4 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

गरुड़ासन रोज़ करें: हाथ-पैर होंगे मज़बूत, शरीर की जकड़न और अकड़न होगी दूर

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
गरुड़ासन रोज़ करें: हाथ-पैर होंगे मज़बूत, शरीर की जकड़न और अकड़न होगी दूर

सारांश

गरुड़ासन सिर्फ एक योगमुद्रा नहीं — यह शरीर की जकड़न, मांसपेशियों की कमज़ोरी और एकाग्रता की कमी का एक साथ समाधान है। आयुष मंत्रालय की सिफारिश पर आधारित यह आसन बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी के लिए उपयोगी है।

मुख्य बातें

गरुड़ासन को अंग्रेज़ी में Eagle Pose कहते हैं; इसका नाम संस्कृत शब्द 'गरुड़' (चील) से आया है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार यह आसन टखनों, पिंडलियों, जाँघों और कंधों की मांसपेशियों को मज़बूत बनाता है।
पैरों-कूल्हों की जकड़न और कंधों-ऊपरी पीठ की अकड़न दूर करने में सहायक है।
नसों को सक्रिय कर नर्वस सिस्टम को बेहतर बनाता है और एकाग्रता बढ़ाता है।
रोज़ तीन से पाँच चक्र करने की सलाह; घुटने, टखने या कंधे में हालिया चोट होने पर यह आसन न करें।

गरुड़ासन (Eagle Pose) एक प्रभावशाली योगासन है जो शरीर को लचीलापन, संतुलन और मज़बूती प्रदान करता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, इस आसन के नियमित अभ्यास से हाथ-पैर की मांसपेशियाँ सुदृढ़ होती हैं और शरीर की जकड़न धीरे-धीरे दूर होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों से लेकर वयस्कों तक, सभी के लिए यह आसन अत्यंत लाभकारी है।

गरुड़ासन क्या है और इसका नाम कैसे पड़ा

संस्कृत में 'गरुड़' का अर्थ होता है 'चील' — वह विशाल पक्षी जो हिंदू पौराणिक कथाओं में भगवान विष्णु का वाहन है। इस आसन में शरीर की मुद्रा चील के समान होती है, इसीलिए इसे गरुड़ासन कहा जाता है। अंग्रेज़ी में इसे Eagle Pose के नाम से जाना जाता है। यह आसन शरीर और मन दोनों की एकाग्रता को परखता है।

गरुड़ासन के प्रमुख स्वास्थ्य लाभ

आयुष मंत्रालय के अनुसार, गरुड़ासन के नियमित अभ्यास से निम्नलिखित लाभ मिलते हैं:

टखनों, पिंडलियों, जाँघों और कंधों की मांसपेशियाँ मज़बूत होती हैं। पैरों और कूल्हों की जकड़न दूर होती है तथा लचीलापन बढ़ता है। कंधों और ऊपरी पीठ की अकड़न में राहत मिलती है। इसके अलावा, नसों को सक्रिय कर नर्वस सिस्टम को बेहतर बनाने में भी यह आसन सहायक है। संतुलन और एकाग्रता में उल्लेखनीय सुधार होता है।

गरुड़ासन करने की सही विधि

सबसे पहले ताड़ासन की मुद्रा में सीधे खड़े हो जाएँ और सामान्य रूप से साँस लेते रहें। इसके बाद घुटनों को हल्का मोड़ें और दोनों हाथ सामने की ओर लाएँ।

अब पूरे शरीर का भार दाएँ पैर पर केंद्रित करें और बाएँ पैर को ऊपर उठाकर दाईं टाँग के आगे से घुमाते हुए पीछे की ओर ले जाएँ — इस स्थिति में बाईं जाँघ दाईं जाँघ के ऊपर रहेगी। इसके बाद दोनों बाज़ुओं को कोहनी से मोड़कर क्रॉस करें; बाईं बाज़ू को दाईं बाज़ू के ऊपर रखें और दोनों हथेलियों को नमस्कार मुद्रा में लाने का प्रयास करें।

