माइग्रेन से राहत के लिए आयुष मंत्रालय ने बताए 6 कारगर योगासन, विश्व योग दिवस से पहले जारी की सलाह

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माइग्रेन से राहत के लिए आयुष मंत्रालय ने बताए 6 कारगर योगासन, विश्व योग दिवस से पहले जारी की सलाह

सारांश

माइग्रेन के बढ़ते मामलों के बीच आयुष मंत्रालय ने विश्व योग दिवस से पहले छह कारगर योगासन और प्राणायाम सुझाए हैं — भुजंगासन से लेकर भ्रामरी तक। सरकार का संदेश साफ़ है: दवाओं से पहले दिनचर्या बदलें।

मुख्य बातें

आयुष मंत्रालय ने 14 मई 2026 को माइग्रेन राहत के लिए योग-आधारित सलाह जारी की।
भुजंगासन , पवनमुक्तासन , मार्जरी आसन , ताड़ासन , भ्रामरी और शीतली प्राणायाम — कुल 6 आसन/प्राणायाम सुझाए गए।
रोज़ाना 15 से 20 मिनट शांत वातावरण में अभ्यास करने की सलाह दी गई।
स्क्रीन टाइम, गलत मुद्रा, अनियमित नींद और तनाव को माइग्रेन के प्रमुख आधुनिक कारण बताया गया।
शुरुआती अभ्यासकर्ताओं को प्रमाणित योग विशेषज्ञ की देखरेख में शुरुआत करने की सलाह।
यह अभियान 21 जून 2026 को मनाए जाने वाले विश्व योग दिवस से पहले चलाया जा रहा है।

आयुष मंत्रालय ने 14 मई 2026 को माइग्रेन की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए योग-आधारित समाधान सुझाए हैं, जिसमें भुजंगासन, भ्रामरी प्राणायाम और मार्जरी आसन सहित छह प्रमुख योगासन व प्राणायाम शामिल हैं। 21 जून को मनाए जाने वाले विश्व योग दिवस से पहले मंत्रालय लगातार जागरूकता अभियान चला रहा है, जिसके तहत यह सलाह इंस्टाग्राम पर साझा की गई है।

माइग्रेन क्या है और यह क्यों गंभीर है

माइग्रेन एक साधारण सिरदर्द से कहीं अधिक जटिल न्यूरोलॉजिकल समस्या है। इसमें सिर के एक तरफ तीव्र दर्द होता है, साथ में जी मिचलाना, चक्कर आना और तेज रोशनी व तेज आवाज़ से परेशानी भी हो सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्थिति व्यक्ति की दैनिक जीवनशैली को गंभीर रूप से प्रभावित करती है।

माइग्रेन के आधुनिक कारण

आज की जीवनशैली माइग्रेन को बढ़ावा देने में प्रमुख भूमिका निभाती है। मोबाइल और कंप्यूटर स्क्रीन के सामने घंटों बैठना, गलत मुद्रा में काम करना, अनियमित नींद और लगातार मानसिक तनाव — ये सभी कारक गर्दन, कंधे और सिर की मांसपेशियों में खिंचाव पैदा करते हैं, जो धीरे-धीरे माइग्रेन के दौरे को ट्रिगर करते हैं। गौरतलब है कि शहरी आबादी में इस समस्या की दर तेज़ी से बढ़ रही है।

आयुष मंत्रालय द्वारा सुझाए गए योगासन

मंत्रालय ने निम्नलिखित आसनों और प्राणायामों की नियमित अभ्यास की सलाह दी है:

भुजंगासन (कोबरा पोज़) रीढ़ की हड्डी को मज़बूत करता है और गर्दन के तनाव को दूर करता है। पवनमुक्तासन पेट व कमर के तनाव को कम करता है और गैस व अपच से राहत दिलाता है। मार्जरी आसन (कैट-काउ पोज़) गर्दन और पीठ की अकड़न को दूर करने में सहायक है।

ताड़ासन शरीर की मुद्रा सुधारता है और एकाग्रता बढ़ाता है। भ्रामरी प्राणायाम मन को शांत कर तनाव-जनित सिरदर्द में तत्काल राहत देता है। शीतली प्राणायाम शरीर को ठंडक प्रदान करता है और माइग्रेन के गर्मी से जुड़े ट्रिगर्स को नियंत्रित करता है।

