27 अक्टूबर 2026
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यूपी एमएलसी मतगणना 2026: 11 सीटों पर सात जिलों में काउंटिंग जारी, BJP-सपा के लिए 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बड़ी परीक्षा

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यूपी एमएलसी मतगणना 2026: 11 सीटों पर सात जिलों में काउंटिंग जारी, BJP-सपा के लिए 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बड़ी परीक्षा

सारांश

उत्तर प्रदेश में 2027 की असली लड़ाई से पहले एक अहम पूर्वाभ्यास। विधान परिषद की 11 सीटों पर मतगणना जारी है — भाजपा अपनी पकड़ बचाने में लगी है, सपा शिक्षक वर्ग में सेंध लगाने की उम्मीद में। नतीजे दोनों दलों की ज़मीनी ताकत का पहला बड़ा संकेत देंगे।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों पर 27 अक्टूबर 2026 को सुबह आठ बजे से मतगणना शुरू हुई।
लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ, झांसी, बरेली और गोरखपुर — सात जिलों में मतगणना केंद्र बनाए गए हैं।
पाँच स्नातक खंड और छह शिक्षक खंड निर्वाचन क्षेत्रों की गिनती एक साथ हो रही है; निर्वाचन क्षेत्र प्रदेश के 72 जिलों तक फैले हैं।
वाराणसी में डीआईजी शिवहरि मीना के अनुसार, तीन स्तरीय सुरक्षा घेरा और ड्रोन-सीसीटीवी निगरानी की व्यवस्था है।
संजय त्रिपाठी के दावे के अनुसार, पिछली बार की तुलना में मतदान 9-10 प्रतिशत अधिक हुआ।
इन चुनावों को 2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का राजनीतिक पूर्वाभ्यास माना जा रहा है।

उत्तर प्रदेश विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की 11 सीटों पर 27 अक्टूबर 2026 को सुबह आठ बजे से मतगणना शुरू हो गई। लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ, झांसी, बरेली और गोरखपुर — इन सात जिलों में बनाए गए मतगणना केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतपत्रों की छंटाई और बंडल बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इन नतीजों को दोनों प्रमुख दलों के लिए राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।

मतगणना की प्रक्रिया और केंद्रों की व्यवस्था

मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के अनुसार, पाँच स्नातक खंड और छह शिक्षक खंड निर्वाचन क्षेत्रों की मतगणना एक साथ सात जिलों में आयोजित की जा रही है। सुबह आठ बजे स्ट्रांग रूम से बैलेट बॉक्स निकालकर निर्धारित मतगणना टेबलों तक पहुँचाए गए। सील की जाँच के बाद मतपेटियाँ खोली गईं और मतपत्रों की छंटाई शुरू हुई। विधान परिषद की इन 11 सीटों के निर्वाचन क्षेत्र प्रदेश के 72 जिलों तक फैले हैं।

लखनऊ में रमाबाई आंबेडकर रैली स्थल पर मतगणना के लिए बहुस्तरीय बैरिकेडिंग की गई है। बरेली-मुरादाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मतगणना संजय कम्युनिटी हॉल में हो रही है, जहाँ 17 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला होना है। यहाँ मतगणना स्थल से 100 मीटर की दूरी पर समर्थकों को रोकने की व्यवस्था की गई है।

सुरक्षा व्यवस्था: तीन स्तरीय घेराबंदी

वाराणसी में मतगणना की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर डीआईजी शिवहरि मीना ने बताया कि पुलिस प्रशासन ने तीन स्तरों पर सुरक्षा योजना तैयार की है — बाहरी, आंतरिक और आइसोलेशन घेरा। उन्होंने बताया कि ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों की मदद से निगरानी की जा रही है और सोशल मीडिया पर भी कड़ी नज़र रखी जा रही है। चुनाव जीतने वाले प्रत्याशी को विजय जुलूस निकालने की अनुमति नहीं होगी।

