29 अक्टूबर 2026
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यूपी एमएलसी चुनाव नतीजे: सपा ने भाजपा पर साधा निशाना, 'सरकार के दिन गिने-चुने'

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यूपी एमएलसी चुनाव नतीजे: सपा ने भाजपा पर साधा निशाना, 'सरकार के दिन गिने-चुने'

सारांश

यूपी एमएलसी चुनाव सिर्फ स्थानीय नतीजे नहीं थे — ये 2027 के विधानसभा चुनाव का पूर्वाभ्यास हैं। सपा की 5 सीटें और वाराणसी में 17,000+ वोटों की बढ़त ने पार्टी को आक्रामक तेवर दे दिए हैं, जबकि भाजपा की चुप्पी खुद एक सियासी संकेत है।

मुख्य बातें

29 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश में बैलेट पेपर से एमएलसी चुनावों के नतीजे आए।
सपा ने आवंटित 11 सीटों में से 5 सीटों पर जीत दर्ज की।
वाराणसी में सपा प्रत्याशी की बढ़त 17,000 वोटों से अधिक रही।
सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा — 'भाजपा सरकार के दिन अब गिने-चुने रह गए हैं।' सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने भाजपा पर मतदान प्रक्रिया धीमी करने और प्रशासन के दुरुपयोग का आरोप लगाया।
अगले 2027 विधानसभा चुनाव से पहले ये नतीजे दोनों दलों के लिए जमीनी ताकत की पहली परीक्षा मानी जा रही है।

उत्तर प्रदेश में 29 अक्टूबर 2026 को बैलेट पेपर से हुए एमएलसी चुनावों के नतीजे सामने आते ही सियासी जुबानी जंग तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) के नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर एकजुट होकर निशाना साधा है — चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप, प्रशासन के दुरुपयोग और सरकारी नीतियों की विफलता को लेकर। सपा ने दावा किया कि लखनऊ समेत कई सीटों पर उसकी जीत जनता के असंतोष की सीधी अभिव्यक्ति है।

सपा के मुख्य आरोप और प्रतिक्रियाएँ

सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने भाजपा पर करारा तंज कसते हुए कहा कि पार्टी अन्य राज्यों में कांग्रेस की हार पर जश्न मना रही है, लेकिन उत्तर प्रदेश में अपनी पराजय और वाराणसी के चुनाव परिणामों पर चुप्पी साधे है। उन्होंने कहा, 'दूसरों के दुख में खुशी तलाशने वालों को ऐसा करने दीजिए, लेकिन भाजपा को यह भी बताना चाहिए कि उत्तर प्रदेश में उसे हार का सामना क्यों करना पड़ा।'

चांद ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने मतदान प्रक्रिया को जानबूझकर धीमा किया और कुछ स्थानों पर प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग कर चुनाव परिणामों को प्रभावित करने की कोशिश की। ये आरोप अभी तक स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं।

अवधेश प्रसाद का सरकार पर हमला

अयोध्या से सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने एमएलसी नतीजों को भाजपा सरकार के विरुद्ध जनता के गहरे असंतोष का प्रतीक बताया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'भाजपा सरकार के दिन अब गिने-चुने रह गए हैं। समाज का हर वर्ग — किसान, नौजवान, व्यापारी — सरकार की नीतियों और फैसलों से परेशान है।' प्रसाद के अनुसार, भाजपा सरकार केवल अगले चुनाव की घोषणा होने तक ही सत्ता में रह पाएगी।

उन्होंने वरिष्ठ सपा नेता आजम खान के प्रति पार्टी की एकजुटता भी जताई और कहा कि उनके विरुद्ध जो भी कार्रवाई हुई, वह भाजपा सरकार की राजनीतिक मानसिकता को दर्शाती है।

सपा की पाँच सीटों पर जीत का दावा

सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने बताया कि पार्टी को आवंटित 11 सीटों में से 5 सीटों पर जीत हासिल हुई है। उन्होंने जीत के अंतर को संगठन की मजबूती का प्रमाण बताते हुए कहा कि जहाँ कुछ उम्मीदवारों को 2,000 वोट भी नहीं मिलते, वहाँ सपा के प्रत्याशी 17,000 से 18,000 वोटों के भारी अंतर से जीत रहे हैं।

