।

गौरतलब है कि यह प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है, लेकिन इसे वैश्विक जलवायु नीति पर नैतिक और राजनीतिक दबाव बनाने वाला एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

आगे की राह

यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर में चरम मौसमी घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता बढ़ रही है और विकासशील देश जलवायु वित्त की माँग को लेकर विकसित देशों पर दबाव बना रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि जब तक बड़े उत्सर्जक देश ठोस कदम नहीं उठाते, तब तक ऐसे प्रस्तावों का व्यावहारिक असर सीमित रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी सीमाएँ भी स्पष्ट हैं — यह कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है और बड़े उत्सर्जक देश इसे अनदेखा कर सकते हैं। गुटेरेस का 'नवीकरणीय ऊर्जा सबसे सस्ती है' वाला तर्क आर्थिक रूप से सही है, लेकिन जीवाश्म ईंधन पर टिकी अर्थव्यवस्थाओं में राजनीतिक बदलाव की रफ़्तार इससे मेल नहीं खाती। असली सवाल यह है कि आईसीजे की सलाहकारी राय को क्या कोई देश वास्तव में अपनी नीतियों में लागू करेगा — या यह भी पिछले जलवायु वादों की तरह दस्तावेज़ों तक सिमट जाएगा।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूएन महासचिव गुटेरेस ने जीवाश्म ईंधन के बारे में क्या कहा?
गुटेरेस ने 21 मई को कहा कि जीवाश्म ईंधन जलवायु संकट का मुख्य कारण हैं और जलवायु न्याय के लिए इनसे तेज़ी से बाहर निकलकर नवीकरणीय ऊर्जा की ओर बढ़ना ज़रूरी है। उन्होंने नवीकरणीय ऊर्जा को सबसे सस्ता और सुरक्षित विकल्प भी बताया।
यूएनजीए का जलवायु प्रस्ताव क्या है और इसे किसने पारित किया?
यह प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 21 मई को पारित किया, जिसमें 141 देशों ने समर्थन किया, 8 ने विरोध किया और 28 ने परहेज किया। इसमें जुलाई 2025 में आईसीजे द्वारा दी गई जलवायु सलाहकारी राय का स्वागत किया गया है।
आईसीजे की जलवायु सलाहकारी राय क्या कहती है?
जुलाई 2025 में दी गई आईसीजे की सलाहकारी राय में देशों की जलवायु परिवर्तन से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय कानूनी जिम्मेदारियाँ रेखांकित की गई हैं। यूएनजीए प्रस्ताव इसे अंतरराष्ट्रीय कानून की एक महत्वपूर्ण व्याख्या मानता है।
क्या यूएनजीए का यह प्रस्ताव देशों पर कानूनी रूप से बाध्यकारी है?
नहीं, यह प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। हालाँकि इसे वैश्विक स्तर पर जलवायु जवाबदेही के लिए नैतिक और राजनीतिक दबाव बनाने वाला एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
1.5 डिग्री सेल्सियस का लक्ष्य क्यों महत्वपूर्ण है?
1.5 डिग्री सेल्सियस वह तापमान सीमा है जिसे पेरिस समझौते में विनाशकारी जलवायु प्रभावों को रोकने के लिए निर्धारित किया गया था। गुटेरेस ने कहा कि जीवाश्म ईंधन से तेज़ी से बाहर निकलकर ही इस लक्ष्य को पहुँच के भीतर रखा जा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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