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एनपीटी में जान डालें देश: यूएन चीफ गुटेरेस की परमाणु खतरे पर चेतावनी

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एनपीटी में जान डालें देश: यूएन चीफ गुटेरेस की परमाणु खतरे पर चेतावनी

सारांश

यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने एनपीटी के ११वें समीक्षा सम्मेलन में चेतावनी दी कि परमाणु हथियारों की संख्या फिर बढ़ रही है और दुनिया इस खतरे को भूलती जा रही है। उन्होंने देशों से एनपीटी में नई जान फूंकने का आह्वान किया।

मुख्य बातें

यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने २७ अप्रैल २०२६ को एनपीटी के ११वें समीक्षा सम्मेलन को संबोधित किया।
गुटेरेस ने कहा कि कई दशकों में पहली बार परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ रही है।
उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम कंप्यूटिंग को परमाणु सुरक्षा के लिए नया खतरा बताया।
सम्मेलन २७ अप्रैल से २२ मई तक न्यूयॉर्क में चलेगा।
गुटेरेस ने देशों से निरस्त्रीकरण और प्रसार-रोध के प्रति फिर से प्रतिबद्ध होने का आग्रह किया।

न्यूयॉर्क, २७ अप्रैल। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सोमवार को दुनिया के देशों से आग्रह किया कि वे परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने वाली ऐतिहासिक संधि — नॉन-प्रोलिफरेशन ट्रीटी (एनपीटी) — को नए सिरे से मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि दुनिया एक बार फिर परमाणु विनाश के खतरे के कगार पर खड़ी है।

११वें समीक्षा सम्मेलन में गुटेरेस का आह्वान

गुटेरेस न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित एनपीटी के ११वें समीक्षा सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। यह सम्मेलन २७ अप्रैल से २२ मई तक चलेगा। उन्होंने कहा कि दशकों की कूटनीतिक मेहनत से बनाए गए परमाणु नियंत्रण के ढांचे की नींव एनपीटी ही है, और अगर यह कमजोर पड़ी तो पूरी अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था खतरे में पड़ जाएगी।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा,

संपादकीय दृष्टिकोण

वही आज अपने परमाणु शस्त्रागार का विस्तार कर रहे हैं। मुख्यधारा की मीडिया इसे एक सम्मेलन की खबर की तरह कवर करती है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या बिना दंड-व्यवस्था के कोई संधि टिक सकती है। भारत जैसे देशों के लिए यह और भी प्रासंगिक है, जो एनपीटी से बाहर हैं लेकिन परमाणु-सक्षम पड़ोसियों से घिरे हैं।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनपीटी क्या है और यह क्यों जरूरी है?
एनपीटी यानी नॉन-प्रोलिफरेशन ट्रीटी एक अंतरराष्ट्रीय संधि है जो परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने, निरस्त्रीकरण को बढ़ावा देने और परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है। यह वैश्विक परमाणु सुरक्षा ढांचे की सबसे महत्वपूर्ण नींव मानी जाती है।
गुटेरेस ने इस सम्मेलन में क्या कहा?
यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि एनपीटी धीरे-धीरे कमजोर पड़ रही है, देशों ने अपने वादे नहीं निभाए और कई दशकों में पहली बार परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ रही है। उन्होंने सभी देशों से निरस्त्रीकरण के प्रति फिर से प्रतिबद्ध होने का आग्रह किया।
यह सम्मेलन कब तक चलेगा और इसका क्या महत्व है?
एनपीटी का ११वां समीक्षा सम्मेलन २७ अप्रैल से २२ मई २०२६ तक न्यूयॉर्क में चलेगा। इस सम्मेलन में दुनियाभर के देश परमाणु हथियारों के खतरे, संधि की प्रभावशीलता और भविष्य की रणनीति पर चर्चा करेंगे।
एआई और क्वांटम कंप्यूटिंग परमाणु सुरक्षा के लिए खतरा कैसे हैं?
गुटेरेस के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी तकनीकें परमाणु हथियारों की निगरानी, नियंत्रण और निर्णय प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं। इससे गलत निर्णय या साइबर हमले का खतरा बढ़ जाता है, जो परमाणु युद्ध की संभावना को वास्तविक बना सकता है।
भारत का एनपीटी से क्या संबंध है?
भारत एनपीटी का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है और उसने इसे भेदभावपूर्ण बताया है। हालांकि, भारत परमाणु-सक्षम देश है और उसकी 'पहले उपयोग नहीं' की नीति है। इस सम्मेलन के नतीजे भारत की क्षेत्रीय सुरक्षा नीति को भी प्रभावित कर सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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