जेपी नड्डा का जिनेवा में संदेश: फेफड़ों की स्क्रीनिंग और जल्द निदान से बनेगी जन-केंद्रित स्वास्थ्य व्यवस्था
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने 21 मई 2025 को जिनेवा, स्विट्जरलैंड में आयोजित 79वीं विश्व स्वास्थ्य सभा के दौरान फेफड़ों के स्वास्थ्य स्क्रीनिंग पर एक उच्च स्तरीय साइड इवेंट को संबोधित किया। 'स्टॉप टीबी पार्टनरशिप' द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम की सह-मेजबानी भारत, जापान, फिलीपींस और जाम्बिया ने संयुक्त रूप से की।
मुख्य संदेश: स्क्रीनिंग केवल तकनीकी नहीं, जीवन-रक्षक मुद्दा
नड्डा ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि 'समय पर स्क्रीनिंग, बीमारी की जल्द पहचान और देखभाल तक समान पहुंच ही एक मजबूत और जन-केंद्रित स्वास्थ्य प्रणाली का मूल आधार है।' उन्होंने रेखांकित किया कि फेफड़ों के स्वास्थ्य की जांच को सशक्त करना केवल तकनीकी प्रश्न नहीं है — यह जीवन बचाने, पीड़ा कम करने, आर्थिक बोझ घटाने और समग्र स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने से सीधे जुड़ा है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर टीबी उन्मूलन की गति असमान बनी हुई है।
भारत का 'टीबी मुक्त भारत' अभियान: विश्व का सबसे बड़ा स्क्रीनिंग कार्यक्रम
मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत भारत ने विश्व का सबसे बड़ा स्क्रीनिंग और शीघ्र निदान कार्यक्रम संचालित किया है। घर-घर जाकर स्क्रीनिंग, मोबाइल टीमों, सामुदायिक अभियानों और उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में लक्षित कार्यक्रमों के माध्यम से संवेदनशील आबादी तक पहुंच सुनिश्चित की जा रही है। गौरतलब है कि भारत में टीबी का वैश्विक बोझ ऐतिहासिक रूप से सर्वाधिक रहा है, जिसे देखते हुए यह कार्यक्रम विशेष महत्व रखता है।
प्रौद्योगिकी और नवाचार की भूमिका
नड्डा ने बताया कि दूरदराज और कम सुविधाओं वाले क्षेत्रों में जांच की देरी कम करने के लिए मॉलिक्यूलर टेस्टिंग प्लेटफॉर्म, डिजिटल चेस्ट एक्स-रे, एआई-आधारित व्याख्या उपकरण, हैंडहेल्ड स्क्रीनिंग डिवाइस और विकेंद्रीकृत जांच प्रणालियों का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने जोर दिया कि नवाचार का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए।
इसी क्रम में उन्होंने 'टीबी मुक्त भारत ऐप' का उल्लेख किया, जिसमें 'खुशी' नामक एआई-सक्षम बहुभाषी चैटबॉट शामिल है। यह चैटबॉट लक्षणों, स्वास्थ्य सुविधाओं और निकटतम जांच केंद्रों के बारे में वास्तविक समय में मार्गदर्शन देता है और साधारण स्मार्टफोन पर भी सुलभ है।
सामुदायिक भागीदारी और आयुष्मान भारत की भूमिका
मंत्री ने बताया कि टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत नागरिकों, संस्थानों, कॉरपोरेट्स और समुदायों को टीबी मरीजों एवं उनके परिवारों की सहायता के लिए एकजुट किया गया है। उन्होंने आयुष्मान भारत स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों तथा फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कर्मियों की जमीनी भूमिका की विशेष सराहना की।
वैश्विक सहयोग पर भारत के सुझाव
नड्डा ने वैश्विक भागीदारों से अपील करते हुए कई सुझाव प्रस्तुत किए — फेफड़ों के स्वास्थ्य को सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज में मुख्यधारा में लाना, किफायती डायग्नोस्टिक्स और डिजिटल टूल्स तक पहुंच बढ़ाना, प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल को सुदृढ़ करना, नवाचार और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को प्रोत्साहन देना तथा स्थायी वित्तपोषण सुनिश्चित करना। उन्होंने कहा कि टीबी के विरुद्ध लड़ाई एक मजबूत स्वास्थ्य प्रणाली, स्वच्छ वातावरण, बेहतर पोषण और समतावादी समाज की नींव रख सकती है। भारत सरकार फेफड़ों के स्वास्थ्य स्क्रीनिंग के व्यावहारिक और बड़े पैमाने पर लागू समाधानों के लिए विश्व भर की सरकारों, नवोन्मेषकों और समुदायों के साथ सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है।