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धनुरासन में ये 5 गलतियाँ पड़ सकती हैं भारी — मोरारजी देसाई योग संस्थान की चेतावनी

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धनुरासन में ये 5 गलतियाँ पड़ सकती हैं भारी — मोरारजी देसाई योग संस्थान की चेतावनी

सारांश

धनुरासन शरीर को धनुष की आकृति देने वाला शक्तिशाली आसन है, लेकिन गलत तकनीक से कंधे, घुटने और पीठ चोटिल हो सकते हैं। मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान के दिशानिर्देशों के आधार पर जानिए वे 5 भूलें जो इस आसन को फायदेमंद की बजाय नुकसानदेह बना देती हैं।

मुख्य बातें

धनुरासन पाचन सुधारने, पीठ दर्द कम करने और शरीर को मज़बूत बनाने में सहायक है — मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान के अनुसार।
टखनों पर ढीली पकड़ से संतुलन बिगड़ता है और कंधों पर अनावश्यक खिंचाव आता है।
घुटनों के बीच हिप्स के बराबर की दूरी रखें; जाँघों की ताकत से पैर उठाएँ, सिर्फ घुटनों पर जोर न डालें।
आसन में 15 से 20 सेकंड रुकें और साँस सामान्य रखें — साँस रोकने से ऑक्सीजन की कमी हो सकती है।
उच्च रक्तचाप, हर्निया, अल्सर, गंभीर पीठ दर्द और गर्भावस्था में धनुरासन वर्जित है।
शुरुआत हमेशा खाली पेट , योग मैट पर और किसी योग गुरु के मार्गदर्शन में करें।

धनुरासन (बो पोज़) को योग के सर्वाधिक प्रभावशाली आसनों में गिना जाता है। मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान के अनुसार यह आसन पाचन तंत्र को दुरुस्त करने, पीठ दर्द घटाने और पूरे शरीर को मज़बूती देने में सहायक है। हालाँकि विशेषज्ञों का कहना है कि गलत तकनीक से इसका अभ्यास करने पर कंधे, घुटने और पीठ में गंभीर चोट का जोखिम बढ़ जाता है।

टखनों की पकड़ में ढिलाई — सबसे आम भूल

धनुरासन में सबसे अधिक देखी जाने वाली गलती है टखनों पर कमज़ोर पकड़। जब दोनों हाथों से टखनों को भीतर की ओर से मज़बूती से नहीं पकड़ा जाता, तो शरीर का संतुलन बिगड़ता है और कंधों पर अनावश्यक खिंचाव आ जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार कंधों और टखनों के बीच एक सीधा तनाव बनाए रखना ज़रूरी है — तभी शरीर सही 'धनुष' की आकृति ग्रहण कर पाता है। कंधों को पीछे की ओर खींचकर रखें और पकड़ ढीली न पड़ने दें।

घुटनों पर अनुचित दबाव

कई अभ्यासकर्ता घुटनों को आवश्यकता से अधिक चौड़ा कर लेते हैं या उन्हें ज़मीन से ऊपर उठाने के लिए अत्यधिक ज़ोर लगाते हैं। इससे घुटने के लिगामेंट पर दबाव पड़ता है और दर्द शुरू हो सकता है। सही विधि यह है कि घुटनों के बीच हिप्स के बराबर की दूरी बनाए रखें और पैरों को ऊपर उठाते समय जाँघों की शक्ति का उपयोग करें। जिन लोगों को पहले से घुटने की समस्या है, उन्हें किसी योग विशेषज्ञ की देखरेख में ही इस आसन का अभ्यास करना चाहिए।

जाँघों और कोर मसल्स को निष्क्रिय छोड़ना

धनुरासन केवल पीठ का आसन नहीं है — इसमें जाँघें और कोर मसल्स भी उतनी ही भूमिका निभाते हैं। यदि जाँघें सक्रिय न हों, तो पूरा भार पीठ के निचले हिस्से पर आ जाता है, जिससे कमर दर्द बढ़ सकता है। अभ्यास के दौरान जाँघों को अंदर की ओर सक्रिय रखें और नितंबों को हल्का कसा हुआ रखें। पैरों को पीछे खींचते समय जाँघों में हल्का खिंचाव महसूस होना चाहिए — यही सही संकेत है।

