जम्मू-कश्मीर DGP नलिन प्रभात बोले — शहीदों का बलिदान पुलिस को शांति और युवा सशक्तिकरण के लिए करता है प्रेरित
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक (DGP) नलिन प्रभात ने गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को श्रीनगर में कहा कि शहीद जवानों का बलिदान पुलिस बल को शांति स्थापित करने और युवाओं को खेल जैसी रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने के लिए निरंतर प्रेरित करता है। वे जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा आयोजित 'पैडल थ्रू पैराडाइज' साइकिल रेस के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
आयोजन का विवरण और भागीदारी
'पैडल थ्रू पैराडाइज' साइकिल रेस में 3,000 से अधिक साइकिल चालकों ने हिस्सा लिया, जबकि बच्चों और 45 वर्ष से अधिक आयु के प्रतिभागियों सहित विभिन्न श्रेणियों में कुल लगभग 5,000 प्रविष्टियाँ दर्ज हुईं। यह आयोजन केंद्र सरकार की 'फिट इंडिया' पहल के तहत आयोजित किया गया था, जिसका मूल उद्देश्य नागरिकों में शारीरिक फिटनेस और स्वस्थ जीवनशैली को प्रोत्साहित करना है।
रेस का मार्ग श्रीनगर के बुलेवार्ड रोड स्थित पुलिस गोल्फ कोर्स से शुरू होकर हरवान और फोरशोर से गुज़रता हुआ नागबल तक पहुँचा। प्रतियोगिता में बच्चों, महिलाओं, ओपन कैटेगरी के खिलाड़ियों और 45 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लिए अलग-अलग श्रेणियाँ निर्धारित थीं।
शहीद स्मारक टूर्नामेंट की घोषणा
DGP प्रभात ने समारोह में पुलिस शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके सम्मान में 'शहीद स्मारक फुटबॉल और हॉकी टूर्नामेंट' आयोजित करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजनों का दोहरा उद्देश्य है — शहीदों की स्मृति को जीवित रखना और युवाओं को मुख्यधारा की खेल गतिविधियों से जोड़ना।
गौरतलब है कि यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब जम्मू-कश्मीर में पुलिस-युवा संबंधों को मज़बूत करने की दिशा में कई पहलें की जा रही हैं। पुलिस प्रशासन के साथ मिलकर जिला स्तर पर खेल गतिविधियों का विस्तार कर रही है, ताकि अधिक से अधिक युवाओं को सहभागी बनाया जा सके।
युवाओं में अनुशासन और डिजिटल लत पर चिंता
DGP नलिन प्रभात ने अपने संबोधन में खेलों की भूमिका को व्यापक परिप्रेक्ष्य में रेखांकित किया। उनके अनुसार, खेल गतिविधियाँ युवाओं में अनुशासन, फिटनेस और स्वस्थ जीवनशैली विकसित करने में सहायक हैं। उन्होंने विशेष रूप से मोबाइल फोन की लत और स्क्रीन पर अत्यधिक समय बिताने की समस्या का उल्लेख करते हुए कहा कि खेलों में भागीदारी इन प्रवृत्तियों पर प्रभावी अंकुश लगा सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर पुलिस युवाओं के साथ मिलकर नशीले पदार्थों के सेवन और जुए जैसी सामाजिक बुराइयों से समाज को मुक्त कराने के प्रति प्रतिबद्ध है। इस संदर्भ में साइकिलिंग जैसे आयोजनों को महज एक खेल स्पर्धा नहीं, बल्कि एक सामाजिक हस्तक्षेप के रूप में देखा जा रहा है।
पिछले आयोजनों की सफलता और आगे की योजना
DGP ने 'कश्मीर मैराथन' और 'जश्न-ए-डल' जैसे हाल के आयोजनों में मिली जन-भागीदारी को 'काफी उत्साहजनक' बताया। उन्होंने संकेत दिया कि आगामी समय में इसी श्रृंखला में कई और खेल प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाएंगी, जिनमें शहीद स्मारक टूर्नामेंट केंद्रीय कड़ी होगी।
यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब जम्मू-कश्मीर में पुलिस की छवि सुधारने और आम नागरिकों — विशेषकर युवाओं — का भरोसा जीतने के प्रयास तेज़ हुए हैं। खेल कूटनीति और सामुदायिक पुलिसिंग का यह समन्वय एक नई दिशा की ओर इशारा करता है।