जितनी देर संभव हो इस मुद्रा में रहें, फिर धीरे-धीरे प्रारंभिक स्थिति में लौट आएँ। इस प्रकार तीन से पाँच चक्र किए जा सकते हैं।

किन्हें सावधानी बरतनी चाहिए

यह आसन शुरुआती अभ्यासकर्ताओं को थोड़ा कठिन लग सकता है, किंतु नियमित अभ्यास से यह सहज हो जाता है। घुटने, टखने या कंधे में हाल ही में चोट लगी हो तो यह आसन न करें। किसी भी नए योगाभ्यास को शुरू करने से पहले प्रशिक्षित योग प्रशिक्षक अथवा चिकित्सक से परामर्श लेना उचित रहता है।

बच्चों के विकास में गरुड़ासन की भूमिका

विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए योग एक सरल एवं प्रभावी माध्यम है। गरुड़ासन विशेष रूप से बच्चों में एकाग्रता, संतुलन और शारीरिक समन्वय विकसित करने में सहायक है। स्वस्थ जीवनशैली के लिए रोज़ाना योगाभ्यास और संतुलित आहार का संयोजन दीर्घकालिक लाभ देता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान देना ज़रूरी है कि भारत में योग-शिक्षा की पहुँच अभी भी शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों तक सीमित है। ग्रामीण भारत में प्रशिक्षित योग प्रशिक्षकों की भारी कमी है, जिससे गलत तरीके से आसन करने पर चोट का जोखिम बढ़ता है। सरकार यदि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से प्रशिक्षित योग प्रशिक्षकों की तैनाती करे, तो इस तरह के आसनों का वास्तविक जन-स्वास्थ्य लाभ कहीं अधिक व्यापक हो सकता है।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गरुड़ासन क्या है और इसे क्यों करना चाहिए?
गरुड़ासन एक संतुलन-आधारित योगासन है जिसमें शरीर को चील की मुद्रा में रखा जाता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार यह आसन हाथ-पैर की मांसपेशियों को मज़बूत करता है, जकड़न दूर करता है और एकाग्रता बढ़ाता है।
गरुड़ासन करने की सही विधि क्या है?
ताड़ासन में खड़े होकर घुटने हल्के मोड़ें, फिर बाएँ पैर को दाईं टाँग पर लपेटें और बाज़ुओं को क्रॉस कर नमस्कार मुद्रा में लाएँ। इस स्थिति में यथासंभव रुकें और तीन से पाँच चक्र दोहराएँ।
गरुड़ासन के क्या-क्या फायदे हैं?
यह आसन टखनों, पिंडलियों, जाँघों और कंधों को मज़बूत बनाता है। साथ ही पैरों-कूल्हों की जकड़न, कंधों-पीठ की अकड़न दूर होती है और नर्वस सिस्टम बेहतर होता है।
गरुड़ासन किन्हें नहीं करना चाहिए?
जिन लोगों के घुटने, टखने या कंधे में हाल ही में चोट लगी हो, उन्हें यह आसन नहीं करना चाहिए। किसी भी नए योगाभ्यास से पहले प्रशिक्षित योग प्रशिक्षक या चिकित्सक से परामर्श लेना उचित है।
क्या गरुड़ासन बच्चों के लिए फायदेमंद है?
हाँ, विशेषज्ञों के अनुसार गरुड़ासन बच्चों में शारीरिक समन्वय, संतुलन और एकाग्रता विकसित करने में विशेष रूप से सहायक है। यह उनके समग्र शारीरिक विकास के लिए एक सरल और प्रभावी योगाभ्यास है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 महीने पहले
  2. 4 महीने पहले
  3. 7 महीने पहले
  4. 7 महीने पहले
  5. 8 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 1 साल पहले