अभ्यास का सही तरीका

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इन आसनों को रोज़ाना सुबह या शाम शांत वातावरण में 15 से 20 मिनट तक करने से धीरे-धीरे सकारात्मक परिणाम मिलते हैं। दवाइयों पर निर्भरता की बजाय नियमित योगाभ्यास दीर्घकाल में माइग्रेन को जड़ से नियंत्रित करने में सहायक हो सकता है। शुरुआती अभ्यासकर्ताओं को किसी प्रमाणित योग विशेषज्ञ की देखरेख में शुरुआत करने की सलाह दी गई है।

आगे क्या

विश्व योग दिवस 2026 तक आयुष मंत्रालय ऐसे और जागरूकता संदेश जारी करता रहेगा। यह अभियान ऐसे समय में आया है जब भारत में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का बोझ तेज़ी से बढ़ रहा है और सरकार निवारक स्वास्थ्य देखभाल को प्राथमिकता दे रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 'योग रामबाण है' जैसा संदेश सावधानी माँगता है — माइग्रेन एक जटिल न्यूरोलॉजिकल स्थिति है जिसके लिए कई मामलों में चिकित्सकीय हस्तक्षेप ज़रूरी होता है। सरकारी अभियानों में योग को पूरक उपाय के रूप में प्रस्तुत करना उचित है, किंतु इसे दवाओं के विकल्प के रूप में प्रचारित करना भ्रामक हो सकता है। इसके साथ ही, सोशल मीडिया पर स्वास्थ्य सलाह देने की इस प्रवृत्ति पर यह सवाल भी उठता है कि क्या इन दावों की वैज्ञानिक समीक्षा पर्याप्त रूप से होती है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

माइग्रेन में कौन से योगासन सबसे ज़्यादा फायदेमंद हैं?
आयुष मंत्रालय के अनुसार, भुजंगासन, पवनमुक्तासन, मार्जरी आसन, ताड़ासन, भ्रामरी प्राणायाम और शीतली प्राणायाम माइग्रेन में विशेष रूप से लाभकारी हैं। इनके नियमित अभ्यास से गर्दन का तनाव कम होता है, रक्त संचार बेहतर होता है और मानसिक शांति मिलती है।
माइग्रेन के लिए योग कितने समय तक करना चाहिए?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार, रोज़ाना सुबह या शाम शांत वातावरण में 15 से 20 मिनट का अभ्यास पर्याप्त है। शुरुआत में किसी प्रमाणित योग विशेषज्ञ की देखरेख में अभ्यास करना बेहतर माना जाता है।
आयुष मंत्रालय ने माइग्रेन पर यह सलाह क्यों जारी की?
21 जून को विश्व योग दिवस के उपलक्ष्य में आयुष मंत्रालय लगातार योग जागरूकता अभियान चला रहा है। इसी कड़ी में मंत्रालय ने माइग्रेन जैसी आम समस्या के लिए योग-आधारित प्राकृतिक समाधान इंस्टाग्राम पर साझा किए।
माइग्रेन होने के आधुनिक कारण क्या हैं?
मोबाइल और कंप्यूटर स्क्रीन के सामने लंबे समय तक बैठना, गलत मुद्रा में काम करना, अनियमित नींद और लगातार मानसिक तनाव माइग्रेन के प्रमुख आधुनिक कारण हैं। ये कारक गर्दन, कंधे और सिर की मांसपेशियों में तनाव पैदा कर माइग्रेन के दौरे को ट्रिगर करते हैं।
क्या योग माइग्रेन की दवाओं का विकल्प है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, योग माइग्रेन का पूरक उपाय है, न कि दवाओं का पूर्ण विकल्प। नियमित योगाभ्यास दीर्घकाल में माइग्रेन की तीव्रता और आवृत्ति को कम करने में मदद कर सकता है, लेकिन गंभीर मामलों में चिकित्सकीय परामर्श आवश्यक है।
राष्ट्र प्रेस
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