यूपी एमएलसी चुनाव 2026: भाजपा-सपा में प्रतिष्ठा की जंग, रामगोपाल ने किया मतदान; भाजपा बोली- सभी 11 सीटें जीतेंगे
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों के लिए 23 अक्टूबर 2026 को मतदान जारी है, जिसमें भारतीय जनता पार्टी (BJP) और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच सीधी प्रतिष्ठा की लड़ाई देखी जा रही है। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले इसे एक अहम राजनीतिक परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है। इटावा में सपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं सांसद रामगोपाल यादव ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जबकि लखनऊ में BJP के प्रदेश उपाध्यक्ष नीरज सिंह ने सभी 11 सीटें जीतने का दावा किया।
मतदान का विवरण और व्यवस्था
यह चुनाव पाँच खंड स्नातक और छह खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटों के लिए कराया जा रहा है। पूरे प्रदेश में 2,697 मतदान स्थल स्थापित किए गए हैं, जिन पर 14,81,310 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने के पात्र हैं। मतदान सुबह आठ बजे शुरू होकर शाम चार बजे तक चलेगा। लखनऊ में राजकीय इंटर कॉलेज (GIC) सहित अनेक केंद्रों पर मतदाताओं की भीड़ देखी गई। पहचान सत्यापन के बाद ही मतदाताओं को केंद्रों में प्रवेश दिया जा रहा है, और सुरक्षा व्यवस्था के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है। मतगणना 27 अक्टूबर 2026 को होगी।
भाजपा का दावा और नीरज सिंह का बयान
लखनऊ में मतदान के बाद BJP के प्रदेश उपाध्यक्ष नीरज सिंह ने पार्टी की जीत पर पूरा भरोसा जताया। उन्होंने कहा, 'हमें पूरा भरोसा है कि शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए हो रहे विधान परिषद चुनाव में हम सभी 11 सीटों पर जीत दर्ज करेंगे। हमने शिक्षा और शिक्षकों के हितों के लिए संघर्ष किया है और मेरा मानना है कि इसी के परिणामस्वरूप हमें जनता का विश्वास मिल रहा है।'
नीरज सिंह ने सपा और उसके नेता अखिलेश यादव पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'अखिलेश यादव कई सालों से सत्ता से बाहर हैं। उनके नेतृत्व में समाजवादी पार्टी ने केवल एक चुनाव जीता है। तब से, उन्हें लगातार हर चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है। यह कहना कि सभी चुनाव गलत तरीकों से जीते जा रहे हैं, लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल उठाने और उसका अपमान करने के बराबर है।'
सपा की भागीदारी और रामगोपाल यादव
समाजवादी पार्टी की ओर से राष्ट्रीय महासचिव एवं सांसद रामगोपाल यादव ने इटावा में अपना मत डाला। गौरतलब है कि शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाता मुख्यतः शिक्षित वर्ग से होते हैं, जिन्हें परंपरागत रूप से प्रभावशाली लॉबी माना जाता है। यह ऐसे समय में आया है जब दोनों प्रमुख दल अगले विधानसभा चुनाव से पहले जनसमर्थन जुटाने की कोशिश में हैं।
राजनीतिक महत्व
यूपी एमएलसी चुनाव, जो सामान्यतः राज्यव्यापी राजनीतिक रुझान का संकेत देते हैं, इस बार विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इन्हें आगामी विधानसभा चुनाव की पूर्वपीठिका माना जा रहा है। 11 सीटों पर दोनों पार्टियों का पूरा ज़ोर लगा है। विशेषज्ञों के अनुसार इन सीटों के नतीजे न केवल प्रदेश की राजनीतिक दिशा को रेखांकित करेंगे, बल्कि दोनों दलों के मनोबल पर भी असर डालेंगे। परिणाम 27 अक्टूबर 2026 को घोषित होने के बाद सियासी समीकरण और स्पष्ट होंगे।