क्या भद्रासन महिलाओं के लिए है बेहद फायदेमंद?
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 18 जुलाई (राष्ट्र प्रेस)। शरीर और मन को स्वस्थ रखने का एक सरल और प्रभावी उपाय है योग। इसी क्रम में, एक विशेष योगासन है ‘भद्रासन’, जो मुख्यतः महिलाओं के लिए अत्यधिक लाभकारी है। यह आसन न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को सुधारता है, बल्कि मानसिक शांति भी प्रदान करता है। प्रतिदिन कुछ मिनट भद्रासन करने से तनाव में कमी आती है और कई स्वास्थ्य समस्याएं समाप्त होती हैं।
‘भद्र’ का अर्थ है शुभ और ‘आसन’ का अर्थ है बैठने की मुद्रा, जो मिलकर यह आसन शरीर को मजबूती प्रदान करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस आसन का उल्लेख कर चुके हैं कि भद्रासन से शरीर मजबूत होता है।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह आसन घुटनों, कूल्हों और रीढ़ की हड्डी को मजबूत करने में सहायक है। यह महावारी की ऐंठन को कम करने, गुर्दे, मूत्राशय और प्रोस्टेट के स्वास्थ्य को सुधारने में भी मददगार है। खासकर गर्भवती महिलाओं के लिए भद्रासन कूल्हों और जांघों की मांसपेशियों को मजबूत करता है, जिससे प्रसव में सहायता मिलती है। इसके अतिरिक्त, यह महावारी की समस्याओं को कम करने और तनाव को दूर करने में भी मदद करता है।
भद्रासन के नियमित अभ्यास से जांघों, घुटनों और कमर की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, जिससे शरीर में लचीलापन बढ़ता है और दर्द की समस्याएं कम होती हैं। यह पाचन तंत्र को भी सुधारता है, जिससे कब्ज, वात और अन्य पेट के विकारों से राहत मिलती है। यह आसन एकाग्रता में वृद्धि करता है, दिमाग को तेज करता है और सिरदर्द, कमर दर्द, अनिद्रा जैसी समस्याओं को कम करने में सहायक है। यह जोड़ों को मजबूत करता है और घुटने के दर्द को भी कम करता है।
आयुष मंत्रालय के आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर साझा किए गए एक वीडियो में भद्रासन करने की विधि का विस्तार से वर्णन किया गया है। इसके अनुसार, जमीन पर पालथी मारकर बैठें। दोनों पैरों के तलवे आपस में मिलाएं और हाथों से उन्हें पकड़ें। कोहनियों से घुटनों पर हल्का दबाव डालें ताकि वे जमीन की ओर जाएं। रीढ़ को सीधा रखें, कंधों को ढीला छोड़ें और सामने देखें। गहरी सांस लें और 2-5 मिनट तक इस मुद्रा में रहें।
भद्रासन केवल महिलाओं के लिए नहीं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का खजाना है। इसके नियमित अभ्यास से कई समस्याएं समाप्त होती हैं। हालांकि, विशेषज्ञ कुछ सावधानियों का पालन करने की सलाह देते हैं, जैसे इसे खाली पेट करना। यदि घुटने या कूल्हों में गंभीर दर्द हो तो डॉक्टर से परामर्श लें। शुरुआत में ज्यादा जोर न दें और अभ्यास का समय धीरे-धीरे बढ़ाएं।