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क्या आकर्ण धनुरासन रीढ़ की हड्डियों के लिए वरदान और मांसपेशियों को मजबूत बनाता है?

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क्या आकर्ण धनुरासन रीढ़ की हड्डियों के लिए वरदान और मांसपेशियों को मजबूत बनाता है?

सारांश

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में रीढ़ की हड्डी और मांसपेशियों की समस्याएँ आम हो गई हैं। आकर्ण धनुरासन एक प्राचीन योग आसन है, जो इन समस्याओं का प्रभावी समाधान प्रदान करता है। यह रीढ़ को लचीला बनाता है और मांसपेशियों को मजबूत करता है। जानें इसके लाभ और कैसे करें इसका अभ्यास।

मुख्य बातें

आकर्ण धनुरासन रीढ़ को लचीला बनाता है।
यह मांसपेशियों को मजबूत करता है।
पाचन प्रणाली में सुधार करता है।
पीठ दर्द और जकड़न में राहत देता है।
दिन में 5-10 मिनट का अभ्यास करें।

नई दिल्ली, 2 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में ऑफिस की कुर्सी पर घंटों एक ही स्थिति में बैठना, अनियमित दिनचर्या और पोषक तत्वों की कमी से रीढ़ में दर्द और मांसपेशियों की कमजोरी एक आम समस्या बन चुकी है। इससे पीठ दर्द, जकड़न और पोषण में कमी की समस्याएँ बढ़ रही हैं। लेकिन प्राचीन योग का आसन आकर्ण धनुरासन इन समस्याओं का एक सरल और प्रभावी समाधान प्रस्तुत करता है।

आकर्ण धनुरासन रीढ़ को लचीला बनाने, मांसपेशियों को मजबूत करने और पूरे शरीर में संतुलन लाने में मदद करता है। नियमित अभ्यास से दर्द में राहत मिलती है और ऊर्जा में वृद्धि होती है।

मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा के अनुसार, आकर्ण धनुरासन एक ऐसा आसन है जो शरीर के विभिन्न हिस्सों को मजबूत और लचीला बनाता है। इसे धनुष और तीर की मुद्रा में किया जाता है, जिसमें एक पैर को हाथ से पकड़कर कान के पास लाया जाता है। लगातार अभ्यास से इसके कई स्वास्थ्य लाभ होते हैं।

आकर्ण धनुरासन सबसे पहले जांघों, कूल्हों और हैमस्ट्रिंग को मजबूत और लचीला बनाता है। इस आसन में पैर को ऊपर उठाने और खींचने की क्रिया से इन हिस्सों में खिंचाव आता है, जिससे मांसपेशियों की मजबूती बढ़ती है और दर्द की शिकायत कम होती है।

इस आसन का एक और महत्वपूर्ण लाभ रीढ़ की हड्डी को मिलता है। नियमित अभ्यास से रीढ़ में लचीलापन बढ़ता है और स्पाइनल कॉर्ड मजबूत होता है, जिससे पीठ दर्द, साइटिका और कमर की जकड़न जैसी समस्याओं में राहत मिलती है।

बैठे रहने की आदत वाले लोगों के लिए यह आसन विशेष रूप से लाभदायक है। कंधे और भुजाएं भी इस आसन से मजबूत होती हैं। पैर को पकड़ने और खींचने में कंधों और हाथों की मांसपेशियां सक्रिय रहती हैं, जिससे ऊपरी शरीर की ताकत बढ़ती है। यह आसन कंधों की जकड़न को दूर करने और पोस्चर सुधारने में मदद करता है। इसके अलावा, पाचन तंत्र पर भी आकर्ण धनुरासन का सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यह कब्ज और अपच की समस्या में सहायक है। पेट के अंगों पर दबाव डालने से पाचन क्रिया में सुधार होता है और गैस, ब्लोटिंग जैसी समस्याएँ कम होती हैं।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इस आसन को शुरू में योग प्रशिक्षक की निगरानी में सीखा जाए। गर्भवती महिलाएं, कमर या घुटने में गंभीर चोट वाले लोग इसे बिना सलाह के न करें। रोजाना 5-10 मिनट का अभ्यास करने से शरीर में ऊर्जा और संतुलन का अनुभव होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक है। यह आसन न केवल मांसपेशियों की मजबूती में मदद करता है, बल्कि रीढ़ की हड्डी के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। इसके नियमित अभ्यास से व्यक्ति की ऊर्जा और संतुलन में सुधार होता है, जो आज की जीवनशैली में जरूरी है।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आकर्ण धनुरासन करने से क्या लाभ होते हैं?
आकर्ण धनुरासन करने से रीढ़ की हड्डी में लचीलापन बढ़ता है, मांसपेशियों की मजबूती होती है, और पाचन क्रिया सुधरती है।
क्या गर्भवती महिलाएं आकर्ण धनुरासन कर सकती हैं?
गर्भवती महिलाओं को इसे करने से पहले अपने चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए।
आकर्ण धनुरासन के लिए कितनी बार अभ्यास करना चाहिए?
दिन में 5-10 मिनट का नियमित अभ्यास करना चाहिए।
क्या यह आसन पीठ दर्द में राहत देता है?
जी हां, नियमित अभ्यास से पीठ दर्द में राहत मिलती है।
आकर्ण धनुरासन को कैसे करना है?
इस आसन में एक पैर को हाथ से पकड़कर कान के पास लाना होता है।
राष्ट्र प्रेस
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