25 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

वीरभद्रासन में इन 5 गलतियों से बचें — सही तरीका और फायदे जानें

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
वीरभद्रासन में इन 5 गलतियों से बचें — सही तरीका और फायदे जानें

सारांश

वीरभद्रासन शरीर को मज़बूती और संतुलन देने वाला शक्तिशाली योगासन है — लेकिन घुटने की गलत स्थिति, ढीली भुजाएँ और असंतुलित भार जैसी 5 आम गलतियाँ इसे फायदेमंद से नुकसानदेह बना सकती हैं। जानें सही तकनीक।

मुख्य बातें

वीरभद्रासन पैरों को मज़बूती, शरीर को संतुलन और कंधों को सक्रियता देने वाला प्रमुख योगासन है।
आगे वाले घुटने को टखने के ठीक ऊपर रखें — न आगे, न अंदर की ओर — अन्यथा जोड़ पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
दोनों भुजाएँ जमीन के समानांतर और कंधे कानों से दूर रखें ताकि मुद्रा सही बने।
शरीर का भार दोनों पैरों पर संतुलित रखें और पीछे वाले पैर को मैट पर मज़बूती से टिकाएँ।
घुटने, कूल्हे या कमर की तकलीफ हो तो प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ की देखरेख में ही अभ्यास करें।

वीरभद्रासन योग के सबसे प्रभावशाली स्थायी आसनों में से एक है, जो पैरों को मज़बूती देने, शरीर का संतुलन सुधारने और कंधों को सक्रिय रखने में सहायक माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस आसन का पूरा लाभ तभी मिलता है जब मुद्रा एकदम सटीक हो — एक छोटी-सी चूक भी घुटनों, कंधों और कमर पर अनावश्यक दबाव डाल सकती है।

वीरभद्रासन क्यों है ख़ास

नियमित योग अभ्यास से शरीर में लचीलापन बढ़ता है, मांसपेशियाँ मज़बूत होती हैं और मानसिक शांति मिलती है। वीरभद्रासन इसी अभ्यास का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। यह आसन जांघों, पिंडलियों और कंधों की मांसपेशियों को एक साथ सक्रिय करता है, जिससे पूरे शरीर की कार्यक्षमता बेहतर होती है। गौरतलब है कि इसे सही तकनीक के बिना करने से लाभ की जगह चोट का जोखिम बढ़ जाता है।

सामान्य गलतियाँ जो अक्सर होती हैं

पहली आम गलती यह है कि अभ्यासी अपनी भुजाओं को ढीला छोड़ देते हैं या कंधों को कानों की तरफ उठा लेते हैं। इससे शरीर की पूरी मुद्रा बिगड़ जाती है। सही तरीके में दोनों भुजाओं को सक्रिय रखते हुए जमीन के समानांतर फैलाना चाहिए और कंधों को कानों से दूर रखना चाहिए।

दूसरी बड़ी गलती आगे वाले घुटने की गलत स्थिति है। कुछ लोग घुटने को टखने से आगे निकाल देते हैं, तो कुछ का घुटना अंदर की ओर झुक जाता है — दोनों स्थितियाँ घुटने के जोड़ पर अतिरिक्त दबाव डालती हैं। इसलिए आगे वाले घुटने को टखने के ठीक ऊपर बनाए रखना अनिवार्य है।

तीसरी गलती धड़ को आगे झुकाना है। आसन के दौरान शरीर का ऊपरी हिस्सा सीधा और छाती खुली रहनी चाहिए। चौथी गलती शरीर का पूरा भार केवल एक पैर पर डालना है — सही मुद्रा में दोनों पैरों पर भार संतुलित होना चाहिए। पाँचवीं सामान्य त्रुटि पीछे वाले पैर को मैट से उठाना है, जो स्थिरता को कम करती है।