प्रत्याशियों की प्रतिक्रिया और दावे

गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रत्याशी डॉ. संजय त्रिपाठी ने जीत का भरोसा जताया। उनके अनुसार, पिछले चुनाव की तुलना में इस बार मतदान लगभग 9 से 10 प्रतिशत अधिक हुआ है। उन्होंने कहा कि पिछले 18 से 20 वर्षों में उठाई गई शिक्षकों की माँगें — विशेष रूप से पुरानी पेंशन की बहाली और वित्तविहीन शिक्षकों के लिए सम्मानजनक व्यवस्था — चुनाव के केंद्रीय मुद्दे रहे। उन्होंने यह भी बताया कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इन मुद्दों पर सैद्धांतिक सहमति जताई थी।

सपा के शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के प्रत्याशी सुशील कुमार ने मतगणना से पहले प्रशासन से चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी भी बाहरी दबाव को चुनाव प्रक्रिया पर असर नहीं डालना चाहिए। वहीं, लखनऊ स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रत्याशी अवनीश कुमार सिंह ने जीत का विश्वास जताया और कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं ने मतदान प्रक्रिया को सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

राजनीतिक महत्व: 2027 से पहले दोनों दलों की साख दाँव पर

भारतीय जनता पार्टी इन चुनावों में अपने मौजूदा प्रभाव और संगठनात्मक पकड़ को बरकरार रखने की कोशिश में है, जबकि समाजवादी पार्टी शिक्षक और स्नातक वर्ग में अपना जनाधार मज़बूत करना चाहती है। गौरतलब है कि शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाता परंपरागत रूप से स्वतंत्र रुझान के लिए जाने जाते हैं, जिससे इन सीटों के नतीजे पार्टी संगठनों की ज़मीनी ताकत का सटीक आकलन देते हैं। इन चुनावों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले दल को 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले मनोवैज्ञानिक बढ़त मिल सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह है कि पुरानी पेंशन और वित्तविहीन शिक्षकों जैसे मुद्दों पर उसकी चुप्पी क्या संदेश दे रही है। सपा के लिए यह मौका है, लेकिन 'सैद्धांतिक सहमति' और ठोस नीतिगत वादे में फर्क होता है — मतदाता वह फर्क समझते हैं। नतीजे चाहे जो भी हों, 72 जिलों तक फैले इन निर्वाचन क्षेत्रों का जनादेश 2027 की रणनीति की नींव तय करेगा।
RashtraPress
27 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपी एमएलसी चुनाव 2026 में किन सीटों पर मतगणना हो रही है?
उत्तर प्रदेश विधान परिषद के पाँच स्नातक खंड और छह शिक्षक खंड निर्वाचन क्षेत्रों की कुल 11 सीटों पर 27 अक्टूबर 2026 को मतगणना हो रही है। ये निर्वाचन क्षेत्र प्रदेश के 72 जिलों तक फैले हैं।
मतगणना किन जिलों में हो रही है?
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के अनुसार, मतगणना लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ, झांसी, बरेली और गोरखपुर — इन सात जिलों में बनाए गए केंद्रों पर आयोजित की जा रही है।
इन चुनावों का राजनीतिक महत्व क्या है?
इन चुनावों को 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले BJP और सपा दोनों के लिए अहम राजनीतिक परीक्षा माना जा रहा है। बेहतर प्रदर्शन करने वाले दल को विधानसभा चुनाव से पहले मनोवैज्ञानिक बढ़त मिल सकती है।
सुरक्षा के क्या इंतजाम किए गए हैं?
वाराणसी में डीआईजी शिवहरि मीना के अनुसार तीन स्तरीय सुरक्षा घेरा — बाहरी, आंतरिक और आइसोलेशन — तैयार किया गया है। ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी हो रही है और सोशल मीडिया पर भी नज़र रखी जा रही है।
सपा और भाजपा के प्रत्याशियों ने क्या दावे किए हैं?
गोरखपुर-फैजाबाद से सपा प्रत्याशी डॉ. संजय त्रिपाठी ने कहा कि पिछली बार की तुलना में मतदान 9-10 प्रतिशत अधिक हुआ और पुरानी पेंशन जैसे मुद्दों ने शिक्षक मतदाताओं को एकजुट किया। लखनऊ स्नातक क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी अवनीश कुमार सिंह ने भी जीत का दावा किया।
राष्ट्र प्रेस
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