वर्मा ने कहा कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव हमेशा से यह सुनिश्चित करने पर जोर देते रहे हैं कि सवाल सिर्फ सीटें लड़ने का नहीं, बल्कि हर सीट जीतने का है। कांग्रेस के प्रदर्शन पर टिप्पणी से उन्होंने परहेज किया, यह कहते हुए कि यह उनका अंदरूनी मामला है।

वाराणसी में सपा प्रत्याशी की बड़ी बढ़त

सपा सांसद वीरेंद्र सिंह ने वाराणसी के नतीजों पर जानकारी देते हुए कहा कि सपा प्रत्याशी की बढ़त 17,000 वोटों से अधिक हो चुकी है और अब केवल विजय प्रमाण पत्र मिलना बाकी है। उन्होंने यह भी बताया कि अखिलेश यादव के निर्देश पर विभिन्न जिलों से आए कार्यकर्ता, विधायक और पार्टी पदाधिकारी पिछले 24 घंटों से मतगणना स्थल पर अनुशासन के साथ डटे हुए हैं।

आगे की सियासत

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव 2027 में प्रस्तावित हैं, और ये एमएलसी नतीजे दोनों दलों के लिए जमीनी हकीकत की पहली जाँच मानी जा रही है। सपा इन परिणामों को अपनी संगठनात्मक पुनरुत्थान की कहानी के रूप में पेश कर रही है, जबकि भाजपा की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। आने वाले हफ्तों में दोनों दलों की रणनीति और अधिक स्पष्ट होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन वाराणसी जैसी प्रतीकात्मक सीट पर 17,000 वोटों की बढ़त भाजपा के लिए असुविधाजनक संकेत जरूर है — खासकर तब जब 2027 महज कुछ महीने दूर है। सपा का आक्रामक बयानबाजी का तरीका बताता है कि वह इन नतीजों को महज जीत नहीं, बल्कि एक राजनीतिक आख्यान में तब्दील करना चाहती है। असली सवाल यह है कि क्या बैलेट पेपर चुनाव की जमीन ईवीएम आधारित विधानसभा चुनाव में भी उतनी ही अनुकूल रहेगी — और इसका जवाब अभी बाकी है।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपी एमएलसी चुनाव 2026 के नतीजे क्या रहे?
29 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश में बैलेट पेपर से हुए एमएलसी चुनावों में समाजवादी पार्टी ने अपनी आवंटित 11 सीटों में से 5 पर जीत हासिल की। वाराणसी सीट पर सपा प्रत्याशी की बढ़त 17,000 वोटों से अधिक रही।
सपा ने भाजपा पर क्या आरोप लगाए?
सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने आरोप लगाया कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने मतदान प्रक्रिया जानबूझकर धीमी की और कुछ स्थानों पर प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग कर परिणामों को प्रभावित करने की कोशिश की। ये आरोप अभी तक स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं।
अवधेश प्रसाद ने 'सरकार के दिन गिने-चुने' क्यों कहा?
अयोध्या से सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने एमएलसी नतीजों को जनता के असंतोष का संकेत बताते हुए कहा कि समाज का हर वर्ग भाजपा सरकार की नीतियों और फैसलों से परेशान है। उनके अनुसार, भाजपा सरकार केवल अगले विधानसभा चुनाव की घोषणा तक ही सत्ता में टिकी रह पाएगी।
एमएलसी चुनाव का 2027 विधानसभा चुनाव पर क्या असर होगा?
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में प्रस्तावित हैं, और एमएलसी नतीजे दोनों दलों के लिए जमीनी ताकत की पहली परीक्षा मानी जा रही है। सपा इन परिणामों को संगठनात्मक मजबूती के प्रमाण के रूप में पेश कर रही है, जबकि भाजपा की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी तक सामने नहीं आई है।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की इन चुनावों में क्या भूमिका रही?
सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा के अनुसार, अखिलेश यादव ने पार्टी को हर आवंटित सीट जीतने के लिए प्रेरित किया। सांसद वीरेंद्र सिंह ने बताया कि अखिलेश के निर्देश पर कार्यकर्ता और विधायक 24 घंटे मतगणना स्थल पर अनुशासन के साथ तैनात रहे।
राष्ट्र प्रेस
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