सही तरीके से करें वीरभद्रासन

सबसे पहले मैट पर सीधे खड़े हो जाएँ। दोनों पैरों के बीच उचित दूरी बनाएँ — एक पैर को बाहर की ओर मोड़ें और दूसरे पैर को थोड़ा अंदर की ओर रखें। दोनों हाथों को कंधों की ऊँचाई पर फैलाएँ, ताकि वे जमीन के समानांतर रहें।

इसके बाद आगे वाले घुटने को मोड़ें और सुनिश्चित करें कि वह टखने के ठीक ऊपर रहे। पीछे वाले पैर का तलवा और बाहरी किनारा मैट पर मज़बूती से टिका रहे। छाती खुली, कंधे नीचे और दोनों कूल्हे समतल रहें। शरीर का भार दोनों पैरों पर बराबर बाँटें और सामने की ओर दृष्टि स्थिर रखें।

कितनी देर करें और क्या सावधानी बरतें

इस मुद्रा में अपनी क्षमता के अनुसार कुछ देर रुकें — शुरुआती अभ्यासी 20 से 30 सेकंड से शुरुआत कर सकते हैं। इसके बाद धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लौटें और दूसरी तरफ भी यही प्रक्रिया दोहराएँ ताकि शरीर का संतुलन बना रहे।

जिन लोगों को घुटने, कूल्हे या कमर में दर्द रहता हो, वे इस आसन को किसी प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ की देखरेख में ही करें। सही अभ्यास के साथ नियमित वीरभद्रासन शरीर को दीर्घकालिक लाभ प्रदान करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस विषय का असली महत्त्व यह है कि भारत में योग का विस्तार तेज़ी से हुआ है जबकि प्रशिक्षित मार्गदर्शन की पहुँच सीमित है। घर पर वीडियो देखकर योग सीखने वालों की बड़ी संख्या तकनीकी त्रुटियों के कारण चोट का शिकार होती है। ऐसे में सही मुद्रा की जानकारी केवल फिटनेस टिप नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सचेतनता का हिस्सा है।
RashtraPress
25 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वीरभद्रासन क्या है और इसके क्या फायदे हैं?
वीरभद्रासन एक स्थायी योगासन है जो पैरों की मांसपेशियों को मज़बूत करता है, शरीर का संतुलन सुधारता है और कंधों को सक्रिय रखता है। नियमित अभ्यास से जांघों, पिंडलियों और कंधों की कार्यक्षमता बेहतर होती है।
वीरभद्रासन में घुटने की सही स्थिति क्या होनी चाहिए?
आगे वाले घुटने को हमेशा टखने के ठीक ऊपर रखना चाहिए — न टखने से आगे, न अंदर की ओर झुका हुआ। गलत स्थिति में घुटने के जोड़ पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है जिससे चोट का जोखिम बढ़ जाता है।
वीरभद्रासन करते समय हाथों और कंधों की सही मुद्रा क्या है?
दोनों भुजाओं को सक्रिय रखते हुए जमीन के समानांतर फैलाना चाहिए। कंधों को कानों से दूर और नीचे की ओर रखें — कंधे ऊपर उठाने से शरीर की मुद्रा बिगड़ती है और गर्दन पर दबाव बढ़ता है।
वीरभद्रासन कितनी देर तक करना चाहिए?
शुरुआती अभ्यासी 20 से 30 सेकंड प्रत्येक तरफ से शुरुआत कर सकते हैं। अभ्यास के साथ-साथ समय बढ़ाया जा सकता है। आसन पूरा होने पर दूसरी तरफ भी यही प्रक्रिया दोहराना ज़रूरी है ताकि दोनों तरफ का संतुलन बना रहे।
किन लोगों को वीरभद्रासन करते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए?
जिन लोगों को घुटने, कूल्हे या कमर में दर्द रहता हो, उन्हें यह आसन किसी प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ की देखरेख में ही करना चाहिए। बिना मार्गदर्शन के गलत मुद्रा में अभ्यास करने से चोट का जोखिम रहता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 1 साल पहले