यूपी एमएलसी चुनाव 2026: भाजपा ने 6 सीटें बरकरार रखीं, नेताओं ने 2027 विधानसभा जीत का दावा किया
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक खंड की 11 सीटों पर हुए चुनाव के नतीजे 29 अक्टूबर 2026 को सामने आने के बाद राजनीतिक बयानबाज़ी तेज़ हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने परिणामों को अपनी जीत बताते हुए 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी बहुमत की सरकार बनाने का दावा किया है, जबकि समाजवादी पार्टी (सपा) के चुनावी धाँधली के आरोपों को पार्टी ने सिरे से खारिज किया है।
चुनाव परिणामों का हाल
घोषित नतीजों के अनुसार, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के 6 उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की, जबकि समाजवादी पार्टी को 4 सीटें मिलीं। भाजपा प्रदेश महासचिव गोविंद नारायण शुक्ला ने बताया कि पार्टी के पास पहले भी 6 सीटें थीं और अब भी 6 सीटें बरकरार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के कुल मतों में वृद्धि हुई है।
भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया
भाजपा राज्यसभा सदस्य राम प्रताप सिंह चौहान ने लखनऊ में मीडिया से कहा कि भाजपा ही जीती है और 2027 में भी निश्चित रूप से जीतेगी। उन्होंने अखिलेश यादव के प्रशासन पर दबाव बनाने के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा, 'कोई अधिकारी पर दबाव नहीं है। हमने पश्चिम क्षेत्र की तीनों सीटें जीती हैं। ब्रज क्षेत्र में एक सीट जीते और एक सीट तीन हज़ार कुछ वोटों से हारे। अगर कुछ करना होता तो वहाँ भी कर सकते थे न? यह बिल्कुल निष्पक्ष चुनाव है।'
उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री सुरेश खन्ना ने सपा की जीत को उसकी नीतियों की जीत मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा, 'यह समाजवादी पार्टी को समझ लेना चाहिए कि यह उसकी नीति की जीत नहीं है। इसमें उम्मीदवार का व्यक्तिगत महत्व ज़्यादा है।' खन्ना ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर तंज़ कसते हुए कहा कि 'अखिलेश यादव के पास नेगेटिव बोलने के अलावा कुछ है ही नहीं।'
अमरोहा के विजयी एमएलसी की बात
अमरोहा से पुनः निर्वाचित भाजपा शिक्षक एमएलसी डॉ. हरि सिंह ढिल्लों ने पूरी चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष बताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने शिक्षण संस्थानों के लिए बहुत काम किया है, इसीलिए शिक्षकों ने उन्हें आशीर्वाद दिया है। सपा प्रमुख के प्रशासनिक हेराफेरी के आरोप को उन्होंने 'बिल्कुल झूठ' करार दिया।
ढिल्लों ने यह भी कहा कि आम जनमानस अभी भाजपा के साथ है और यह सपा की गलतफ़हमी है कि एमएलसी चुनाव में कुछ सीटें मिलने से उसकी 'लहर' आ गई है।
सपा के आरोप और राजनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने वाराणसी शिक्षक सीट के नतीजे जारी करने में देरी को लेकर प्रशासन पर दबाव बनाने का आरोप लगाया था। भाजपा नेताओं ने इस आरोप को यह कहते हुए खारिज किया कि यदि वास्तव में इरादा होता, तो उन सीटों पर भी परिणाम प्रभावित किए जा सकते थे जहाँ पार्टी हारी।
यह ऐसे समय में आया है जब 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ दोनों प्रमुख दलों में जोर पकड़ रही हैं। एमएलसी चुनाव, जिनमें शिक्षक और स्नातक मतदाता भाग लेते हैं, को अक्सर जनमत का पैमाना नहीं माना जाता, लेकिन दोनों पक्षों द्वारा इन्हें राजनीतिक बढ़त के रूप में भुनाने की कोशिश होती है।
आगे क्या होगा
वाराणसी शिक्षक सीट का परिणाम अभी तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं होने की स्थिति में दोनों दल उसे अपने-अपने पक्ष में भुनाने की कोशिश में हैं। आने वाले महीनों में दोनों प्रमुख दल 2027 की चुनावी रणनीति तेज़ करेंगे, और यह एमएलसी नतीजे उस बहस का हिस्सा बनते रहेंगे।