झटके से शरीर उठाना और मांसपेशियों का तालमेल न होना

शरीर को ऊपर उठाते समय बहुत से लोग केवल पीठ की ताकत पर निर्भर रहते हैं और शरीर को झटके से ऊपर उठा लेते हैं। इससे पीठ में ऐंठन आ सकती है। सही तालमेल यह है कि जाँघों और नितंबों की मांसपेशियाँ एक साथ काम करें — जब पैर पीछे धकेले जाते हैं, तो छाती स्वाभाविक रूप से ऊपर उठती है। धीरे-धीरे और नियंत्रित तरीके से उठें, जल्दबाज़ी बिल्कुल न करें।

साँस रोकना — एक गंभीर तकनीकी चूक

अनेक अभ्यासकर्ता आसन की स्थिति में साँस रोक लेते हैं, जिससे शरीर में ऑक्सीजन की कमी और घबराहट हो सकती है। सही तकनीक के अनुसार श्वास लेते हुए शरीर ऊपर उठाएँ और श्वास छोड़ते हुए अंतिम स्थिति में आएँ। आसन में रहते हुए सामान्य रूप से साँस लेना जारी रखें। 15 से 20 सेकंड रुकने के बाद साँस छोड़ते हुए धीरे-धीरे नीचे आएँ।

किन्हें धनुरासन से बचना चाहिए

विशेषज्ञों के अनुसार जिन लोगों को उच्च रक्तचाप, हर्निया, अल्सर, गंभीर पीठ दर्द या हाल ही में पेट का ऑपरेशन हुआ हो, उन्हें यह आसन नहीं करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को भी इससे पूरी तरह दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती है। शुरुआत में हमेशा खाली पेट और योग मैट पर अभ्यास करें और किसी अनुभवी योग गुरु के मार्गदर्शन में ही शुरू करें।

यह ऐसे समय में विशेष रूप से प्रासंगिक है जब घर पर योग अभ्यास करने वालों की संख्या तेज़ी से बढ़ी है और ऑनलाइन वीडियो देखकर बिना प्रशिक्षण के आसन करना आम हो गया है। सही तकनीक और उचित सावधानियाँ अपनाकर धनुरासन के पूर्ण लाभ उठाए जा सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली अंतर तब आएगा जब डिजिटल योग प्लेटफॉर्म सुरक्षा चेतावनियों को कंटेंट के साथ उतनी ही प्रमुखता से प्रस्तुत करें। गलत तकनीक से सबसे पहले वे लोग प्रभावित होते हैं जो बिना आधार-आसनों की तैयारी के सीधे उन्नत मुद्राओं में कूद पड़ते हैं।
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धनुरासन क्या है और इसके क्या फायदे हैं?
धनुरासन, जिसे 'बो पोज़' भी कहते हैं, योग का एक उन्नत बैकबेंड आसन है जिसमें शरीर धनुष की आकृति लेता है। मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान के अनुसार यह पाचन सुधारने, पीठ दर्द कम करने, जाँघों को मज़बूत बनाने और पूरे शरीर को स्ट्रेच करने में सहायक है।
धनुरासन करते समय सबसे आम गलतियाँ कौन-सी हैं?
पाँच सबसे आम गलतियाँ हैं — टखनों पर ढीली पकड़, घुटनों पर अनुचित दबाव, जाँघों और कोर मसल्स को निष्क्रिय छोड़ना, झटके से शरीर उठाना और आसन के दौरान साँस रोकना। इनमें से कोई भी गलती कंधे, घुटने या पीठ में चोट का कारण बन सकती है।
धनुरासन में साँस कैसे लेनी चाहिए?
सही तकनीक यह है कि श्वास लेते हुए शरीर ऊपर उठाएँ और श्वास छोड़ते हुए अंतिम स्थिति में आएँ। आसन में रहते हुए सामान्य रूप से साँस लेना जारी रखें और 15 से 20 सेकंड बाद साँस छोड़ते हुए धीरे-धीरे नीचे आएँ।
किन लोगों को धनुरासन नहीं करना चाहिए?
उच्च रक्तचाप, हर्निया, अल्सर, गंभीर पीठ दर्द से पीड़ित लोगों और हाल ही में पेट का ऑपरेशन करा चुके व्यक्तियों को धनुरासन नहीं करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को भी इससे पूरी तरह दूरी रखनी चाहिए।
धनुरासन सीखने का सही तरीका क्या है?
शुरुआत में हमेशा खाली पेट, योग मैट पर और किसी अनुभवी योग गुरु के मार्गदर्शन में अभ्यास करें। घुटने की पुरानी समस्या हो तो विशेषज्ञ की देखरेख अनिवार्य है। जाँघों और कोर को सक्रिय रखें और शरीर को धीरे-धीरे, नियंत्रित तरीके से उठाएँ।
राष्ट्र प्रेस
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